फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   72 years after independence, two gram panchayats wait for bridge

आजादी के 72 साल बाद भी दो ग्राम पंचायतों को पुल बनने का इंतजार

Fri, 05 Jun 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2020 11:39 PM IST
विज्ञापन
72 years after independence, two gram panchayats wait for bridge
संजय प्रधान - फोटो : SAHARANPUR
आजादी के 72 साल बाद भी दो ग्राम पंचायतों को पुल बनने का इंतजार
विज्ञापन

चिलकाना (सहारनपुर)। जनपद के विकासखंड सरसावा की दो ग्राम पंचायतें आजादी के 72 साल बाद भी सरकारी योजनाओं का मुंह ताक रही हैं। यहां के बाशिंदे उत्तर प्रदेश में होते हुए भी स्वयं को हरियाणा के नजदीक पाते हैं।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर यमुना नदी के पार बसे गांव सोंधेबांस व गाजदीनपुर जाने के लिए यमुना नदी को पार करना पड़ता है। यमुना नदी पर पुल न होने के कारण नाव से जान जोखिम में डालकर जाने की मजबूरी है। बरसात के दिनों में नदी में बाढ़ का पानी आ जाता है। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों ने अपने स्तर से सीमेंट के पाइप डालकर अस्थायी पुल बनाया हुआ है, जो हथिनीकुंड से पानी छोड़े जाने के बाद बह जाता है। वर्तमान में ग्रामीणों ने नदी में पानी के बहाव के स्थान पर ट्राली तथा रेहड़े खड़े करके उसके ऊपर से आवागमन शुरू कर रखा है। इन दोनों गांवों के लोगों के लिए यमुना नदी के कारण उत्तर प्रदेश दूर है, जबकि हरियाणा नजदीक पड़ता है। अधिकांश लोग अपनी जरूरतों के लिए हरियाणा जाना सुगम समझते हैं। पढ़ाई के लिए लोग अपने बच्चों को हरियाणा के स्कूलों में भेजते हैं। बीमार हो जाने पर भी उत्तर प्रदेश के किसी स्थान पर पहुंचने से ज्यादा हरियाणा जाना आसान है। गांव के लोगों ने यमुना नदी पर पुल बनवाने और गांवों में मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए अनेक बार जिला स्तरीय अधिकारियों तथा नेताओं को बताया, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि जब यमुना नदी में बाढ़ आती है तो उसके कुछ दिन बाद नेता तथा अधिकारी ट्रैक्टर पर सवार होकर अथवा हरियाणा के रास्ते गांव में पहुंचते हैं और सहायता का आश्वासन देकर गायब हो जाते हैं।
विज्ञापन

पुल न होने से लोग अपनी बेटियों की शादी इन गांवों में करना पसंद नहीं करते हैं। बरसात के समय में यमुना में खड़े बिजली के खंभे बाढ़ में बह जाते हैं और गांवों की बिजली गुल हो जाती है। गांव के पूर्व प्रधान रणवीर सिंह, अनिल कुमार, सुशील सैनी, विजेंद्र सैनी, अनूप कुमार, जसविंदर, महिपाल जियालाल, रमेश उपाध्याय, राजकुमार, गोपाल कश्यप, नानू प्रजापति, रामकिशन, यशपाल कश्यप, अशोक कुमार आदि ने यमुना नदी पर पुल बनवाने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हमने यहां की समस्याओं से विधायक और सांसद को अवगत कराया, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। पुल बनवाने के लिए पिछले कई वर्षों से मांग करते आ रहे हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद हर दल का नेता अपने वादे भूल जाता है।
- चौधरी सुभाष, गांव सोंधेबांस के प्रधान
यमुना नदी का पुल सबसे बड़ी समस्या है। पुल के बनने से उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के लोगों को बहुत लाभ होगा। इतना ही नहीं यहां के लोगों को हरियाणा की तरफ अपना रुख नहीं करना पड़ेगा। नेता तथा अधिकारी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दे पाए हैं।
संजय नंबरदार, गांव गाजदीनपुर के प्रधान
यमुना नदी के पुल का एस्टीमेट बन चुका है। सेतु निगम ने सर्वे भी कर लिया है। कोरोना के चलते सभी निर्माण कार्य रुके पड़े हैं। एस्टीमेट को लेकर शीघ्र ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मिलकर पुल निर्माण पर बात की जाएगी। उम्मीद है कि पुल का निर्माण शीघ्र शुरू होगा।

डॉ. धर्म सिंह सैनी, नकुड़ विधायक एवं राज्यमंत्री

सुभाष चौधरी

सुभाष चौधरी- फोटो : SAHARANPUR

डा धर्म सिंह सैनी

डा धर्म सिंह सैनी- फोटो : SAHARANPUR

चिलकाना में जान जोखिम में डाल कर यमुना दी पार करते ग्रामीण

चिलकाना में जान जोखिम में डाल कर यमुना दी पार करते ग्रामीण- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed