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श्रीमद् भागवत कथा में छठे दिन श्रीकृष्ण रुकमणि का हुआ विवाह
Updated Tue, 02 Oct 2018 12:38 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा में छठे दिन श्रीकृष्ण रुकमणि का हुआ विवाह
देवबंद (सहारनपुर)। मंगलौर चौकी स्थित बैंक्वेट हाल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में छठे दिन श्रीकृष्ण-रूकमणि के विवाह का आयोजन किया गया। कथावाचक आचार्य सुभाष चंद पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं, जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है।
कथा व्यास ने भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, ऊधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुकमणि विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। आचार्य ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। कथा में भजन तो सुन मुरली की तान दौड़ आई सांवरिया पर श्रोता भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भागवत प्राप्ति आवश्यक है। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है। आचार्य सुभाष चंद महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। इस दौरान श्रीकृष्ण और रूकमणि के विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान राजकिशोर गुप्ता और सुनील कुमार रहे। प्रसाद वितरण विनोद सिंघल एवं यश सिंघल ने किया। इस मौके पर अजय कुमार गर्ग, विजय सिंघल, फग्वेंद्र गोयल, संतोष अग्रवाल, मनोज बंसल, अरुण गोयल, कमल जैन, नीरज कंसल, मनोज पाल, चौधरी मंजीत आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। मंगलौर चौकी स्थित बैंक्वेट हाल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में छठे दिन श्रीकृष्ण-रूकमणि के विवाह का आयोजन किया गया। कथावाचक आचार्य सुभाष चंद पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं, जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है।
कथा व्यास ने भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, ऊधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुकमणि विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। आचार्य ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। कथा में भजन तो सुन मुरली की तान दौड़ आई सांवरिया पर श्रोता भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भागवत प्राप्ति आवश्यक है। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है। आचार्य सुभाष चंद महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। इस दौरान श्रीकृष्ण और रूकमणि के विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान राजकिशोर गुप्ता और सुनील कुमार रहे। प्रसाद वितरण विनोद सिंघल एवं यश सिंघल ने किया। इस मौके पर अजय कुमार गर्ग, विजय सिंघल, फग्वेंद्र गोयल, संतोष अग्रवाल, मनोज बंसल, अरुण गोयल, कमल जैन, नीरज कंसल, मनोज पाल, चौधरी मंजीत आदि मौजूद रहे।
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