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Saharanpur News: तिरपाल में रह रहे लोग, कैसे साबित करे पात्रता

Fri, 23 Dec 2022 10:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Dec 2022 10:39 PM IST
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Families living in tarpaulin, what other proof of poverty should the government give
हकीमपुरा में तिरपाल के नीचे खड़ी महिला। - फोटो : SAHARANPUR
तिरपाल में रह रहे परिवार, गरीबी का और क्या प्रमाण दें सरकार
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सहारनपुर। सर्दी की ठिठुरन भरी रात और पारा पांच डिग्री के आसपास, ऐसे में तिरपाल डालकर रात काट रहे परिवार अपनी गरीबी का और क्या प्रमाण दें। प्रधानमंत्री आवास योजना से मकान बनवाने के लिए ये चक्कर काट रहे हैं, लेकिन इनकी गरीबी शासन-प्रशासन को दिखाई नहीं दे रही हैं। पन्नी और तिरपाल की छत बनाकर उसमें गुजर बसर करने वाले अनेक परिवारों को कईं बार आवेदन करने के बाद भी पात्र नहीं माना गया है।
वार्ड नंबर आठ में आने वाले गांव बिशनपुर निवासी अमन कुमार टीन डालकर एक छोटे से मकान में रहते हैं, जिसकी दीवारों पर पलस्तर तक नहीं है। अमर ने बताया कि वह चार बार आवेदन कर चुके हैं। जांच के लिए विभाग से सर्वेयर आते हैं, लेकिन अपात्र बताकर चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि अब वह उम्मीद छोड़ चुके हैं।
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हकीमपुरा निवासी रामजीलाल के पास टीन डला हुआ मकान है, जिसमें दरवाजे की जगह परदा लटका है। सामने तिरपाल की छत बनाकर उसमें दो चारपाई डाली हुई हैं। बच्चे टीन डले मकान में और रामजीलाल पत्नी के साथ तिरपाल के नीचे सोते हैं। वह भी पीएम आवास के लिए तीन बार आवेदन कर चुके हैं, लेकिन उनको पात्र नहीं माना जा रहा है।
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हकीमपुरा में 68 वर्षीय सुन्हैरी भी रहती हैं, जो विधवा हैं। उनके पास टीन डला हुआ मकान है, जिसमें दरवाजा तक नहीं है। उन्होंने बताया कि वह और उनका बेटा प्रधानमंत्री आवास के लिए कईं बार आवेदन कर चुके हैं, लेकिन मकान नहीं मिला है। अब योजना का लाभ मिलने की उम्मीद भी छोड़ चुके हैं। बेहट रोड के ही गांव में नरेंद्र का परिवार रहता है। इनके पास एक जर्जर कमरा है, जिसमें पूरा परिवार नहीं आ पाता है। ऐसे में बगल में तिरपाल डाली गई है। कुछ लोग कमरे में और कुछ इसी तिरपाल में रात गुजारते हैं। तिरपाल ही में चूल्हा और बर्तन रखे गए हैं।
नरेंद्र की पत्नी मौसम ने बताया कि वह कईं बार आवेदन कर चुके हैं, लेकिन मकान नहीं बना है। वार्ड आठ ही में बिजेंद्र पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। इनके पास बल्लियों की छत वाला कमरा है, जबकि बाहर तिरपाल डाली गई है। बिजेंद्र को अब तो यह भी याद नहीं है कि वह कितनी बार आवेदन कर चुके हैं। उनकी पत्नी का सवाल है कि पात्रता साबित करने के लिए आखिर वह क्या सुबूत अधिकारियों को दें, जिससे पक्के मकान में रहने का उनका भी सपना पूरा हो जाए। हकीमपुरा ही में पूजा का परिवार रहता है, जिनके पास 40 साल से अधिक पुराना जर्जर मकान है, जिसमें जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। पूजा ने बताया कि उनके छोटे बच्चे भी तिरपाल में सोते हैं। इनका कहना है कि सबके मकान बन रहे हैं, लेकिन उनको पात्र नहीं माना जा रहा है। संवाद
बिचौलियों को पैसा देने के बाद भी नहीं मिला लाभ
कुछ पीड़ितों का आरोप है कि योजना का लाभ दिलवाने के लिए कुछ बिचौलियों ने उनसे 10 से 20 हजार रुपये तक भी लिए हुए हैं। अब ना तो मकान बना है और ना ही पैसा वापस मिला है। कुछ का यह कहना है कि उन्होंने पैसा नहीं दिया, इसलिए उनका मकान पास नहीं हुआ।
-मेरे सहारनपुर में कार्यभार ग्रहण करने से पहले का करीब 14 हजार लोगों का डाटा रुका हुआ है, जिसको हमने व्यवस्थित कराया है। उच्चाधिकारियों को भी इसकी सूचना दी गई है। जैसे ही शासन से डिमांड आएगी तो हम डाटा भेजेंगे। लेकिन हमने 500 से अधिक लोगों का डाटा भेजा भी है।

रजनी पुंडीर, परियोजना अधिकारी, डूडा।

हकीमपुरा में तिरपाल में बैठी मौसम।

हकीमपुरा में तिरपाल में बैठी मौसम।- फोटो : SAHARANPUR

वार्ड आठ में जर्जर मकान के बाहर चूल्हे पर भोजन बनाती पूजा।

वार्ड आठ में जर्जर मकान के बाहर चूल्हे पर भोजन बनाती पूजा।- फोटो : SAHARANPUR

टीन डले मकान के बाहर खड़ी सुन्हैरी।

टीन डले मकान के बाहर खड़ी सुन्हैरी।- फोटो : SAHARANPUR

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