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12 वर्षों से कर रहे अमर उजाला का संकलन
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 12 Dec 2015 12:01 AM IST
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निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचारों से अपनी अलग पहचान बना चुके अमर उजाला के पाठक भी अनूठे हैं। 29 वें स्थापना दिवस पर ऐसे पाठकों की लंबी फेहरिश्त है। नंदपुरी कालोनी निवासी एक पाठक ऐसे भी हैं, जिनके लिए अमर उजाला की हर प्रति विशेष महत्व रखती है। यही कारण है कि पिछले 12 वर्षों से लगातार अमर उजाला की प्रति को सहेज कर रख रहे हैं।
नंदपुरी निवासी दीपक गुप्ता की परचून की दुकान है। एक जनवरी 2004 से अब तक की अमर उजाला की प्रत्येक प्रति उन्होंने सहेज कर रखी है। उनका कहना है कि उनके लिए यह समाचार पत्र ही नहीं, बल्कि उनके जीवन का अहम हिस्सा है। उन्होंने बताया कि मूल रुप से नानौता के मोरा गांव के रहने वाले हैं और वर्ष 1990 से अमर उजाला के पाठक बने।
इसके बाद अमर उजाला की खबरों की विश्वसनीयता और निष्पक्ष समाचारों के चलते इससे जुड़ाव भी हो गया। वर्ष 1998 में सहारनपुर आए और यहां भी अमर उजाला उनके जीवन का हिस्सा रहा। दीपक बताते हैं कि वर्ष 2003 में किसी काम से कोई व्यक्ति 15 दिन पुराना अमर उजाला तलाशता हुआ उनके पास पहुंचा।
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वे उसे अमर उजाला नहीं दे पाए। इसके बाद एक जनवरी 2004 से उन्होंने अमर उजाला के प्रत्येक अंक का संकलन शुरू कर दिया। 12 वर्षों के अमर उजाला की प्रतियों को रखने के लिए घर में बॉक्स बेड बनवाया। हालांकि यह बेड पूरी तरह भर गया और आगे इस प्रक्रिया को जारी रखने के लिए एक और दीवान बनवाया है। उनका कहना है कि अमर उजाला की खबरें ही उनका विश्वास हैं।
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नंदपुरी निवासी दीपक गुप्ता की परचून की दुकान है। एक जनवरी 2004 से अब तक की अमर उजाला की प्रत्येक प्रति उन्होंने सहेज कर रखी है। उनका कहना है कि उनके लिए यह समाचार पत्र ही नहीं, बल्कि उनके जीवन का अहम हिस्सा है। उन्होंने बताया कि मूल रुप से नानौता के मोरा गांव के रहने वाले हैं और वर्ष 1990 से अमर उजाला के पाठक बने।
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इसके बाद अमर उजाला की खबरों की विश्वसनीयता और निष्पक्ष समाचारों के चलते इससे जुड़ाव भी हो गया। वर्ष 1998 में सहारनपुर आए और यहां भी अमर उजाला उनके जीवन का हिस्सा रहा। दीपक बताते हैं कि वर्ष 2003 में किसी काम से कोई व्यक्ति 15 दिन पुराना अमर उजाला तलाशता हुआ उनके पास पहुंचा।
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वे उसे अमर उजाला नहीं दे पाए। इसके बाद एक जनवरी 2004 से उन्होंने अमर उजाला के प्रत्येक अंक का संकलन शुरू कर दिया। 12 वर्षों के अमर उजाला की प्रतियों को रखने के लिए घर में बॉक्स बेड बनवाया। हालांकि यह बेड पूरी तरह भर गया और आगे इस प्रक्रिया को जारी रखने के लिए एक और दीवान बनवाया है। उनका कहना है कि अमर उजाला की खबरें ही उनका विश्वास हैं।