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जीवन भर का हुआ रोना, ऐसा दर्द दे गया कोरोना
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हारनपुर में लॉकडाउन के दौरान थानामंडी क्षेत्र में बना हॉटस्पॉट------फाईल फोटो
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोरोना संक्रमण से अपनों को खो चुके लोगों का दर्द अभी तक हल्का नहीं हुआ है। कोरोना ने मौत भी ऐसी दी, जिसमें लोग जाने वाले अपने चहेतों को कंधा तक नहीं दे सके, साथ ही ठीक से अंतिम दर्शन तक का मौका नहीं दिया।
जनपद में कोरोना से अभी तक 135 लोगों की जान गई है। पहली मौत नवीन नगर निवासी 43 वर्षीय युवक की हुई थी, जिसके बाद मौतों का सिलसिला शुरू हो गया था। अच्छी बात यह है कि बीते दो माह से जनपद में कोरोना से कोई जान नहीं गई है, मगर जिन लोगों को कोरोना ने अपना शिकार बनाया। उनके परिजन आज भी अपनी किस्मत को रोते हैं। कोरोना कइयों को अनाथ कर गया तो कई का सुहाग उजड़ गया। मरने वालों में कई लोग ऐेस थे, जो अपने परिवार की आजीविका चलाने वाले थे। पेश है कुछ ऐसे लोगों से बातचीत, जिन्होंने कोरोना के कारण अपनों को खोया।
हर कदम पर महसूस होती है कमी: निशि
समाज सेविका निजी जैन ने कोरोना में अपने पति राजकुमार जैन को खोया। उनके पति को दुनिया से गए नौ माह बीत चुके हैं, मगर दिल में दर्द आज भी ताजा ही है। निशि जैन का कहना है कि कोरोना संक्रमण ने उन्हें जो जख्म दिया है वह कभी नहीं भरेगा। उनके लिए मुश्किल यह भी है कि उनका बेटा अमेरिका और बेटी बैंगलुरु में हैं। ऐसे में घर में अकेलापन भी उन्हें बार-बार पति की कमी महसूस कराता है।
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मेरी असली ताकत थे मेरे पिता : खान
कोरोना ने जिला अस्पताल के कैंटीन संचालक शमीम खान से उनके पिता हाजी राव याकूब खान को छीन लिया। याकूब खान दिल के मरीज थे, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें मिर्जापुर स्थित कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां से उनकी बॉडी को सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया था। शमीम का कहना है कि वह अपने पिता की अर्थी को कंधा तक नहीं दे सके। दुख की बात यह भी है कि कई परिजन अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए।
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जनपद में कोरोना से अभी तक 135 लोगों की जान गई है। पहली मौत नवीन नगर निवासी 43 वर्षीय युवक की हुई थी, जिसके बाद मौतों का सिलसिला शुरू हो गया था। अच्छी बात यह है कि बीते दो माह से जनपद में कोरोना से कोई जान नहीं गई है, मगर जिन लोगों को कोरोना ने अपना शिकार बनाया। उनके परिजन आज भी अपनी किस्मत को रोते हैं। कोरोना कइयों को अनाथ कर गया तो कई का सुहाग उजड़ गया। मरने वालों में कई लोग ऐेस थे, जो अपने परिवार की आजीविका चलाने वाले थे। पेश है कुछ ऐसे लोगों से बातचीत, जिन्होंने कोरोना के कारण अपनों को खोया।
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हर कदम पर महसूस होती है कमी: निशि
समाज सेविका निजी जैन ने कोरोना में अपने पति राजकुमार जैन को खोया। उनके पति को दुनिया से गए नौ माह बीत चुके हैं, मगर दिल में दर्द आज भी ताजा ही है। निशि जैन का कहना है कि कोरोना संक्रमण ने उन्हें जो जख्म दिया है वह कभी नहीं भरेगा। उनके लिए मुश्किल यह भी है कि उनका बेटा अमेरिका और बेटी बैंगलुरु में हैं। ऐसे में घर में अकेलापन भी उन्हें बार-बार पति की कमी महसूस कराता है।
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मेरी असली ताकत थे मेरे पिता : खान
कोरोना ने जिला अस्पताल के कैंटीन संचालक शमीम खान से उनके पिता हाजी राव याकूब खान को छीन लिया। याकूब खान दिल के मरीज थे, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें मिर्जापुर स्थित कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां से उनकी बॉडी को सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया था। शमीम का कहना है कि वह अपने पिता की अर्थी को कंधा तक नहीं दे सके। दुख की बात यह भी है कि कई परिजन अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए।

सहारनपुर में लॉकडाउन के दौरान जनता रोड़ पर बना हॉटस्पॉट------फाईल फोटो- फोटो : SAHARANPUR