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कोरोना काल में कायरता दिखा रहा चीन
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जिला सैनिक बोर्ड कार्यालय परिसर में स्थापित शहीद स्मारक स्थल
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर/सरसावा। भारत चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की झड़प में भारतीय जवानों के शहीद होने की सूचनाओं से पूर्व सैन्य अधिकारियों और जवानों के साथ ही आम लोगों में गहरा रोष है। उनका कहना है की कोरोना काल में चीन की यह कायराना हरकत है। भारतीय सेना इसका कड़ा जवाब देने में सक्षम है। इस मुद्दे पर अमर उजाला टीम ने पूर्व सैन्य अफसरों और जवानों से बातचीत की तो उनके ये जज्बात सामने आए। पूर्व सैनिक ने कहा कि वे सेना से केवल सेवानिवृत्त हुए हैं देशभक्ति का जज्बा अभी भी उनके दिलों में जिंदा है यदि भारतीय सेना को उनकी जरूरत पड़ती है तो वह तत्काल देश सेवा के लिए हाजिर हैं।
- न्यू आवास विकास निवासी पूर्व सैन्य अफसर कर्नल मधुर गोयल कश्मीर के अलावा लद्दाख के पास के क्षेत्रों में सेवाएं दे चुके हैं। वह कहते हैं की जिस समय पूरी दुनिया कोरोना के कहर से जूझ रही है। ऐसे समय में चीन गुंडागर्दी पर उतर आया है, लेकिन हमारी सेना भी जमकर जवाब देगी।
- भारतीय वायुसेना से विंग कमांडर पद से रिटायर हुए पायलट संजीव वर्मा ने कहा कि उन्होंने करीब 8 साल तक कारगिल क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में उड़ानें भरी हैं। उन्होंने कहा कि उनके अंदर आज भी वही जज्बा कायम है भले ही वे सेना से सेवानिवृत्त हो गए हों यदि भारतीय वायुसेना को उनकी जरूरत पड़ती है तो वह आज भी सेवाएं देने के लिए तत्पर है।
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- भारतीय थल सेना की सिग्नल कोर में तैनात रहे पूर्व फौजी केपी चौहान ने कहा कि चीन का व्यवहार बेहद गैर जिम्मेदाराना है, लेकिन चीन को समझना चाहिए कि भारतीय सेना 1962 वाली सेना नहीं है, अब समय बदल चुका है भारत के सेना के सभी अंग मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं, केपी चौहान ने भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आज भी सेना में जाने के लिए तैयार हैं।
- भारतीय थल सेना के एयर डिफेंस में अपनी सेवाएं दे चुके तथा भारतीय शांति सेना का हिस्सा रहे नायक अनिल राणा ने कहा कि चीन की हरकतें उकसाने वाली हैं, लेकिन चीन की सेना को भलीभांति पता है कि अब भारतीय फौज हर तरह का युद्ध करने तथा जवाब देने में सक्षम है, अनिल राणा ने कहा कि सेवानिवृत्त होने के बावजूद भी आज भी पूरी तरह से अपने आप को फौजी ही मानते हैं
- भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में हवलदार के रूप में सेवाएं दे चुके संग्राम सिंह राणा ने बताया कि वे सिक्किम के नाथुला दर्रे पर 2011 में तैनात रह चुके हैं, उस समय भी चीन के सैनिक इसी प्रकार का व्यवहार करते थे तथा उन्हें निर्देश होते थे कि संयम में रहकर चीन की सेना को पीछे हटाएं और वे इसमें कामयाब भी होते थे। संग्राम सिंह ने कहा कि चीनी सेना जानती है कि भारतीय सैनिकों का रवैया बदल चुका है तथा वे किसी भी स्थिति में दबाव में आने वाले नहीं है।
