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हालात भांपने में नाकाम अफसरों पर गिरी गाज
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 25 May 2017 12:54 AM IST
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तनाव को देखते हुए तैनात फोर्स।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में शब्बीरपुर से उठी जातीय हिंसा की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही है। बार-बार हो रही घटनाओं को भांपने में नाकाम साबित रहे अफसरों पर आखिरकार शासन का चाबुक चल ही गया। देर रात नए डीएम ने सहारनपुर में कार्यभार ग्रहण कर लिया।
बुधवार को एक ओर जहां डीएम और एसएसपी को निलंबित कर दिया गया, वहीं कमिश्नर और डीआईजी को भी हटा दिया गया। इनके अलावा एसडीएम और सीओ को भी निलंबित कर दिया गया है।
जिले में 20 अप्रैल की सड़क दूधली की घटना के बाद से सहारनपुर लगातार सुलग रहा है। सड़क दूधली के सांप्रदायिक फसाद के बाद प्रशासन पांच मई की शब्बीरपुर की घटना को भी रोकने में नाकाम रहा,
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जहां जातीय हिंसा में दो दर्जन से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया था, जबकि एक युवक की मौत हो गई थी। तीसरी चूक प्रशासन से नौ मई को हुई, जब उपद्रवियों ने जनपद में आठ से नौ जगह उत्पात मचाया था।
मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शब्बीरपुर पहुंचने से दस मिनट पहले भी गांव के हालात खराब हो गए थे। इसके बाद मायावती की सभा से लौट रहे लोगों पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें एक युवक की जान चली गई, जबकि पांच गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
ऐसे में शासन ने गंभीरता दिखाते हुए लखनऊ से आला अफसरों की एक टीम रातोंरात सहारनपुर भेजी। मगर आला अफसरों के सहारनपुर में रहने के दौरान बुधवार की सुबह फिर से थाना बड़गांव क्षेत्र में ही दो युवकों पर गोलियों से हमला कर दिया गया।
इसके अलावा दोपहर के समय जनता रोड के गांव आसनवाली में एक ग्राम प्रधान को गोली मार दी गई। लगातार बिगड़ते हालात पर मुख्यमंत्री ने डीएम एनपी सिंह और एसएसपी एससी दुबे को निलंबित कर दिया।
एसडीएम रामपुर मनिहारान और सीओ के भी निलंबन की सूचना रही। इनके अलावा मंडल के दोनों बड़े अधिकारियों कमिश्नर एमपी अग्रवाल और डीआईजी जेके शाही को भी हटा दिया गया।
नए डीएम के रूप में प्रमोद कुमार पांडेय ने देर रात ही स्टेट प्लेन से सहारनपुर पहुंचकर चार्ज संभाल लिया। एसएसपी के रूप में बबलू कुमार को सहारनपुर भेजा जा रहा है। जिस तरह से सहारनपुर अंदर ही अंदर सुलग रहा है। ऐसे माहौल में जनपद में शांति व्यवस्था कायम कराना नए अधिकारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
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बुधवार को एक ओर जहां डीएम और एसएसपी को निलंबित कर दिया गया, वहीं कमिश्नर और डीआईजी को भी हटा दिया गया। इनके अलावा एसडीएम और सीओ को भी निलंबित कर दिया गया है।
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जिले में 20 अप्रैल की सड़क दूधली की घटना के बाद से सहारनपुर लगातार सुलग रहा है। सड़क दूधली के सांप्रदायिक फसाद के बाद प्रशासन पांच मई की शब्बीरपुर की घटना को भी रोकने में नाकाम रहा,
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जहां जातीय हिंसा में दो दर्जन से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया था, जबकि एक युवक की मौत हो गई थी। तीसरी चूक प्रशासन से नौ मई को हुई, जब उपद्रवियों ने जनपद में आठ से नौ जगह उत्पात मचाया था।
मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शब्बीरपुर पहुंचने से दस मिनट पहले भी गांव के हालात खराब हो गए थे। इसके बाद मायावती की सभा से लौट रहे लोगों पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें एक युवक की जान चली गई, जबकि पांच गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
ऐसे में शासन ने गंभीरता दिखाते हुए लखनऊ से आला अफसरों की एक टीम रातोंरात सहारनपुर भेजी। मगर आला अफसरों के सहारनपुर में रहने के दौरान बुधवार की सुबह फिर से थाना बड़गांव क्षेत्र में ही दो युवकों पर गोलियों से हमला कर दिया गया।
इसके अलावा दोपहर के समय जनता रोड के गांव आसनवाली में एक ग्राम प्रधान को गोली मार दी गई। लगातार बिगड़ते हालात पर मुख्यमंत्री ने डीएम एनपी सिंह और एसएसपी एससी दुबे को निलंबित कर दिया।
एसडीएम रामपुर मनिहारान और सीओ के भी निलंबन की सूचना रही। इनके अलावा मंडल के दोनों बड़े अधिकारियों कमिश्नर एमपी अग्रवाल और डीआईजी जेके शाही को भी हटा दिया गया।
नए डीएम के रूप में प्रमोद कुमार पांडेय ने देर रात ही स्टेट प्लेन से सहारनपुर पहुंचकर चार्ज संभाल लिया। एसएसपी के रूप में बबलू कुमार को सहारनपुर भेजा जा रहा है। जिस तरह से सहारनपुर अंदर ही अंदर सुलग रहा है। ऐसे माहौल में जनपद में शांति व्यवस्था कायम कराना नए अधिकारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।