तीन साल से लापता शाहजेब (11) के मिलने के बाद परिवार में ईद जैसी खुशियां हैं। सहारनपुर में बेहट रोड स्थित डिफेंस कॉलोनी निवासी शाह आलम ने कहा कि अब परिवार में खुशी का माहौल है। बताया गया कि शाह आलम शाहजेब के दादा के छोटे भाई है।
PHOTOS: घर में ईद जैसी खुशियां, शाहजेब को देख हैरान रह गए लोग, पल-भर में करोड़पति बना ये बच्चा
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नागल क्षेत्र के गांव पांडोली निवासी नावेद मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे। पत्नी इमराना से उनको एकलौता बेटा शाहजेब हुआ। सब ठीक चल रहा था। किसी बात को लेकर अनबन हुई तो इमराना आठ साल के बेटे शाहजेब को लेकर नौ जुलाई 2019 को अपने मायके यमुनानगर चली गई। वहां से बिना किसी को बताए बेटे के साथ पिरान कलियर में जाकर रहने लगी। वह दरगाह की साफ सफाई करती थी। पत्नी और बेटे के गम में बीमार नावेद की दिसंबर 2019 में मृत्यु हो गई। इसी दौरान डेढ़ साल पहले कलियर में ही कोरोना से इमराना की भी मौत हो गई। बच्चा शाहजेब लावारिस हो गया।
वहीं तीन दिन पहले छोटे दादा शाह आलम का दामाद मोबीन पिरान कलियर गया, जहां पर दरगाह के पास रहने वाले दरगाह के पदाधिकारी मुनव्वर के घर के बाहर उसे शाहजेब मिल गया। उनकी सूचना पर परिजन तुरंत पिरान कलियर पहुंचे और शाहजेब को घर ले आए। शाहजेब के घर आने से दादा शाह आलम, दादी शहनाज बानो, चाचा रियाज आलम, शाहनवाज, गुलनवाज, फैयाज आलम समेत सभी परिजन ईद जैसी खुशी मना रहे हैं।
अब पढ़ कर डॉक्टर बनाना चाहता है शाहजेब
मां इमराना की मौत के बाद शाहजेब ने दरगाह पर काम किया और मांग कर खाना भी खाया। बाद में वह शहजाद की चाय की दुकान पर 150 रुपये रोजाना पर काम करने लगा था। घर लौट कर आए शाहजेब ने बताया कि जब वह गांव से गया था तो नागल के स्कूल में कक्षा दो में पढ़ता था। वह अब पढ़ कर डॉक्टर बनाना चाहता है। दादा शाह आलम का कहना है कि वो बच्चे की पढ़ा कर ऊंची तालीम दिलाएंगे।
करीब 75 लाख की संपत्ति की मालिक है शाहजेब
शाहजेब के पिता नावेद ने गांव पांडोली में करीब पांच बीघा जमीन खरीदी और मकान बनाया था। शाहजेब के दादा याकूब रिटायर्ड शिक्षक थे। इमराना के पोते शाहजेब को लेकर जाने और बेटे नावेद की मौत के बाद दादा याकूब ने करीब 75 लाख रुपये कीमत की जायदाद की वसीयत पोते शाहजेब के नाम कर उसकी देखभाल का जिम्मा अपने छोटे भाई शाह आलम को दिया था।