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प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बोर्ड के पास नहीं कोई योजना
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प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर विशेष
-शहर में कितने उद्योग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास नहीं कोई आंकड़ा
-जल और वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर नहीं होती कोई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जल और वायु प्रदूषण को लेकर एनजीटी जितनी गंभीर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उतना ही लापरवाह। नतीजा जनपद में जल और वायु प्रदूषण कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहा है। एक साल में बोर्ड मात्र चार ही उद्योगों पर कार्रवाई कर सका है। इनमें भी एक उद्योग मालिक के निधन के बाद स्वयं बंद हुआ है, जिसे अपनी कार्रवाई की गिनती में दर्ज कर लिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर एक रिपोर्ट..
मैली हुई हिंडन तो आसपास के गांवों भूजल भी हुआ दूषित
पहाड़ों से स्वच्छ हिंडन नदी 75 किलोमीटर के सफर पर बड़गांव क्षेत्र में पहुंची तो इसका पानी जहरीला हो गया। नदी किनारे बसे गांवों में हैंडपंपों का पानी भी दूषित है और पीला निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है। नतीजा ये कि जिस हिंडन (हरनंदी) को कभी जीवनदायिनी कहा गया, उसका पानी जहरीला हो चुका है।गागलहेड़ी क्षेत्र से नागल तक कई फैक्टरियों से दूषित पानी हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा है। गांवों से निकलने वाला गंदा पानी भी हिंडन में बहाया जाता है, जो इस नदी को प्रदूषित करता है। बड़गांव, महेशपुर, शिमलाना, सहजी, शब्बीरपुर, भगवानपुर, कुतबामाजरा, अंबेहटाचांद, सांवतखेड़ी, दल्हेड़ी, चंदपुर, नन्हेड़ा खुर्द एवं कला चिराऊ, बहेड़ा, सिसौनी, सिसौना जमालपुर, पीपलों, रत्नहेड़ी, खुदाबक्शपुर माजरा , बड़ूली, नयागांव, झबीरन, कातला, लोटनी, जड़ौदा पांडा आदि गांव दूषित जल से प्रभावित हैं। शहर के बीच से होकर गुजर रही पांवधोई और ढमोला नदी भी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी हैं।
वायु प्रदूषण को लेकर हालात
वायु प्रदूषण की बात करें तो शहर भर में अनाधिकृत रूप से बड़ी संख्या में उद्योग धंधे चल रहे हैं। खास बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास शहर में संचालित उद्योगों का कोई आंकड़ा नहीं है। एनजीटी ने शहरी क्षेत्र के पास चल रहे ईंट भट्टों को शहर से बाहर करने के आदेेश दिए हैं, मगर ईंट भट्टों को बाहर करने को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही है। रामगढ़ क्षेत्र में ईंट भट्टों की राख लोगों को बीमार बना रही है। बीते करीब एक माह से शहर का एक्यूआई 250 के आसपास बना हुआ है, जो अच्छी स्थिति नहीं है।
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कचरे का निस्तारण नहीं होता
पूरे जनपद में नगर निगम और नगर पालिकाओं के पास कचरे के प्रबंधन की ठोस व्यवस्था नहीं है। नगर निगम ही की बात करें। कचरा प्रबंधन के लिए नगर निगम ने दो वर्ष पहले बेहट रोड पर भूमि खरीदी थी। मगर आज तक वहां कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सका है। नतीजा यह है कि शहर की बाहरी कॉलोनियों में खुले क्षेत्र में कचरा डाला जा रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में पिछड़ने की मुख्य वजह भी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नही होना ही रहा है। कचरे का निस्तारण नहीं होने की वजह से वायु और मृदा प्रदूषण दोनों फैल रहे हैं।
-जल प्रदूषण को रोकने के लिए शहर में 135 एमएलडी का एसटीपी तैयार हो रहा है। स्मार्ट सिटी योजना में भी एसटीपी बनाए जाने हैं। रही बात प्रदूषण पर नियंत्रण की तो पेपर मिल, शुगर मिल, डिस्टलरी आदि की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। नगर निगम कचरा प्रबंधन के लिए बेहट रोड पर व्यवस्था कर रहा है। इसके अलावा जहां से भी प्रदूषण फैलाने की शिकायत मिलती है हम तुरंत कार्रवाई करते हैं।
डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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-शहर में कितने उद्योग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास नहीं कोई आंकड़ा
-जल और वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर नहीं होती कोई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जल और वायु प्रदूषण को लेकर एनजीटी जितनी गंभीर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उतना ही लापरवाह। नतीजा जनपद में जल और वायु प्रदूषण कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहा है। एक साल में बोर्ड मात्र चार ही उद्योगों पर कार्रवाई कर सका है। इनमें भी एक उद्योग मालिक के निधन के बाद स्वयं बंद हुआ है, जिसे अपनी कार्रवाई की गिनती में दर्ज कर लिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर एक रिपोर्ट..
