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दारुल उलूम की तालीम के हैं मुरीद
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 06 Apr 2016 12:00 AM IST
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Dr. Imame-Haram. Saleh bin Mohammed Al Talib
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में मुसलमानों की मुकद्दस सरजमीं काबा शरीफ में जहां पूरी दुनिया के मुसलमान पहुंचकर खुद को सबसे खुशनसीब मानते हैं। उसी सरजमीं काबा से आने वाले इमाम-ए-हरम शेख सालेह मोहम्मद बिन इब्राहिम अल तालिब मानते हैं कि दीनी तालीम में पूरी दुनिया को राह दिखाने वाले दारुल उलूम देवबंद और यहां की रशीदिया मस्जिद अपने आप में नायाब है।
उनसे पहले काबा से आने वाले इमाम भी इस बड़े इदारे की उम्दा तालीम के मुरीद रहे हैं।यही बड़ी वजह है कि महज पांच साल के अंदर इस इस्लामिक शैक्षिक संस्था और रशीदिया मस्जिद देखने के लिए तीसरे इमाम-ए-हरम मंगलवार को देवबंद पहुंचे।
पांच साल पहले वर्ष 2011 के मार्च महीने में इमाम-ए-हरम शेख अब्दुल रहमान अल सुदैश यहां पहुंचे थे। वह जुमे के रोज आए और दोपहर की नमाज अदा कराने से पहले सभी को इंसानियत अपनाने का पैगाम दिया।
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इमाम-ए-हरम शेख सालेह मोहम्मद बिन इब्राहिम अल तालिब के देवबंद पहुंचने पर उनका संबोधन सुनने और उनकी मौजूदगी में रशीदिया मस्जिद में नमाज अदा करने की इच्छा हजारों लोग पूरी नहीं कर पाए।
इमाम-ए-हरम का कार्यक्रम पहले चार अप्रैल को प्रस्तावित था। अचानक कार्यक्रम बदलने से काफी संख्या में लोग यहां तक नहीं पहुंच पाए। वहीं शायर और उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के चेयरमैन नवाज देवबंदी ने भी मंगलवार को इमाम-ए-हरम की मौजूदगी में दोपहर में अदा की गई नमाज में शिरकत की।
वर्ष 2011 में मार्च में आए उस समय के इमाम-ए-हरम शेख अब्दुल रहमान अल सुदैश जुमे के रोज दारुल उलूम देवबंद पहुंचे थे। रशीदिया मस्जिद में दोपहर को जब उनकी मौजूदगी में जुमे की नमाज अदा की गई तो मस्जिद से लेकर इससे सटे दारुल उलूम के बड़े परिसर से बाहर मार्केट और सड़कों तक नमाजियों का सैलाब नजर आया था।
मंगलवार को इमाम-ए-हरम की मौजूदगी में नमाज अदा करने वाले कई नमाजियों ने बताया कि जुमे की वो नमाज तो सबसे यादगार नमाज थी।
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उनसे पहले काबा से आने वाले इमाम भी इस बड़े इदारे की उम्दा तालीम के मुरीद रहे हैं।यही बड़ी वजह है कि महज पांच साल के अंदर इस इस्लामिक शैक्षिक संस्था और रशीदिया मस्जिद देखने के लिए तीसरे इमाम-ए-हरम मंगलवार को देवबंद पहुंचे।
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पांच साल पहले वर्ष 2011 के मार्च महीने में इमाम-ए-हरम शेख अब्दुल रहमान अल सुदैश यहां पहुंचे थे। वह जुमे के रोज आए और दोपहर की नमाज अदा कराने से पहले सभी को इंसानियत अपनाने का पैगाम दिया।
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इमाम-ए-हरम शेख सालेह मोहम्मद बिन इब्राहिम अल तालिब के देवबंद पहुंचने पर उनका संबोधन सुनने और उनकी मौजूदगी में रशीदिया मस्जिद में नमाज अदा करने की इच्छा हजारों लोग पूरी नहीं कर पाए।
इमाम-ए-हरम का कार्यक्रम पहले चार अप्रैल को प्रस्तावित था। अचानक कार्यक्रम बदलने से काफी संख्या में लोग यहां तक नहीं पहुंच पाए। वहीं शायर और उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के चेयरमैन नवाज देवबंदी ने भी मंगलवार को इमाम-ए-हरम की मौजूदगी में दोपहर में अदा की गई नमाज में शिरकत की।
वर्ष 2011 में मार्च में आए उस समय के इमाम-ए-हरम शेख अब्दुल रहमान अल सुदैश जुमे के रोज दारुल उलूम देवबंद पहुंचे थे। रशीदिया मस्जिद में दोपहर को जब उनकी मौजूदगी में जुमे की नमाज अदा की गई तो मस्जिद से लेकर इससे सटे दारुल उलूम के बड़े परिसर से बाहर मार्केट और सड़कों तक नमाजियों का सैलाब नजर आया था।
मंगलवार को इमाम-ए-हरम की मौजूदगी में नमाज अदा करने वाले कई नमाजियों ने बताया कि जुमे की वो नमाज तो सबसे यादगार नमाज थी।