बड़ा फैसला: अदालत ने हत्या के मामले में सात दोषियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
हत्या के मामले में कोर्ट ने सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद कोर्ट के बाहर दोनों पक्षों के लोगों की भीड़ लग गई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को वहां से हटाया।
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सहारनपुर में गांव संसारपुर के अतीक हत्याकांड के मामले में न्यायालय ने मंगलवार की देर शाम सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट के बाहर भारी संख्या में दोनों पक्षों के लोग एकत्र हो गए, जिसके चलते मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को कोर्ट परिसर से हटाया, जिसके बाद दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस जिला कारागार लेकर गई।
कोतवाली बेहट क्षेत्र के गांव संसारपुर निवासी अजीम खान ने 1995 में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें अजीम खान ने बताया था कि 10 मई की रात को उनकी ट्यूबवेल पर लगा अल्टीनेटर चोरी हो गया था। तब, गांव के ही रियाज, खुशनूद, मशकूर उसके भतीजे अतीक के पास आए और कहा कि चोरी हुआ अल्टीनेटर कहां रखा है, इसकी जानकारी उनके पास है। तब अतीक इन पर विश्वास करके आरोपियों के साथ चला गया। आरोपी अतीक को गांव में ही नानू के घर ले गए थे, जहां पर नानू की पत्नी छम्मो, आजम इलाही, राहत इलाही, नौशाद, नासिर अली, खुर्शीद मौजूद थे, जिन्होंने रंजिश के चलते धारदार हथियारों से अतीक की हत्या कर दी थी। पुलिस की जांच में दस आरोपियों के नाम सामने आए थे। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अमित त्यागी ने बताया कि मंगलवार की शाम सात बजे साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या नौ कल्पना पांडेय ने रियाज, मशकूर, नासिर अली, आजम इलाही, राहत इलाही, नौशाद व खुर्शीद निवासी संसारपुर को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपियों पर 26 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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पुलिस रही सक्रिय, कड़ी सुरक्षा में गए जेल
दोनों पक्षों को लोगों को पहले से ही जानकारी थी कि मंगलवार को कोर्ट द्वारा फैसला सुनाया जाएगा। इसी वजह से शाम से ही दोनों पक्षों के लोग कोर्ट के बाहर एकत्र होने शुरू हो गए। भीड़ होने का पता लगते ही कोतवाली सदर बाजार पुलिस मौके पर गई। वहीं, सूत्रों का कहना है कि आरोपियों के परिजनों ने कोर्ट परिसर में हंगामा भी किया।
एसपी सिटी राजेश कुमार का कहना है कि हंगामे की जानकारी उनके पास नहीं है। एहतियात के तौर पर पुलिस फोर्स तैनात किया गया था। पुलिस लाइन से अतिरिक्त फोर्स बुलवाया गया था। पुलिस ने कोर्ट के मुख्य द्वार पर एकत्र हो रहे लोगों को वहां से हटाया। इसके बाद रात आठ बजे पुलिस कड़ी सुरक्षा में आरोपियों को जिला कारागार छोड़कर आई है।
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25 साल बाद आया फैसला
अजीम खान ने मई 1995 में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में 25 साल बाद मंगलवार को फैसला आया है। एसएसपी डॉ. एस चनप्पा ने बताया कि पुलिस की ओर से भी कड़ी पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपियों को सजा हुई है।