मैली हुई हिंडन तो आसपास के गांवों भूजल भी हुआ दूषित
पहाड़ों से स्वच्छ हिंडन नदी 75 किलोमीटर के सफर पर बड़गांव क्षेत्र में पहुंची तो इसका पानी जहरीला हो गया। नदी किनारे बसे गांवों में हैंडपंपों का पानी भी दूषित है और पीला निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है। नतीजा ये कि जिस हिंडन (हरनंदी) को कभी जीवनदायिनी कहा गया, उसका पानी जहरीला हो चुका है।गागलहेड़ी क्षेत्र से नागल तक कई फैक्टरियों से दूषित पानी हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा है। गांवों से निकलने वाला गंदा पानी भी हिंडन में बहाया जाता है, जो इस नदी को प्रदूषित करता है। बड़गांव, महेशपुर, शिमलाना, सहजी, शब्बीरपुर, भगवानपुर, कुतबामाजरा, अंबेहटाचांद, सांवतखेड़ी, दल्हेड़ी, चंदपुर, नन्हेड़ा खुर्द एवं कला चिराऊ, बहेड़ा, सिसौनी, सिसौना जमालपुर, पीपलों, रत्नहेड़ी, खुदाबक्शपुर माजरा , बड़ूली, नयागांव, झबीरन, कातला, लोटनी, जड़ौदा पांडा आदि गांव दूषित जल से प्रभावित हैं। शहर के बीच से होकर गुजर रही पांवधोई और ढमोला नदी भी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी हैं।
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वायु प्रदूषण को लेकर हालात
वायु प्रदूषण की बात करें तो शहर भर में अनाधिकृत रूप से बड़ी संख्या में उद्योग धंधे चल रहे हैं। खास बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास शहर में संचालित उद्योगों का कोई आंकड़ा नहीं है। एनजीटी ने शहरी क्षेत्र के पास चल रहे ईंट भट्टों को शहर से बाहर करने के आदेेश दिए हैं, मगर ईंट भट्टों को बाहर करने को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही है। रामगढ़ क्षेत्र में ईंट भट्टों की राख लोगों को बीमार बना रही है। बीते करीब एक माह से शहर का एक्यूआई 250 के आसपास बना हुआ है, जो अच्छी स्थिति नहीं है।
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कचरे का निस्तारण नहीं होता
पूरे जनपद में नगर निगम और नगर पालिकाओं के पास कचरे के प्रबंधन की ठोस व्यवस्था नहीं है। नगर निगम ही की बात करें। कचरा प्रबंधन के लिए नगर निगम ने दो वर्ष पहले बेहट रोड पर भूमि खरीदी थी। मगर आज तक वहां कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सका है। नतीजा यह है कि शहर की बाहरी कॉलोनियों में खुले क्षेत्र में कचरा डाला जा रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में पिछड़ने की मुख्य वजह भी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नही होना ही रहा है। कचरे का निस्तारण नहीं होने की वजह से वायु और मृदा प्रदूषण दोनों फैल रहे हैं।
-जल प्रदूषण को रोकने के लिए शहर में 135 एमएलडी का एसटीपी तैयार हो रहा है। स्मार्ट सिटी योजना में भी एसटीपी बनाए जाने हैं। रही बात प्रदूषण पर नियंत्रण की तो पेपर मिल, शुगर मिल, डिस्टलरी आदि की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। नगर निगम कचरा प्रबंधन के लिए बेहट रोड पर व्यवस्था कर रहा है। इसके अलावा जहां से भी प्रदूषण फैलाने की शिकायत मिलती है हम तुरंत कार्रवाई करते हैं।
डॉ. डीसी पांडेय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।