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सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की जयंती मनाई
Updated Wed, 09 May 2018 12:04 AM IST
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सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की जयंती मनाई
देवबंद। सैनी कल्याण समिति के तत्वावधान में मंगलवार को सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की जयंती धूमधाम से मनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि हमें अपने बच्चों को महापुरूषों के पदचिह्नों पर चलने को प्रेरित करना चाहिए।
मोहल्ला सैनी सराय में कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष रामकिशन सैनी ने कहा कि सम्राट चंद्रगुुप्त मौर्य का जन्म 344 ईसवीं में हुआ था। उन्होंने महान राजनीतिज्ञ एवं विद्वान चाणक्य ब्राह्मण के सानिध्य में अखंड भारत की रचना की। विश्व में यदि कोई चक्रवर्ती सम्राट बना तो वह केवल चंद्रगुप्त मौर्य था। मौर्य वंशकाल अब तक भारत का स्वर्णिम काल रहा है। इनके पौत्र सम्राट अशोक ने उनके पदचिह्नों पर चलकर भारत को सोने की चिड़िया कहलवाया। आज देश को ऐसे ही शासक की आवश्यकता है। सैनी, शाक्य, मौर्य और कुशवाहा आदि को अपने महापुरूषों का इतिहास पढ़ना चाहिए। संस्थापक मांगेराम सैनी ने कहा कि चंद्रगुप्त मौर्य की शासन प्रणाली आज भी प्रासंगिक है। भगवान गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक, ज्योतिबाराव फूले एवं सावित्रीबाई फूले के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। अध्यक्षता चौधरी यशपाल सैनी व संचालन अनुज सैनी और राजू सैनी ने किया। इस मौके पर रामप्रसाद सैनी, दीवान सैनी, सोमपाल सैनी, विकास सैनी, श्याम सिंह, दीक्षा सैनी, राजकुमार सैनी, अतुल, सांवत सैनी, नीरज, रामकुमार, धर्मवीर आदि रहे।
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देवबंद। सैनी कल्याण समिति के तत्वावधान में मंगलवार को सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की जयंती धूमधाम से मनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि हमें अपने बच्चों को महापुरूषों के पदचिह्नों पर चलने को प्रेरित करना चाहिए।
मोहल्ला सैनी सराय में कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष रामकिशन सैनी ने कहा कि सम्राट चंद्रगुुप्त मौर्य का जन्म 344 ईसवीं में हुआ था। उन्होंने महान राजनीतिज्ञ एवं विद्वान चाणक्य ब्राह्मण के सानिध्य में अखंड भारत की रचना की। विश्व में यदि कोई चक्रवर्ती सम्राट बना तो वह केवल चंद्रगुप्त मौर्य था। मौर्य वंशकाल अब तक भारत का स्वर्णिम काल रहा है। इनके पौत्र सम्राट अशोक ने उनके पदचिह्नों पर चलकर भारत को सोने की चिड़िया कहलवाया। आज देश को ऐसे ही शासक की आवश्यकता है। सैनी, शाक्य, मौर्य और कुशवाहा आदि को अपने महापुरूषों का इतिहास पढ़ना चाहिए। संस्थापक मांगेराम सैनी ने कहा कि चंद्रगुप्त मौर्य की शासन प्रणाली आज भी प्रासंगिक है। भगवान गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक, ज्योतिबाराव फूले एवं सावित्रीबाई फूले के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। अध्यक्षता चौधरी यशपाल सैनी व संचालन अनुज सैनी और राजू सैनी ने किया। इस मौके पर रामप्रसाद सैनी, दीवान सैनी, सोमपाल सैनी, विकास सैनी, श्याम सिंह, दीक्षा सैनी, राजकुमार सैनी, अतुल, सांवत सैनी, नीरज, रामकुमार, धर्मवीर आदि रहे।
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