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फर्जी दाखिला कर छात्रवृत्ति हड़पी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:23 AM IST
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एसएसपी से मिलने परिजनों संग पहुंची पीडि़त छात्रा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के निजी कॉलेजों का छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति हड़पने का एक और मामला सामने आया है। एक छात्रा को बताए बिना ही उनके दाखिले कर लिया, बैंक खाले भी खुलवा लिया और छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति भी हजम कर ली।
इसका पता छात्रा को ऑनलाइन स्कॉलरशिप के फॉर्म भरने पर पता चला। कॉलेज की शिकायत लेकर एसएसपी से मिलने परिजनों संग पहुंची छात्रा अंजील ने बताया कि वह कोतवाली सदर बाजार क्षेत्र के गांव हसनपुर की रहने वाली है।
उसने वर्ष 2015 में हाईस्कूल पास किया। इस वर्ष उसने 12वीं में दाखिला लिया है। बताया कि वह त्रिवेणी जन सेवा केंद्र पर छात्रवृत्ति का फॉर्म ऑनलाइन भरने के लिए पहुंची थी। फॉर्म भरने समय उसे नेट से पता चला है कि उसका दाखिला वर्ष 2015 से एक पालीटेक्निक में चला आ रहा है,
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जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 011450211600972 है। इतना ही नहीं, कॉलेज ने पिछले वर्ष उसके नाम की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति भी प्राप्त की है। इसके अलावा उसकका एक बैंक में फर्जी खाता भी पाया गया है, जिसके माध्यम से कॉलेज ने शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति की रकम हासिल की।
अब सवाल यह है कि आखिर अंजील के नाम से कैसे बैंक खाता खुल गया और कैसे कॉलेज में दाखिला हुआ। गौरतलब है कि जनपद में दो दर्जन से अधिक ऐसे निजी कॉलेज सामने आए थे, जिन्होंने छात्रों के शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति का करोड़ों रुपया अंदर किया।
मामले में दो अधिकारी भी निलंबित हो चुके हैं। अब यह नया और अजीब मामला सामने आया है, जिसकी जांच में ऐसे ही अन्य कॉलेजों की भी पोल खुल सकती हैं।
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इसका पता छात्रा को ऑनलाइन स्कॉलरशिप के फॉर्म भरने पर पता चला। कॉलेज की शिकायत लेकर एसएसपी से मिलने परिजनों संग पहुंची छात्रा अंजील ने बताया कि वह कोतवाली सदर बाजार क्षेत्र के गांव हसनपुर की रहने वाली है।
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उसने वर्ष 2015 में हाईस्कूल पास किया। इस वर्ष उसने 12वीं में दाखिला लिया है। बताया कि वह त्रिवेणी जन सेवा केंद्र पर छात्रवृत्ति का फॉर्म ऑनलाइन भरने के लिए पहुंची थी। फॉर्म भरने समय उसे नेट से पता चला है कि उसका दाखिला वर्ष 2015 से एक पालीटेक्निक में चला आ रहा है,
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जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 011450211600972 है। इतना ही नहीं, कॉलेज ने पिछले वर्ष उसके नाम की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति भी प्राप्त की है। इसके अलावा उसकका एक बैंक में फर्जी खाता भी पाया गया है, जिसके माध्यम से कॉलेज ने शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति की रकम हासिल की।
अब सवाल यह है कि आखिर अंजील के नाम से कैसे बैंक खाता खुल गया और कैसे कॉलेज में दाखिला हुआ। गौरतलब है कि जनपद में दो दर्जन से अधिक ऐसे निजी कॉलेज सामने आए थे, जिन्होंने छात्रों के शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति का करोड़ों रुपया अंदर किया।
मामले में दो अधिकारी भी निलंबित हो चुके हैं। अब यह नया और अजीब मामला सामने आया है, जिसकी जांच में ऐसे ही अन्य कॉलेजों की भी पोल खुल सकती हैं।