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चार लाख लेकर हमलावर की सिफारिश करने पहुंचे नेताजी
Updated Fri, 24 Nov 2017 12:34 AM IST
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सहारनपुर। पांच लाख रुपये मांगे और चार लाख रुपये एडवांस में ले लिए। उसके बाद नेताजी पुलिस पर हमले के आरोपियों की सिफारिश करने अधिकारी के पास ही पहुंच गए। अधिकारी ने नेताजी की नहीं सुनी और आरोपी हमलावर के घर कुर्की का नोटिस चस्पा करा दिया तो आरोपियों ने नेताजी के घर हंगामा कर डाला। अपनी फजीहत होते देख नेताजी को रुपये वापस करने पड़ गए।
एसएसपी ने हमले के आरोपी के परिजनों से सख्ती से पूछताछ की तो मामले का खुलासा हो गया। जुलाई में ग्राम खिड़का भटकव्वा में मारपीट की सूचना पर बेहट के तत्कालीन थाना प्रभारी जितेंद्र कालरा पुलिस टीम के साथ गांव में पहुंच गए, लेकिन गांव में लोगों ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए। पुलिस ने इस मामले में गांव के कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। जिनमें गांव का ही दिलशाद उर्फ जिम्मू भी नामजद था।
जिम्मू की नामजदगी होने के बाद उसके परिजन मामले से उसका नाम हटवाने के लिए पास के ही गांव के एक नेताजी के पास पहुंच गए। एसएसपी बबलू कुमार को आरोपियों के परिजनों ने बताया कि नेताजी ने जिम्मू का नाम निकलवाने का ठेका 5 लाख रुपये में तय कर लिया और पांच में से चार लाख रुपये पहले ही ले लिए। उसके बाद नेताजी पहुंचे पुलिस अधिकारियों के पास। नेताजी ने पहले अपना रुतबा दिखाया और फिर पार्टी के नाम का सहारा लिया। कई दिन तक नेताजी अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। दूसरे बड़े नेताओं से भी सिफारिश कराते रहे, लेकिन पुलिस अधिकारी जांच करते रहे और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। जहां से आरोपी के घर 82 का नोटिस चस्पा कर दिया गया। नोटिस लगते ही आरोपी के परिजनों ने नेताजी के घर पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया। अपनी फजीहत होते और मामला खुलते देख नेताजी ने चुपचाप उनके पैसे वापस कर दिए। इस मामले में एसएसपी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और आरोपी के परिजनों से मामले की तहरीर ली है।
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एसएसपी ने हमले के आरोपी के परिजनों से सख्ती से पूछताछ की तो मामले का खुलासा हो गया। जुलाई में ग्राम खिड़का भटकव्वा में मारपीट की सूचना पर बेहट के तत्कालीन थाना प्रभारी जितेंद्र कालरा पुलिस टीम के साथ गांव में पहुंच गए, लेकिन गांव में लोगों ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए। पुलिस ने इस मामले में गांव के कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। जिनमें गांव का ही दिलशाद उर्फ जिम्मू भी नामजद था।
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जिम्मू की नामजदगी होने के बाद उसके परिजन मामले से उसका नाम हटवाने के लिए पास के ही गांव के एक नेताजी के पास पहुंच गए। एसएसपी बबलू कुमार को आरोपियों के परिजनों ने बताया कि नेताजी ने जिम्मू का नाम निकलवाने का ठेका 5 लाख रुपये में तय कर लिया और पांच में से चार लाख रुपये पहले ही ले लिए। उसके बाद नेताजी पहुंचे पुलिस अधिकारियों के पास। नेताजी ने पहले अपना रुतबा दिखाया और फिर पार्टी के नाम का सहारा लिया। कई दिन तक नेताजी अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। दूसरे बड़े नेताओं से भी सिफारिश कराते रहे, लेकिन पुलिस अधिकारी जांच करते रहे और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। जहां से आरोपी के घर 82 का नोटिस चस्पा कर दिया गया। नोटिस लगते ही आरोपी के परिजनों ने नेताजी के घर पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया। अपनी फजीहत होते और मामला खुलते देख नेताजी ने चुपचाप उनके पैसे वापस कर दिए। इस मामले में एसएसपी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और आरोपी के परिजनों से मामले की तहरीर ली है।
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