- भारतीय सेना के एयर डिफेंस सिस्टम में काम कर चुके पूर्व हवलदार मनोज सिंह राणा ने बताया कि उनका अधिकतर समय पाकिस्तान बॉर्डर पर तंगधार को कुपवाड़ा राजौरी में गुजरा है, वह उकसाने वाली कार्रवाई को बेहतर तरीके से जानते हैं। आज भारत की सेना विश्व की किसी भी सेना से कमतर नहीं है। मनोज राणा ने प्रतिबद्धता जताई कि वे आज भी सेना में अपनी सेवाएं देने के लिए तत्पर हैं।
- भारतीय सेना की सिग्नल कोर में सूबेदार मेजर से सेवानिवृत्त हुए तथा अपनी वीरता के बल पर सेना मेडल से नवाजे गए थे। ओमपाल सिंह ने बताया कि उनका बेटा भी सेना में कैप्टन के रूप में अपनी सेवाएं जम्मू कश्मीर के क्षेत्र में दे रहा है। ओमपाल सिंह ने कहा की जरूरत पड़ने पर वे अब भी सेना के साथ जंग में उतरने को तैयार हैं।
स्मारक है जवानों की शहादत का गवाह
सहारनपुर। जिला सैनिक एवं पुनर्वास कल्याण बोर्ड में स्थापित स्मारक भारत चीन से लेकर पाक के साथ युद्धों में शहीद जिले के जवानों का जज्बा साबित करता है। इस स्मारक पर 1962 के युद्ध के समय शहीद हुए सूबेदार पिरथी सिंह, नायक सुखबीर सिंह, सिपाही दयाचंद, शम्भू सिंह, दयाराम और सिपाही शीतल सिंह के नाम अंकित हैं। इनकी शहादत आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा दे रही है।
यहां है शहीदों को समर्पित गैलरी
सहारनपुर। शहर के नालंदा वर्ल्ड स्कूल में शहीदों के जीवन से युवाओं को अवगत कराने के लिए यहां एक गैलरी तैयार की गई है। स्कूल के डायरेक्टर डैनी सक्सेना ने कहा की इसमें अलग अलग युद्धों के शहीदों के अलावा महापुरुषों के चित्रों को पारदर्शित किया गया है। उन्होंने भी चीन की हरकत को शर्मनाक बताया।
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- न्यू आवास विकास निवासी पूर्व सैन्य अफसर कर्नल मधुर गोयल कश्मीर के अलावा लद्दाख के पास के क्षेत्रों में सेवाएं दे चुके हैं। वह कहते हैं की जिस समय पूरी दुनिया कोरोना के कहर से जूझ रही है। ऐसे समय में चीन गुंडागर्दी पर उतर आया है, लेकिन हमारी सेना भी जमकर जवाब देगी।
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- भारतीय वायुसेना से विंग कमांडर पद से रिटायर हुए पायलट संजीव वर्मा ने कहा कि उन्होंने करीब 8 साल तक कारगिल क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में उड़ानें भरी हैं। उन्होंने कहा कि उनके अंदर आज भी वही जज्बा कायम है भले ही वे सेना से सेवानिवृत्त हो गए हों यदि भारतीय वायुसेना को उनकी जरूरत पड़ती है तो वह आज भी सेवाएं देने के लिए तत्पर है।
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- भारतीय थल सेना की सिग्नल कोर में तैनात रहे पूर्व फौजी केपी चौहान ने कहा कि चीन का व्यवहार बेहद गैर जिम्मेदाराना है, लेकिन चीन को समझना चाहिए कि भारतीय सेना 1962 वाली सेना नहीं है, अब समय बदल चुका है भारत के सेना के सभी अंग मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं, केपी चौहान ने भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आज भी सेना में जाने के लिए तैयार हैं।
