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अंदर हत्या का खुलासा, बाहर हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 20 Jun 2016 12:12 AM IST
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When the commotion Monu's family
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में कागजी क्राइम कंट्रोल में माहिर सदर पुलिस के मोनू हत्याकांड के खुलासे पर रविवार को परिजनों ने एसपी सिटी कार्यालय पर पहुंचकर जबरदस्त हंगामा किया।
पुलिस के खिलाफ परिजनों का आक्रोश इस कदर था कि खुलासे की प्रेसवार्ता के दौरान ही परिजन वहां पहुंचकर विरोध करने लगे। उन्हें शांत कराने की कोशिश में जुटे इंस्पेक्टर सदर बाजार से परिजनों ने तीखी नोकझोंक की और अफसरों के सामने ही गंभीर आरोप लगाए।
परिजनों के विरोध और हंगामे के बाद बैकफुट पर आए एसपी सिटी ने बाहर निकलने की जहमत नहीं उठाई। एसपी सिटी कार्यालय के बाहर कोतवाली प्रभारी के साथ करीब आधा घंटे तक बहस होती रही।
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बाद में परिवार के लोग एसएसपी से इस पूरे प्रकरण की शिकायत की चेतावनी देकर वहां से लौटे। बुधवार 15 जून की रात करीब नौ बजे रेलवे कॉलोनी में मोनू पुत्र राजबीर निवासी नवीननगर का खून से लथपथ शव मिला था।
परिजनों ने पुलिस को बताया था कि मोनू भवनों पर पेंट करने का काम करता था। उसका अपने ठेकेदार हसनपुर निवासी देशराज के साथ विवाद हो गया था। उन्होंने देशराज पर हत्या करने का शक जताते हुए उसके खिलाफ तहरीर दी थी।
रविवार दोपहर पुलिस ने खुलासा किया कि पुलिस रविवार को गश्त कर रही थी। इसी दौरान रजवाहे की पटरी के निकट टेलीफोन एक्सचेंज के पास से दो युवकों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम पांडेय और दीपक उर्फ रामजाने बताए।
बकौल कोतवाली प्रभारी पूछताछ में उन्होंने मोनू की हत्या करना स्वीकार किया। उन्होंने पुलिस को बताया कि करीब एक महीने पहले उनका मोनू के साथ विवाद हो गया था। तभी से उनकी रंजिश चल रही थी।
इसी के चलते उन्होंने 15 जून की रात मोनू के सिर में पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर पत्थर बरामद करने का भी दावा किया है।
खुलासे को लेकर एसपी सिटी संजय सिंह अपने कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर रहे थे। इसी दौरान मृतक मोनू के करीब एक दर्जन परिजन एसपी सिटी कार्यालय पहुंचे और खुुुुलासे पर सवाल खड़े करते हुए हंगामा कर दिया।
कोतवाली प्रभारी ने उन्हें संभालने का प्रयास किया, लेकिन परिजन अपनी बात पर अडिग थे। उनका कहना था कि गिरफ्तार किए गए युवकों को वह नहीं जानते। उन्होंने इन युवकों को कभी मोनू के साथ भी नहीं देखा।
उन्होंने रेलवे कॉलोनी में रहने वाले एक युवक पर हत्या करने का आरोप लगाया। करीब आधा घंटे के हंगामे के बाद वह उच्चाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की बात कहते हुए वहां से चले गए।
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पुलिस के खिलाफ परिजनों का आक्रोश इस कदर था कि खुलासे की प्रेसवार्ता के दौरान ही परिजन वहां पहुंचकर विरोध करने लगे। उन्हें शांत कराने की कोशिश में जुटे इंस्पेक्टर सदर बाजार से परिजनों ने तीखी नोकझोंक की और अफसरों के सामने ही गंभीर आरोप लगाए।
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परिजनों के विरोध और हंगामे के बाद बैकफुट पर आए एसपी सिटी ने बाहर निकलने की जहमत नहीं उठाई। एसपी सिटी कार्यालय के बाहर कोतवाली प्रभारी के साथ करीब आधा घंटे तक बहस होती रही।
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बाद में परिवार के लोग एसएसपी से इस पूरे प्रकरण की शिकायत की चेतावनी देकर वहां से लौटे। बुधवार 15 जून की रात करीब नौ बजे रेलवे कॉलोनी में मोनू पुत्र राजबीर निवासी नवीननगर का खून से लथपथ शव मिला था।
परिजनों ने पुलिस को बताया था कि मोनू भवनों पर पेंट करने का काम करता था। उसका अपने ठेकेदार हसनपुर निवासी देशराज के साथ विवाद हो गया था। उन्होंने देशराज पर हत्या करने का शक जताते हुए उसके खिलाफ तहरीर दी थी।
रविवार दोपहर पुलिस ने खुलासा किया कि पुलिस रविवार को गश्त कर रही थी। इसी दौरान रजवाहे की पटरी के निकट टेलीफोन एक्सचेंज के पास से दो युवकों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम पांडेय और दीपक उर्फ रामजाने बताए।
बकौल कोतवाली प्रभारी पूछताछ में उन्होंने मोनू की हत्या करना स्वीकार किया। उन्होंने पुलिस को बताया कि करीब एक महीने पहले उनका मोनू के साथ विवाद हो गया था। तभी से उनकी रंजिश चल रही थी।
इसी के चलते उन्होंने 15 जून की रात मोनू के सिर में पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर पत्थर बरामद करने का भी दावा किया है।
खुलासे को लेकर एसपी सिटी संजय सिंह अपने कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर रहे थे। इसी दौरान मृतक मोनू के करीब एक दर्जन परिजन एसपी सिटी कार्यालय पहुंचे और खुुुुलासे पर सवाल खड़े करते हुए हंगामा कर दिया।
कोतवाली प्रभारी ने उन्हें संभालने का प्रयास किया, लेकिन परिजन अपनी बात पर अडिग थे। उनका कहना था कि गिरफ्तार किए गए युवकों को वह नहीं जानते। उन्होंने इन युवकों को कभी मोनू के साथ भी नहीं देखा।
उन्होंने रेलवे कॉलोनी में रहने वाले एक युवक पर हत्या करने का आरोप लगाया। करीब आधा घंटे के हंगामे के बाद वह उच्चाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की बात कहते हुए वहां से चले गए।