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कंट्रोल यूनिटों में साल भर होगा बटन मशरूम का उत्पादन
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सहारनपुर। जनपद में अब वर्ष भर सफेद बटन मशरूम का उत्पादन होगा। इसके लिए दस कंट्रोल यूनिट स्थापित की जा रही हैं। इसमें मशरूम के लिए अनुकूल तापमान और नमी का वातावरण तैयार किया जा रहा है। इससे न सिर्फ सफेद मशरूम के चाहने वालों को पूरे साल सफेद मशरूम मिलेगी, बल्कि उत्पादकों को भी अच्छा मुनाफा हासिल होगा।
पौष्टिक एवं बढ़िया स्वाद के चलते सफेद बटन मशरूम काफी पसंद की जाती है। जनपद में अभी सफेद बटन मशरूम का उत्पादन सिर्फ सीजनल (अक्तूबर से मार्च) ही होता है, लेकिन अब जिले में दस कंट्रोल यूनिट लगाई जा रही हैं। इनमें मशरूम के लिए अनुकूल तापमान और नमी का वातावरण तैयार किया जाएगा। इनमें पूरे साल सफेद बटन मशरूम का उत्पादन होगा।
ऐसे व्यवस्थित होगा तापमान
मशरूम उत्पादन के लिए 15 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान और 80 प्रतिशत नमी की जरूरत होती है। कंट्रोल यूनिट में चिलर लगाया जा रहा है, जो कमरेनुमा यूनिट को वातानुकूलित करके तापमान और नमी को व्यवस्थित करता है।
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मशरूम उत्पादन की स्थिति
जिले में मशरूम की 150 से अधिक यूनिट है। जनपद में अभी करीब तीन हजार क्विंटल मशरूम का उत्पादन होता है। कंट्रोल यूनिट के शुरू हो जाने से मशरूम का उत्पादन बढ़कर 4000 क्विंटल तक होने की उम्मीद है। यहां से देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला आदि शहरों में मशरूम की सप्लाई की जाती है।
मशरूम उत्पादक किसान
गांव ढूभर किशनपुर निवासी शुभम खटाना ने बताया वे वातानुकूलित कंट्रोल यूनिट लगाकर सफेद बटन मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। सफेद बटन मशरूम की मांग को देखते हुए यूनिट लगाई है। अभी भी 100 रुपये प्रति किलो का भाव प्राप्त हो रहा है।
गांव मदनूकी के किसान सत्यवीर अभी वातानुकूलित कंट्रोल यूनिट लगा रहे हैं। इसमें कुछ कार्य शेष है। अभी वे झोपड़ी में मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। वे 12 टन का वातानुकूलित प्लांट लगा रहे हैं। इसमें उन्हें तीन से साढे़ तीन क्विंटल सफेद बटन मशरूम का उत्पादन प्राप्त हो सकेगा।
तीन प्रजातियों की होती है खेती
अच्छे उत्पादन और बढ़िया भाव के चलते जनपद के किसानों का रुझान मशरूम की खेती की ओर लगातार बढ़ रहा है। जनपद में अधिकांश किसान सफेद बटन, ढिंगरी और मिल्की मशरूम की खेती करते हैं। सफेद बटन मशरूम की खेती अक्तूबर से फरवरी मार्च तक होती है। मिल्की मशरूम की खेती जून माह से सितंबर तक की जाती है। जबकि ढिंगरी मशरूम का उत्पादन मार्च से मई महीने तक होता है।
मशरूम की खेती के फायदे
स्वरोजगार का बढ़िया साधन
कम लागत में अधिक मुनाफा
छोटे और भूमिहीन किसानों के लिए वरदान
झोपड़ियों और कमरों में उत्पादन
- पोषक तत्वों से भरपूर
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पौष्टिक एवं बढ़िया स्वाद के चलते सफेद बटन मशरूम काफी पसंद की जाती है। जनपद में अभी सफेद बटन मशरूम का उत्पादन सिर्फ सीजनल (अक्तूबर से मार्च) ही होता है, लेकिन अब जिले में दस कंट्रोल यूनिट लगाई जा रही हैं। इनमें मशरूम के लिए अनुकूल तापमान और नमी का वातावरण तैयार किया जाएगा। इनमें पूरे साल सफेद बटन मशरूम का उत्पादन होगा।
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ऐसे व्यवस्थित होगा तापमान
मशरूम उत्पादन के लिए 15 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान और 80 प्रतिशत नमी की जरूरत होती है। कंट्रोल यूनिट में चिलर लगाया जा रहा है, जो कमरेनुमा यूनिट को वातानुकूलित करके तापमान और नमी को व्यवस्थित करता है।
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मशरूम उत्पादन की स्थिति
जिले में मशरूम की 150 से अधिक यूनिट है। जनपद में अभी करीब तीन हजार क्विंटल मशरूम का उत्पादन होता है। कंट्रोल यूनिट के शुरू हो जाने से मशरूम का उत्पादन बढ़कर 4000 क्विंटल तक होने की उम्मीद है। यहां से देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला आदि शहरों में मशरूम की सप्लाई की जाती है।
मशरूम उत्पादक किसान
गांव ढूभर किशनपुर निवासी शुभम खटाना ने बताया वे वातानुकूलित कंट्रोल यूनिट लगाकर सफेद बटन मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। सफेद बटन मशरूम की मांग को देखते हुए यूनिट लगाई है। अभी भी 100 रुपये प्रति किलो का भाव प्राप्त हो रहा है।
गांव मदनूकी के किसान सत्यवीर अभी वातानुकूलित कंट्रोल यूनिट लगा रहे हैं। इसमें कुछ कार्य शेष है। अभी वे झोपड़ी में मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। वे 12 टन का वातानुकूलित प्लांट लगा रहे हैं। इसमें उन्हें तीन से साढे़ तीन क्विंटल सफेद बटन मशरूम का उत्पादन प्राप्त हो सकेगा।
तीन प्रजातियों की होती है खेती
अच्छे उत्पादन और बढ़िया भाव के चलते जनपद के किसानों का रुझान मशरूम की खेती की ओर लगातार बढ़ रहा है। जनपद में अधिकांश किसान सफेद बटन, ढिंगरी और मिल्की मशरूम की खेती करते हैं। सफेद बटन मशरूम की खेती अक्तूबर से फरवरी मार्च तक होती है। मिल्की मशरूम की खेती जून माह से सितंबर तक की जाती है। जबकि ढिंगरी मशरूम का उत्पादन मार्च से मई महीने तक होता है।
मशरूम की खेती के फायदे
स्वरोजगार का बढ़िया साधन
कम लागत में अधिक मुनाफा
छोटे और भूमिहीन किसानों के लिए वरदान
झोपड़ियों और कमरों में उत्पादन
- पोषक तत्वों से भरपूर