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डायरिया की दस्तक, प्रतिदिन भर्ती हो रहे तीन से चार बच्चे
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सहारनपुर। मौसम बदलने के साथ ही बच्चों में डायरिया की समस्या बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में पहुंच रहे मरीजों में से करीब 30 फीसदी बच्चों में डायरिया की शिकायत है। गंभीर हालत के चलते प्रतिदिन तीन से चार बच्चों को भर्ती भी करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बिरेंद्र भट्ट ने बताया कि मौसम बदलने, ज्यादा भोजन करने, दूषित फल और दूषित पानी पीने, अधिक ठंडा पानी पीने, बर्फ आदि खाने से पेट खराब रहने का डर रहता है। दूषित पानी के साथ पेट में कई अशुद्धियां चली जाती हैं, जो डायरिया, उल्टी और अन्य बीमारियों की वजह बनती हैं। फूड प्वाइजनिंग और तेज मिर्च मसाले वाला भोजन खाने से भी डायरिया हो सकता है। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में डायरिया के मरीज बढ़ना आम बात है। एक बार भोजन करने के बाद उसके पचने से पहले ही दोबारा भोजन करना भी हानिकारक रहता है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 50 बच्चे पहुंच रहे हैं, जिनमें से 15 से 20 मरीज डायरिया की समस्या वाले हैं। गंभीर हालत के चलते तीन से चार और कभी कभी पांच बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।
डायरिया के लक्षण
- दस्त आने से पहले पेट में हल्के दर्द की शिकायत।
- सेहत में तेजी से गिरावट आना, पेट के दबाने पर दर्द होना।
- जीभ सूखना तथा हाथ और पैरों का ठंडा पड़ना।
- शरीर में बेचैनी और चलने में थकान महसूस होना आदि।
ऐसे करें बचाव
- ओआरएस का घोल या एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और चुटकी भर नमक मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाएं।
- भोजन के रूप में दही-चावल या खिचड़ी खाएं।
- चावल का धोवन (चावल उबलने के बाद बचा हुआ गाढ़ा सूप), मूंग या मसूर की दाल का पानी पीएं।
- साबूदाना की खीर, छाछ या दही इच्छानुसार सेवन करें।
- सेब का मुरब्बा या केले और चावल खाएं।
- पानी को उबालकर, ठंडा करके पीएं।
- भोजन करने के पहले और शौच के बाद हाथों को अच्छे से धुलें।
- बासी, तली, मिर्च-मसालेदार चीजो का सेवन न करें।
- बासी, खट्टी महक वाला दूध न पीएं।
- भोजन को ढककर रखें, जिससे उस पर मक्खियां न बैठ पाएं।
- फ्रीज में रखे पदार्थों को निकालने के तुरंत बाद न खाएं पहले कुछ देर बाहर रखा रहने दें।
- बच्चों को फास्ट फूड को खिलाने से बचें।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बिरेंद्र भट्ट ने बताया कि मौसम बदलने, ज्यादा भोजन करने, दूषित फल और दूषित पानी पीने, अधिक ठंडा पानी पीने, बर्फ आदि खाने से पेट खराब रहने का डर रहता है। दूषित पानी के साथ पेट में कई अशुद्धियां चली जाती हैं, जो डायरिया, उल्टी और अन्य बीमारियों की वजह बनती हैं। फूड प्वाइजनिंग और तेज मिर्च मसाले वाला भोजन खाने से भी डायरिया हो सकता है। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में डायरिया के मरीज बढ़ना आम बात है। एक बार भोजन करने के बाद उसके पचने से पहले ही दोबारा भोजन करना भी हानिकारक रहता है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 50 बच्चे पहुंच रहे हैं, जिनमें से 15 से 20 मरीज डायरिया की समस्या वाले हैं। गंभीर हालत के चलते तीन से चार और कभी कभी पांच बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।
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डायरिया के लक्षण
- दस्त आने से पहले पेट में हल्के दर्द की शिकायत।
- सेहत में तेजी से गिरावट आना, पेट के दबाने पर दर्द होना।
- जीभ सूखना तथा हाथ और पैरों का ठंडा पड़ना।
- शरीर में बेचैनी और चलने में थकान महसूस होना आदि।
ऐसे करें बचाव
- ओआरएस का घोल या एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और चुटकी भर नमक मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाएं।
- भोजन के रूप में दही-चावल या खिचड़ी खाएं।
- चावल का धोवन (चावल उबलने के बाद बचा हुआ गाढ़ा सूप), मूंग या मसूर की दाल का पानी पीएं।
- साबूदाना की खीर, छाछ या दही इच्छानुसार सेवन करें।
- सेब का मुरब्बा या केले और चावल खाएं।
- पानी को उबालकर, ठंडा करके पीएं।
- भोजन करने के पहले और शौच के बाद हाथों को अच्छे से धुलें।
- बासी, तली, मिर्च-मसालेदार चीजो का सेवन न करें।
- बासी, खट्टी महक वाला दूध न पीएं।
- भोजन को ढककर रखें, जिससे उस पर मक्खियां न बैठ पाएं।
- फ्रीज में रखे पदार्थों को निकालने के तुरंत बाद न खाएं पहले कुछ देर बाहर रखा रहने दें।
- बच्चों को फास्ट फूड को खिलाने से बचें।