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पुलिस से बचने के लिए खेत, रेलवे ट्रैक से होकर आ रहे श्रमिक
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सहारनपुर में लॉकडाउन के दौरान लुधियान से पैदल चलकर सहारनपुर पहुंचे मजदूर और बच्चे
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने की वजह से थके और भूखे मजदूरों को कई जगहों पर गाड़ियों में बिठाकर लौटाया जा रहा है। ऐसे में कई मजदूर हाईवे छोड़ खेतों और रेलवे ट्रैक के साथ-साथ पैदल ही सफर तय करने को मजबूर हैं। जिनमें मासूम बच्चों से लेकर महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। जाहिर है इसमें कामगारों के लिए जान का खतरा बना हुआ है क्योंकि मालगाड़ी और कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों का भी संचालन शुरू हो गया है।
मजदूरों के हालात जानने के लिए अमर उजाला की टीम बुधवार की सुबह अंबाला हाईवे पहुंची। राधा स्वामी सत्संग भवन में मजदूरों के लिए मेजर सेंटर बनाया गया है, जहां से उन्हें बसों के जरिए गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। सत्संग भवन के बाहर हाईवे पर सैकड़ों मजदूरों की भीड़ जमा मिली। पहले एंट्री पाने को मजदूरों के बीच मारामारी की स्थिति दिखी। इसकी वजह से सोशल डिस्टेंसिंग व्यवस्था ध्वस्त नजर आई। हालांकि पुलिस व्यवस्था बनाने के लिए मशक्कत करती रही, जिनमें एसपी देहात भी शामिल थे। सरसावा की ओर बढ़ने पर खेतों में मजदूर खड़े मिले। उन्होंने बताया कि वह लुधियाना से करीब 300 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय कर आए हैं, मगर पुलिसकर्मी उन्हें आगे नहीं जाने दे रहे हैं। कुछ दूरी पर चार मजदूर मिले, जो यमुनानगर से आए थे और उन्हें कुशीनगर जाना था। आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें रोककर एक गाड़ी में बिठाकर यमुनानगर वापस छोड़कर आने को कहा। जैसे-तैसे वह बीच में ही उतरकर खेतों के रास्ते निकलने की कोशिश कर रहे हैं। अंबाला से सहारनपुर को आने वाले रेल मार्ग के साथ-साथ बने कच्चे रास्ते पर कई परिवार सिर पर सामान की गठरी रखे गुजरते मिले, जिनमें तीन से पांच साल के बच्चे भी शामिल थे। ऐसे में वह रेल मार्ग के साथ-साथ पैदल निकल रहे हैं।
यमुना पार कराने को वसूली
पंजाब और हरियाणा से आने वाले मजदूरों को यमुना नदी के पुल पर रोका जा रहा है। कार्रवाई से बचने के लिए मजदूर पुल की बजाय नौका से यमुना पार कर आने को मजबूर हैं। ऐसे में नौका चलाने वाले मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे नदी पार कराने के नाम पर 200 से 500 रुपये प्रति व्यक्ति वसूल रहे हैं।
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ग्रामीणों का काम लाजवाब
मेजर सेंटर से पहले मजदूरों को रोकने की वजह से मजदूर या तो सड़कों पर ही खड़े हैं या फिर खेतों के रास्ते निकल रहे हैं। ऐसे में गांव सौराना के लोग उनकी मदद को आगे आए हैं, जो मजदूरों के भोजन की व्यवस्था अपने स्तर से कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दो दिन पहले एक गर्भवती महिला ने रास्ते ही में बच्ची को जन्म दिया, जिसे ग्रामीणों ने आश्रय दिया।
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मजदूरों के हालात जानने के लिए अमर उजाला की टीम बुधवार की सुबह अंबाला हाईवे पहुंची। राधा स्वामी सत्संग भवन में मजदूरों के लिए मेजर सेंटर बनाया गया है, जहां से उन्हें बसों के जरिए गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। सत्संग भवन के बाहर हाईवे पर सैकड़ों मजदूरों की भीड़ जमा मिली। पहले एंट्री पाने को मजदूरों के बीच मारामारी की स्थिति दिखी। इसकी वजह से सोशल डिस्टेंसिंग व्यवस्था ध्वस्त नजर आई। हालांकि पुलिस व्यवस्था बनाने के लिए मशक्कत करती रही, जिनमें एसपी देहात भी शामिल थे। सरसावा की ओर बढ़ने पर खेतों में मजदूर खड़े मिले। उन्होंने बताया कि वह लुधियाना से करीब 300 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय कर आए हैं, मगर पुलिसकर्मी उन्हें आगे नहीं जाने दे रहे हैं। कुछ दूरी पर चार मजदूर मिले, जो यमुनानगर से आए थे और उन्हें कुशीनगर जाना था। आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें रोककर एक गाड़ी में बिठाकर यमुनानगर वापस छोड़कर आने को कहा। जैसे-तैसे वह बीच में ही उतरकर खेतों के रास्ते निकलने की कोशिश कर रहे हैं। अंबाला से सहारनपुर को आने वाले रेल मार्ग के साथ-साथ बने कच्चे रास्ते पर कई परिवार सिर पर सामान की गठरी रखे गुजरते मिले, जिनमें तीन से पांच साल के बच्चे भी शामिल थे। ऐसे में वह रेल मार्ग के साथ-साथ पैदल निकल रहे हैं।
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यमुना पार कराने को वसूली
पंजाब और हरियाणा से आने वाले मजदूरों को यमुना नदी के पुल पर रोका जा रहा है। कार्रवाई से बचने के लिए मजदूर पुल की बजाय नौका से यमुना पार कर आने को मजबूर हैं। ऐसे में नौका चलाने वाले मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे नदी पार कराने के नाम पर 200 से 500 रुपये प्रति व्यक्ति वसूल रहे हैं।
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ग्रामीणों का काम लाजवाब
मेजर सेंटर से पहले मजदूरों को रोकने की वजह से मजदूर या तो सड़कों पर ही खड़े हैं या फिर खेतों के रास्ते निकल रहे हैं। ऐसे में गांव सौराना के लोग उनकी मदद को आगे आए हैं, जो मजदूरों के भोजन की व्यवस्था अपने स्तर से कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दो दिन पहले एक गर्भवती महिला ने रास्ते ही में बच्ची को जन्म दिया, जिसे ग्रामीणों ने आश्रय दिया।

सहारनपुर में लॉकडाउन के दौरान रेलवे स्टेशन आती ट्रेने- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर में लॉकडाउन के दौरान लुधियान से पांच दिन रेलवे ट्रक पर पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंचे मज?- फोटो : SAHARANPUR

हारनपुर में लॉकडाउन के दौरान लुधियान से पांच दिन पैदल चलकर सहारनपुर पहुंचे मजदूर और बच्चे- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर में लॉकडाउन के दौरान लुधियान से पांच दिन पैदल चलकर सहारनपुर कोट रोड़ पहुंचे मजदूर- फोटो : SAHARANPUR