- भारतीय थल सेना के एयर डिफेंस में अपनी सेवाएं दे चुके तथा भारतीय शांति सेना का हिस्सा रहे नायक अनिल राणा ने कहा कि चीन की हरकतें उकसाने वाली हैं, लेकिन चीन की सेना को भलीभांति पता है कि अब भारतीय फौज हर तरह का युद्ध करने तथा जवाब देने में सक्षम है, अनिल राणा ने कहा कि सेवानिवृत्त होने के बावजूद भी आज भी पूरी तरह से अपने आप को फौजी ही मानते हैं
- भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में हवलदार के रूप में सेवाएं दे चुके संग्राम सिंह राणा ने बताया कि वे सिक्किम के नाथुला दर्रे पर 2011 में तैनात रह चुके हैं, उस समय भी चीन के सैनिक इसी प्रकार का व्यवहार करते थे तथा उन्हें निर्देश होते थे कि संयम में रहकर चीन की सेना को पीछे हटाएं और वे इसमें कामयाब भी होते थे। संग्राम सिंह ने कहा कि चीनी सेना जानती है कि भारतीय सैनिकों का रवैया बदल चुका है तथा वे किसी भी स्थिति में दबाव में आने वाले नहीं है।
- भारतीय सेना के एयर डिफेंस सिस्टम में काम कर चुके पूर्व हवलदार मनोज सिंह राणा ने बताया कि उनका अधिकतर समय पाकिस्तान बॉर्डर पर तंगधार को कुपवाड़ा राजौरी में गुजरा है, वह उकसाने वाली कार्रवाई को बेहतर तरीके से जानते हैं। आज भारत की सेना विश्व की किसी भी सेना से कमतर नहीं है। मनोज राणा ने प्रतिबद्धता जताई कि वे आज भी सेना में अपनी सेवाएं देने के लिए तत्पर हैं।
- भारतीय सेना की सिग्नल कोर में सूबेदार मेजर से सेवानिवृत्त हुए तथा अपनी वीरता के बल पर सेना मेडल से नवाजे गए थे। ओमपाल सिंह ने बताया कि उनका बेटा भी सेना में कैप्टन के रूप में अपनी सेवाएं जम्मू कश्मीर के क्षेत्र में दे रहा है। ओमपाल सिंह ने कहा की जरूरत पड़ने पर वे अब भी सेना के साथ जंग में उतरने को तैयार हैं।
स्मारक है जवानों की शहादत का गवाह
सहारनपुर। जिला सैनिक एवं पुनर्वास कल्याण बोर्ड में स्थापित स्मारक भारत चीन से लेकर पाक के साथ युद्धों में शहीद जिले के जवानों का जज्बा साबित करता है। इस स्मारक पर 1962 के युद्ध के समय शहीद हुए सूबेदार पिरथी सिंह, नायक सुखबीर सिंह, सिपाही दयाचंद, शम्भू सिंह, दयाराम और सिपाही शीतल सिंह के नाम अंकित हैं। इनकी शहादत आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा दे रही है।
यहां है शहीदों को समर्पित गैलरी
सहारनपुर। शहर के नालंदा वर्ल्ड स्कूल में शहीदों के जीवन से युवाओं को अवगत कराने के लिए यहां एक गैलरी तैयार की गई है। स्कूल के डायरेक्टर डैनी सक्सेना ने कहा की इसमें अलग अलग युद्धों के शहीदों के अलावा महापुरुषों के चित्रों को पारदर्शित किया गया है। उन्होंने भी चीन की हरकत को शर्मनाक बताया।

पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल मधुर गोयल- फोटो : SAHARANPUR

सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर ओमपाल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

सेवानिवृत्त फौजी अनिल राणा- फोटो : SAHARANPUR

सेवानिवृत्त फौजी मनोज राणा- फोटो : SAHARANPUR

सेवानिवृत्त फौजी संग्राम सिंह- फोटो : SAHARANPUR

सेवानिवृत्त विंग कमांडर संजीव वर्मा- फोटो : SAHARANPUR

सेवानिवृत्त फौजी के पी चौहान- फोटो : SAHARANPUR