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पुल और तटबंध निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन
Updated Wed, 18 Jul 2018 12:21 AM IST
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बेहट (सहारनपुर)। बरसाती नदियों से घिरे हुसैन मलकपुर एवं शाहपुर गांवों के ग्रामीण मंगलवार को तहसील पहुंचे और पुल एवं तटबंध निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद उन्होंने सीएम के नाम लिखा प्रार्थना पत्र डीएम को सौंपा। डीएम ने ग्रामीणों को तहसील दिवस के बाद गांवों का दौरा करने और समस्या के समाधान का आश्वासन देकर वापस किया।
मंगलवार को जैसे ही हुसैन मलकपुर और शाहपुर के लोगों को खबर लगी कि तहसील दिवस में डीएम आ रहे है, तो दोनों गांवों के लोग इकट्ठा होकर तहसील पहुंच गए और यहां शासन-प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों पदम सिंह, ओमवीर सिंह, राजेश शर्मा, अजय राणा, शिवपाल, इरफान आदि ने डीएम आलोक कुमार पांडेय को अवगत कराया, कि उनके गांवों चौतरफा नदियों से घिरे है। बरसात में नदियों में बाढ़ आने पर उनका बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है और उनके गांवों टापू बन जाते है। इस बार पिछले दिनों आई बाढ़ के तेज बहाव पानी ने ऊपर से की तरफ से गांवों की आबादी में पहुंचकर मुख्य मार्ग पर कटाव कर उसे ध्वस्त कर दिया। अगली बाढ़ आई तो उनके गांवों नहीं बचेंगे। लंबे समय से वें गांव की सुरक्षा के लिए नदी पर ऊपर की तरफ तटबंध एवं पुल निर्माण की मांग करते आ रहे है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई किसी स्तर पर भी नहीं हो पाई। डीएम ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया, कि वह तहसील दिवस के बाद उनके गांवों का दौरा करेंगे और उनकी समस्या के समाधान के लिए शासन को रिपोर्ट प्रेषित करेंगे। इसके बाद ही ग्रामीण वापस लौटे।
।। इंसेट।।
बेहट। तहसील मुख्यालय से मुश्किल से किमी की दूरी पर स्थित हुसैन मलकपुर एवं शाहपुर गांवों की करीब पांच हजार की आबादी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह दोनों गांवों चौतरफा बरसाती नदियों एवं नालों से घिरे हुए है। बरसात के दिनों में इनका बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। यह गांव बाढ़ आने पर किसी टापू से कम नहीं होते। जानमाल के नुकसान को झेलते आ रहे ग्रामीण तटबंध एवं पुल निर्माण की मांग को लेकर लंबा संघर्ष भी कर चुके है। यहां बता दें कि इन गांवों के लोगों ने वर्ष 2012 के विस चुनाव एवं 2014 के लोकसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार रखा था। वर्ष 2013 में प्रशासनिक अधिकारियों ने एक नहीं कई बार इन गांवों का दौरा कर शासन को रिपोर्ट प्रेषित की थी, लेकिन पांच साल हो गए अभी तक इन गांवों के लोगों की सुध नहीं ली गई।
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मंगलवार को जैसे ही हुसैन मलकपुर और शाहपुर के लोगों को खबर लगी कि तहसील दिवस में डीएम आ रहे है, तो दोनों गांवों के लोग इकट्ठा होकर तहसील पहुंच गए और यहां शासन-प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों पदम सिंह, ओमवीर सिंह, राजेश शर्मा, अजय राणा, शिवपाल, इरफान आदि ने डीएम आलोक कुमार पांडेय को अवगत कराया, कि उनके गांवों चौतरफा नदियों से घिरे है। बरसात में नदियों में बाढ़ आने पर उनका बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है और उनके गांवों टापू बन जाते है। इस बार पिछले दिनों आई बाढ़ के तेज बहाव पानी ने ऊपर से की तरफ से गांवों की आबादी में पहुंचकर मुख्य मार्ग पर कटाव कर उसे ध्वस्त कर दिया। अगली बाढ़ आई तो उनके गांवों नहीं बचेंगे। लंबे समय से वें गांव की सुरक्षा के लिए नदी पर ऊपर की तरफ तटबंध एवं पुल निर्माण की मांग करते आ रहे है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई किसी स्तर पर भी नहीं हो पाई। डीएम ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया, कि वह तहसील दिवस के बाद उनके गांवों का दौरा करेंगे और उनकी समस्या के समाधान के लिए शासन को रिपोर्ट प्रेषित करेंगे। इसके बाद ही ग्रामीण वापस लौटे।
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।। इंसेट।।
बेहट। तहसील मुख्यालय से मुश्किल से किमी की दूरी पर स्थित हुसैन मलकपुर एवं शाहपुर गांवों की करीब पांच हजार की आबादी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह दोनों गांवों चौतरफा बरसाती नदियों एवं नालों से घिरे हुए है। बरसात के दिनों में इनका बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। यह गांव बाढ़ आने पर किसी टापू से कम नहीं होते। जानमाल के नुकसान को झेलते आ रहे ग्रामीण तटबंध एवं पुल निर्माण की मांग को लेकर लंबा संघर्ष भी कर चुके है। यहां बता दें कि इन गांवों के लोगों ने वर्ष 2012 के विस चुनाव एवं 2014 के लोकसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार रखा था। वर्ष 2013 में प्रशासनिक अधिकारियों ने एक नहीं कई बार इन गांवों का दौरा कर शासन को रिपोर्ट प्रेषित की थी, लेकिन पांच साल हो गए अभी तक इन गांवों के लोगों की सुध नहीं ली गई।
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