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समिति बनी, पत्र जारी हुए पर नहीं हुआ चिह्नीकरण

Fri, 04 Dec 2020 11:32 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Dec 2020 11:32 PM IST
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Committee formed, letters issued but not marked
सहारनपुर। अर्बन सीलिंग की कई लाख वर्ग मीटर भूमि का चिह्नीकरण तक नहीं हो पा रहा है। महज पत्राचार में ही प्रक्रिया उलझी हुई है। कभी राजस्व विभाग की तरफ से विकास प्राधिकरण को पत्र भेजा जाता है तो कभी प्राधिकरण की तरफ से। ऐसी दशा में अर्बन सीलिंग की कीमती जमीन का चिह्नीकरण, सत्यापन और कब्जा लेने की प्रक्रिया लटक रही है।
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दरअसल, 31 राजस्व ग्रामों में आने वाली अर्बन सीलिंग की अतिरिक्त घोषित 21.96 लाख वर्ग मीटर भूमि वर्ष 2002-03 में प्राधिकरण को हस्तांतरित की गई थी। यह भूमि इन सभी गांवों में अलग अलग जगहों पर है। उस भूमि में से करीब 9.55 लाख वर्ग मीटर का चि ह्नीकरण कर सत्यापन कर अतिक्रमण हटवाया जाना है।
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हाल ही में उपजिलाधिकारी सदर की तरफ से सहारनपुर विकास प्राधिकरण को पत्र भेजा गया, जिसमें अविवादित 347 मामलों में अर्बन सीलिंग की भूूमि का चिह्नीकरण कर सत्यापन कर अतिक्रमण हटाने को कहा गया। उस पर प्राधिकरण की तरफ से भी गत दो दिसंबर को पत्र भेज दिया गया। उसमें कहा गया कि भूमि पर प्राधिकरण को कब्जा नहीं दिलाया गया था, बल्कि भूमि का स्वामित्व राजस्व विभाग का ही है, जो सिर्फ रख रखाव के लिए हस्तांतरित की गई थी। ऐसी दशा में प्राधिकरण की मंशा उक्त भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की नहीं लग रही है।
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एक साल पूर्व भी गठित हुई समिति
अर्बन सीलिंग की भूमि के चिह्नीकरण और सत्यापन के लिए जनवरी 2019 में भी प्राधिकरण के अवर अभियंता, राजस्व विभाग के कानूनगो, नगर निगम के कर निरीक्षकों की समिति गठित हुई थी। इस टीम की जिम्मेदारी थी कि अर्बन सीलिंग की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराए।

अर्बन सीलिंग की जमीन के चिह्नीकरण, सत्यापन और अतिक्रमण हटवाने के लिए समिति का गठन कर दिया गया है। प्रत्येक शनिवार को संयुक्त टीम इस कार्रवाई को करेगी। अर्बन सीलिंग की जितनी जमीन यहां उपलब्ध है, उसका प्रयोग कई सरकारी दफ्तरों के लिए भी किया जा सकेगा। - अनिल कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी सदर
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