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आरटीई लागू नहीं करने वाले स्कूलों की एनओसी रदद हो
Updated Tue, 27 Mar 2018 12:32 AM IST
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सहारनपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम को पूर्णतया लागू करने की मांग को लेकर एनसीआर अभिभावक संघ के अध्यक्ष विनोद वर्मा ने सोमवार को जिलाधिकारी पीके पांडे को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि जो स्कूल आरटीई को लागू करने में कोताही बरत रहे हैं उनकी मान्यता और एनओसी को रद्द किया जाए।
सोमवार को डीएम को सौंपे ज्ञापन में एनसीआर अभिभावक संघ के अध्यक्ष विनोद वर्मा ने कहा कि पब्लिक स्कूलों की मनमानी किसी से छिपी हुई नहीं है। फीस वृद्धि सहित अन्य बातों को लेकर अभिभावक विरोध प्रदर्शन तक कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 न केवल सरकारी स्कूलों के लिए बाध्यकारी है बल्कि अनुदान प्राप्त और गैर सहायतित मान्यता प्राप्त स्कूलों पर भी लागू होता है। इसके तहत विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्बल वर्ग के प्रवेश होना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी स्कूल कभी सीबीएसई से संबद्धता और कभी अल्पसंख्यक दर्जे की बात करके इस कानून पर अमल करने से बचते हैं। जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय भी इस बारे में स्पष्ट कर चुका है कि ये स्कूल उत्तर प्रदेश सरकार के नियंत्रण से बाहर नहीं है और प्रदेश सरकार ऐसे स्कूलों के लिए कोई भी कानून बनाने और न मानने की स्थिति में मान्यता और एनओसी रद्द करने में सक्षम है। उन्होंने जिलाधिकारी से आरटीई लागू नहीं करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की मांग की।
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सोमवार को डीएम को सौंपे ज्ञापन में एनसीआर अभिभावक संघ के अध्यक्ष विनोद वर्मा ने कहा कि पब्लिक स्कूलों की मनमानी किसी से छिपी हुई नहीं है। फीस वृद्धि सहित अन्य बातों को लेकर अभिभावक विरोध प्रदर्शन तक कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 न केवल सरकारी स्कूलों के लिए बाध्यकारी है बल्कि अनुदान प्राप्त और गैर सहायतित मान्यता प्राप्त स्कूलों पर भी लागू होता है। इसके तहत विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्बल वर्ग के प्रवेश होना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी स्कूल कभी सीबीएसई से संबद्धता और कभी अल्पसंख्यक दर्जे की बात करके इस कानून पर अमल करने से बचते हैं। जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय भी इस बारे में स्पष्ट कर चुका है कि ये स्कूल उत्तर प्रदेश सरकार के नियंत्रण से बाहर नहीं है और प्रदेश सरकार ऐसे स्कूलों के लिए कोई भी कानून बनाने और न मानने की स्थिति में मान्यता और एनओसी रद्द करने में सक्षम है। उन्होंने जिलाधिकारी से आरटीई लागू नहीं करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की मांग की।
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