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Saharanpur News: एक सप्ताह बीता, अब तक न नकली नोटों का स्रोत पता चला न ही आरोपी

Mon, 07 Sep 2026 12:37 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2026 12:37 AM IST
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A week has passed, yet neither the source of the counterfeit notes nor the accused has been traced.
जाली नोट प्रकरण
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- 29 अगस्त को पीएनबी की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के जाली नोट मिलने पर हुई थी रिपोर्ट

- जांच में जुटी हुई हैं एनआईए, एसआईटी, आरबीआई, पीएनबी और पुलिस की तीन से अधिक टीमें
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले को एक सप्ताह बीतने के बाद भी जांच एजेंसियों के हाथ कोई सुराग नहीं लगा है। बड़ा सवाल अब भी यही बना हुआ है कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे। अब तक जांच टीमें न तो जाली नोटों के स्रोत का पता लगा पाई और न ही आरोपियों को पकड़ पाईं।
29 अगस्त को पंजाब नेशनल बैंक के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने तीन बैंक प्रबंधक व एक पार्ट टाइम हाउस कीपर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसके बाद से करेंसी चेस्ट में जाली नोट मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। एनआईए ने करेंसी चेस्ट को अपने कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ानी शुरू कर दी है। टीम पुराने रिकॉर्ड, कैश की आवाजाही और करेंसी चेस्ट में नोटों के आने-जाने से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही हैं।
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दूसरी ओर एसआईटी भी बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। आरबीआई और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की पड़ताल भी अलग-अलग बिंदुओं पर जारी है। इनके अलावा पुलिस की टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है, लेकिन कोई भी टीम किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। जांच का सबसे अहम बिंदु जाली नोटों का स्रोत है। इतनी बड़ी रकम सामान्य स्तर पर किसी एक व्यक्ति के जरिये बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा। इसी कारण जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नोट किस चरण में बदले गए और करेंसी चेस्ट तक पहुंचने से पहले किन-किन हाथों से गुजरे। जांच में बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और करेंसी के लेन-देन से जुड़े लोगों की भूमिका भी परखी जा रही है। एसआईटी द्वारा अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।
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--चेस्ट के आसपास घूमते नजर आए आरोपी, चार कर्मचारी गायब
बताया जा रहा है कि कोतवाली सदर बाजार में प्राथमिकी दर्ज होने के दो दिन तक आरोपी करेंसी चेस्ट के आसपास घूमते रहे। उनकी गतिविधियां सीसीटीवी में कैद होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई टीमें होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है। वहीं, पंजाब नेशनल बैंक में काम करने वाले चार कर्मचारी भी गायब हैं, जो आरोपी अमित कुमार और सुशील शर्मा के संपर्क में होने बताए जा रहे हैं। इनके पकड़े जाने से भी पुलिस को काफी कुछ हाथ लग सकता है।

-- 111 करोड़ की खेप भी जांच के रडार पर
मामले में छह जुलाई को हुई 111 करोड़ रुपये की करेंसी आवाजाही भी महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह देख रही हैं कि करेंसी की गिनती, छंटाई, बंडल तैयार करने, पैकिंग, सीलिंग और डिस्पैच के दौरान कौन-कौन कर्मचारी मौजूद थे। इस रकम को आरबीआई जयपुर भेजे जाने की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
-- कड़ियों को जोड़ने में लगी टीमें
फिलहाल एनआईए, एसआईटी, आरबीआई और बैंक स्तर की टीमें अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जाली नोटों के स्रोत तक पहुंचने और यह साबित करने की है कि असली नोटों के बदले नकली नोट किस स्तर पर और किसकी मिलीभगत से रखे गए।


-- वर्जन
एसआईटी और पुलिस की टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर जांच में जुटी है। जाली नोटों का स्रोत खंगाला जा रहा है। पुलिस की टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - व्योम बिंदल, एसपी सिटी
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