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पूरा देश चख रहा स्वाद: क्या आप जानते हैं फूलगोभी-लोकाट व पपीते का कहां हुआ जन्म?, 350 साल पहले बोया गया था बीज

Wed, 13 Sep 2023 05:36 PM IST
कपिल kapil विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर
विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Wed, 13 Sep 2023 05:36 PM IST
सार

Amar Ujala Special Report : फूलगोभी-लोकाट और पपीते का स्वाद आज पूरा देश चख रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तीनों चीजों का जन्म कहां पर हुआ था? जानिए 350 साल पहले फूलगोभी का बीच सबसे पहले कहां बोया गया था। 

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Amar Ujala Special Report : Do you know where cauliflower, loquat and papaya were born
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मौजूदा दौर में यूं तो सहारनपुर को काष्ठ हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है, लेकिन इतिहास के पन्नों को देखें तो जिस फूलगोभी, लोकाट और पपीते का स्वाद आज पूरा देश चख रहा है, भारत में उसका जन्म पहली बार सहारनपुर की मिट्टी में हुआ था। चकराता रोड पर कंपनी बाग स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में करीब 350 साल पहले स्पेन से गोभी का बीज लाकर उगाया गया था। 

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औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त निदेशक सुरेश कुमार का कहना है कि उस समय तक भारत में कोई भी गोभी को नहीं जानता था। गोभी के पौधे को यहां की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से तैयार करने के लिए कई वर्षों तक शोध चला। 

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इसके बाद गोभी की अलग-अलग प्रजातियों पर काम किया गया। हालांकि मौजूदा समय में भी कृषि वैज्ञानिक गोभी को लेकर तमाम तरह के शोध करते रहते हैं, लेकिन सहारनपुर की धरती की देन है कि आज देश भर में फूलगोभी की खेती होती है।

ब्रिटिश काल में जापान से लोकाट और मैक्सिको से आया था पपीता
इसी तरह ब्रिटिश काल के दौरान देश में पहली बार लोकाट और पपीते का पौधा तैयार किया गया था। संयुक्त निदेशक ने बताया कि लोकाट जापान और मैक्सिको से पपीते का बीज लाकर औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में इनके पौधे तैयार किए गए हैं। आज शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जो पपीते को न जानता हो। ब्रिटिश काल में चाय पर चीन का एकाधिकार था। 

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इसे तोड़ने के लिए डॉ. गोवन और डॉ. रॉयली ने असम के जंगलों से ऐसे पौधे तलाश कराए थे, जिससे चाय तैयार हो सके। तब जाकर इसी केंद्र में चाय की खेती की तकनीक विकसित की गई थी। इससे संबंधित तमाम दस्तावेज आज भी संरक्षित रखे हैं।

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कुछ ऐसा है इतिहास
125 एकड़ में फैला हुआ है चकराता रोड पर औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के नाम से विख्यात राजकीय उद्यान की स्थापना 17वीं शताब्दी में हुई थी। इसी उद्यान में शाहजहां के शासनकाल में देश में पहली बार फूलगोभी की खेती का प्रयोग हुआ था। इसके बाद यह उद्यान ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में आ गया था।

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