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तेजी से बढ़ रहे एमडीआर टीबी के मामले
Updated Sat, 24 Mar 2018 12:12 AM IST
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सहारनपुर। आज टीबी-डे है। दुनिया भर में तेजी से फैल रहे टीबी का वाइरस लोगों की जान का दुश्मन बन रहा है। ऐसे में जरूरी है कि टीबी पर चर्चा हो। चिकित्सकों की मानें तो अब टीबी एमडीआर का रूप लेने लगी है। यानी टीबी की वह स्थिति जब टीबी की सामान्य दवाएं मरीज पर असर नहीं करती हैं। यह स्थिति कई बार मरीज के लिए घातक साबित होती है। मगर यदि हम सावधानी बरतें तो अन्य लोगों को इस बीमारी की चपेट में आने से बचा सकते हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि दुनिया में करीब एक करोड़ दस लाख लोग टीबी के मरीज हैं, जिनमें से 28 लाख लोग अकेले भारत में हैं। भारत में साढ़े चार लाख लोग प्रत्येक वर्ष टीबी की वजह से अपनी जान गवाते हैं। भारत में हर तीन मिनट में दो लोगों की मौत टीबी की वजह से होती है। उन्होंने बताया कि इन दिनों एमडीआर टीबी तेजी से फैलने वाला रोग है। टीबी की एमडीआर पॉजिटिव में बदलने की मुख्य वजह टीबी का पूरा इलाज न करना बनता है। यह भी बताया कि टीबी सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करती है। इसके बाद आंतों, ग्रंथियों, दिमाग, हड्डी, गुर्दों और त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। उनकी सलाह है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक बुखार, खांसी और बलगम आ रहा है तो उसे तुरंत अपने नजदीकी अच्छे चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बताया कि सामान्य टीबी छह से नौ महीने में ठीक हो सकती है, मगर इसके लिए एक दिन का भी इलाज टूटना नहीं चाहिए।
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