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एक्सक्लूसिव: अब बर्बाद नहीं होगा गोमूत्र, बनेगा फिनायल, ऐसे किया जा रहा तैयार

Fri, 08 Jan 2021 04:34 PM IST
कपिल kapil आनंद प्रकाश, अमर उजाला, सहारनपुर
आनंद प्रकाश, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 08 Jan 2021 04:34 PM IST
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Amar Ujala Exclusive Report: Pilot project for making phenyl from cow urine has been started in Saharanpur
गोबर से डंडे बनाने की मशीन। संवाद - फोटो : अमर उजाला

भारतीय संस्कृति में गाय को माता का स्थान मिला है। गाय का गोबर सनातन धर्म में शुद्ध माना जाता है। गोमूत्र से कई बीमारियों का इलाज होता है। अब नगर निगम ने नवादा रोड स्थित गोशाला में गोमूत्र से अर्क निकालने और फिनायल बनाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। यहां प्रयोग सफल होने के बाद शहर की अन्य गोशालाओं में इसे आत्मनिर्भर गोशाला योजना के तहत शुरू कराया जाएगा। 

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गांव सांवलपुर नवादा के निकट मां शाकंभरी कान्हा उपवन गोशाला है, जो नगर निगम संचालित होता है। यहां 162 गोवंश हैं। चार दिन पहले नगर निगम ने यहां आसवन विधि से गोमूत्र से अर्क निकालने वाली मशीन लगाई। अर्क का प्रयोग फिनायल बनाने में किया जाएगा। साथ ही गोबर से लकड़ी जैसे डंडे भी बनाए जा रहे हैं जो दाह संस्कार में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
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निगम ने सात कर्मचारियों को यहां लगाया हुआ है, एक कर्मचारी की ड्यूटी अर्क बनाने वाली मशीन पर है। शहर में विभिन्न स्थानों पर गोसेवा केंद्र भी बनेंगे, जहां नागरिक अपनी इच्छानुसार गोसेवा के लिए सामान दान दे सकेंगे। विदेशों में प्रचलित काउ कडलिंग (गाय को लाड दुलार करना) थैरेपी को भी निगम लागू करना चाहता है। 
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विशेषज्ञों का कहना है कि 100 लीटर फिनायल बनाने में 85 लीटर पानी, एक लीटर चीड़ का तेल और बाकी मात्रा गोमूत्र अर्क की होगी।

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ऐसे बनाया जा रहा गोमूत्र से अर्क
गोमूत्र को एक बड़े टैंक में इकट्ठा किया गया है। वहां से पाइप के जरिये ड्रम तक पहुंचाया जाएगा। जिसे इलेक्ट्रिकली गर्म कर फिर ड्रम से गोमूत्र को कांच के बड़े फ्लास्क में पहुंचाया जाता है, जो विद्युत संचालित है। इस तक पहुंचने में गोमूत्र को फिल्टर भी किया जाता है। फिर भी एक निश्चित ताप पर उबाला जाता है, जिसके बाद फ्लास्क से उठने वाली वाष्प कांच की नलियों के जरिये कांच के पात्र में अर्क के रूप में बूंद-बूंद इकट्ठा हो जाती है।
 
फिनायल बिक्री का रोडमैप भी तैयार 
पतंजलि को भी फिनायल की बिक्री की जा सकती है। वहीं, योग गुरु स्वामी रामदेव को भी नगर आयुक्त इस प्रोजेक्ट के बारे में बता चुके हैं और स्वामी रामदेव ने सहारनपुर आकर इस प्रोजेक्ट को देखने की बात कही है। 

गोमूत्र और गोबर से करीब 22 तरह के उत्पाद बन सकते हैं। गोमूत्र से अर्क बनाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसे शहर की सभी गोशाला में स्थापित कराया जाएगा। गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह कार्य किया जा रहा है। - ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त, नगर निगम

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