अमर उजाला की पड़ताल में खुली पोल: सीएम योगी के बयान का भी नहीं असर, ये सड़कें बयां कर रही विभाग की लापरवाही
Saharanpur News : अमर उजाला ने शहर की सड़कों की पड़ताल की तो विभाग की पोल खुल गई। खास बात है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान देने के बाद भी विभाग ने ऐसी लापरवाही की है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में बयान दिया है कि जो भी विभाग या ठेकेदार सड़क बनाएगा वह पांच साल की गारंटी लेगा। मुख्यमंत्री का यह बयान सराहनीय है, लेकिन महानगर की सड़कों पर नजर डालें तो कई ऐसी सड़कें हैं जो पांच साल तो दूर की बात है पांच महीने भी नहीं टिक सकीं। हैरानी की बात यह है कि जब पांच माह के अंदर दो बार सड़क की मरम्मत करनी पड़ जाए तो ऐसी सड़कें बनाने का क्या फायदा। बुधवार को अमर उजाला टीम ने ऐसी ही सड़कों की पड़ताल की।
दरअसल, लोक निर्माण विभाग ने मार्च 2023 में पुल जोगियान से बालाजी धाम तक सड़क का निर्माण किया। इस सड़क पर 3.10 करोड़ रुपये की लागत आई। सड़क की गारंटी दो साल की है, लेकिन सड़क बनने के बाद पांच महीने के भीतर दो बार टूट चुकी है। सड़क जगह-जगह से दरक गई है, जबकि कई जगहों पर गड्ढे बन गए हैं। जिनको भरने के लिए पैचिंग की गई है, जिससे सड़क खराब लग रही है।
लोहानी सराय की सड़क नगर निगम तीन साल में दो बार बनवा चुका है, लेकिन वह भी बहुत अच्छी हालत में नहीं है। वहीं, पेपर मिल रोड दो वर्ष पहले ही विकास प्राधिकरण ने बनाया था। आरसीसी से बने इस रोड में जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। हकीकतनगर तिराहे से कलक्ट्रेट तिराहे तक की सड़क एक वर्ष पहले बनाई गई थी, जो जगह-जगह से धंस गई है। यही हाल महानगर को चारों ओर बने हाईवे से जोड़ने वाले मार्गों की है। इनमें देहरादून रोड और दिल्ली रोड की हालत सबसे खराब है।
नहीं टिकी मॉडल रोड, ढक्कन भी हो गए गायब
नगर निगम ने घंटाघर से हसनपुर चौक तक मॉडल रोड का निर्माण कराया था। इस रोड को पांच साल तक दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण एजेंसी की थी, लेकिन सड़क को दो साल बाद ही स्मार्ट सिटी के तहत ले लिया गया। इसके बाद निर्माण एजेंसी का पीछा छूट गया और वह पांच साल की गारंटी के साथ भुगतान लेकर चलती बनी। निर्माण करने वालों में एक जनप्रतिनिधि का भाई भी शामिल बताया जा रहा है। इतना ही नहीं, घंटाघर से कोर्ट रोड पुल तक फुटपाथ की जगह नाले पर सीमेंट के ढक्कन रखे गए थे, जो गायब हो गए।
स्मार्ट रोड की लायबिलिटी दो साल
स्मार्ट सिटी योजना के तहत महानगर में 23 किलोमीटर की स्मार्ट रोड तैयार की जा रही हैं। इन सड़कों के निर्माण पर करोड़ों रुपया खर्च हो रहा है। जिनकी लायबिलिटी दो साल है। इसमें निर्माण एजेंसी का दस फीसदी पैसा रोका जाता है, जिसका भुगतान दो साल बाद उस स्थिति में किया जाता है यदि सड़क ठीक रही हो।
यदि सड़क बनने के बाद जल्दी टूट रही है तो वह ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है कि वह उसे अपने रुपयों से ठीक कराएगा। नवीनीकरण वाली सड़कों की गारंटी दो साल की होती है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अब सड़कों की पांच साल की गारंटी होगी। - धर्मेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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पहले निगम की सड़कों की गारंटी पांच साल की ही होती थी, लेकिन बाद में शासन का आदेश आया था, जिसमें एक साल की लायबिलिटी तय कर दी गई थी। फिलहाल वही चल रहा है, लेकिन अब मुख्यमंत्री के आदेश के बाद फिर से पांच साल करने जा रहे हैं। - आलोक श्रीवास्ताव, अधिशासी अभियंता (निर्माण) नगर निगम
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