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श्रीश्री रविशंकर का बयान सुप्रीम कोर्ट से भरोसा उठने वाला: उलमा
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:17 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर के बयान की बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद का समाधान कोर्ट से नहीं निकल सकता है पर देवबंदी उलमा का कहना है कि उनके बयान से इसका पता लगता है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के ऊपर भरोसा नहीं है।
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि कोर्ट इस समस्या में कोई अंतिम समाधान नहीं निकाल सकता। अगर कोर्ट से फैसला होगा तो किसी एक पक्ष को हार स्वीकार करनी पडे़गी। ऐसे हालात में हारा हुआ पक्ष अभी तो मान जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद फिर बवाल शुरू होगा जो समाज के लिए अच्छा नहीं है। श्रीश्री रविशंकर के बयान पर मदरसा जामिया हुसैनिया के मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि श्रीश्री के बयान से लग रहा है कि उन्हें देश की सर्वोच्च न्यायालय पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। कहा कि अगर कोई सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं मानता तो वो खास जहनियत के लोग हैं। मुफ्ती तारिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसला हर सूरत में सभी को मान्य होना चाहिए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और तमाम उलमा यह बात पहले ही कह चुके हैं कि बाबरी मस्जिद पर कोर्ट का जो भी फैसला होगा उन्हें स्वीकार होगा। फिर श्रीश्री रविशंकर इस तरह की बयानबाजी क्यों कर रहे हैं, ये समझ से परे हैं। दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ कासमी का कहना है कि श्रीश्री रविशंकर के इस बयान से ऐसा लग रहा है कि जैसे उनका अदालत से विश्वास उठ गया हो और वो इस तरह के बयान देकर एक पक्ष को उकसा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीश्री रविशंकर से इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी।
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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि कोर्ट इस समस्या में कोई अंतिम समाधान नहीं निकाल सकता। अगर कोर्ट से फैसला होगा तो किसी एक पक्ष को हार स्वीकार करनी पडे़गी। ऐसे हालात में हारा हुआ पक्ष अभी तो मान जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद फिर बवाल शुरू होगा जो समाज के लिए अच्छा नहीं है। श्रीश्री रविशंकर के बयान पर मदरसा जामिया हुसैनिया के मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि श्रीश्री के बयान से लग रहा है कि उन्हें देश की सर्वोच्च न्यायालय पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। कहा कि अगर कोई सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं मानता तो वो खास जहनियत के लोग हैं। मुफ्ती तारिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसला हर सूरत में सभी को मान्य होना चाहिए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और तमाम उलमा यह बात पहले ही कह चुके हैं कि बाबरी मस्जिद पर कोर्ट का जो भी फैसला होगा उन्हें स्वीकार होगा। फिर श्रीश्री रविशंकर इस तरह की बयानबाजी क्यों कर रहे हैं, ये समझ से परे हैं। दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ कासमी का कहना है कि श्रीश्री रविशंकर के इस बयान से ऐसा लग रहा है कि जैसे उनका अदालत से विश्वास उठ गया हो और वो इस तरह के बयान देकर एक पक्ष को उकसा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीश्री रविशंकर से इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी।
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