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कोरोना ने बदली स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति सोच

Tue, 23 Mar 2021 11:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Mar 2021 11:55 PM IST
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Corona changed thinking about hygiene and health
कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद विशेष सावधानी बरत रहे लोग
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सहारनपुर। कोरोना संक्रमण को दस्तक दिए एक वर्ष बीत चुका है। इस संक्रमण को रोकने के लिए लगे पूर्ण लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों ने लोगों की सोच को बदला है। लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति खासकर साफ-सफाई को लेकर अधिक सजग हुए हैं। साथ ही जो लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आए थे। ऐसे लोग सामान्य लोगों की तुलना में बचाव के लिए अधिक सावधानी बरत रहे हैं। कोरोना से बचाव के लिए सावधानी बरतने वाले ऐसे ही लोगों से बात की गई। पेश है रिपोर्ट...
कोरोना ने बदल दी सोच
एसबीडी जिला अस्पताल के वरिष्ठ लिपिक देव कुमार को कोरोना हुआ था, जिसके बाद उन्हें होम आइसोलेट कर दिया गया था। देवकुमार बताते हैं कि कोरोना ने उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जगाया है। वह घर के बाहर हमेशा मास्क लगाकर रहते हैं। साथ ही सैनिटाइजर की छोटी शीशी जेब में तथा कार्यालय की मेज पर सैनिटाइजर की बोतल रहती है। साथ ही वह भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों जैसे मॉल, शादी समारोह और बाजारों में जाने से भी बच रहे हैं।
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एक बार लगा कि नहीं बचूंगा
शशी सैनी की कोरोना संक्रमण ने हालत खराब कर दी थी। उनका कहना है कि संक्रमण ठीक होने के बाद जिंदगी की महत्ता और बढ़ गई है। ऐसे में वह अब कोरोना से बचाव की सभी शर्तों का पालन करते हैं और परिजनों से भी कराते हैं।
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जीवन का हिस्सा बन गया मास्क
सईद सिद्दीकी का कहना है कि उन्हें कोरोना नहीं हुआ, मगर कोरोनो के चलते लोगों की मौतों ने उन्हें सचेत किया है। यही वजह है कि बीते करीब 11 माह से वह बिना मास्क लगाए घर से नहीं निकलते हैं। बाहर मिलने वाले लोगों से हाथ मिलाने की बजाय हाथ जोड़कर या हाथ उठाकर अभिवादन करना पसंद करते हैं। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की कोशिश भी रहती है। सैनिटाइजर उनके घर का सदस्य बन गया है।

चिकित्सक की बात
कोरोना के चलते समाज में मची उथल-पुथल तथा साफ-सफाई के लिए दिए गए विशेष निर्देशों से एक ओर जहां लोग सजग हुए हैं, वहीं कुछ लोगों के दिमाग पर इसका बुुरा असर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिनमें गंदगी को लेकर भय तथा सफाई के प्रति जरूरत से अधिक सतर्कता पैदा हुई है। ऐसे कई लोग फोबिया और डिप्रेशन का शिकार हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है और सुधार है।
डॉ. अमरजीत पोपली, मनोचिकित्सक।
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