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इस्लाम ने महिलाओं को लिखित में हक दिए हैं : उलमा
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:48 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद (यूनिट देवबंद) के महासचिव मौलाना मुफ्ती खादिमुल इस्लाम कासमी ने कहा कि संसार में इस्लाम एकमात्र ऐसा धर्म है जिसने महिलाओं को सम्मान, शिक्षा और विरासत में लिखित हक दिया है।
मोहल्ला पठानपुरा स्थित मदरसा फैजानुल कुरआन में आयोजित महिलाओं के जलसे में मुफ्ती खादिमुल इस्लाम कासमी ने कहा कि वर्तमान में सरकार तीन तलाक और हलाला जैसी समस्याओं को मुद्दा बनाकर इस्लाम धर्म को बदनाम करने का असफल प्रयास कर रही है। जिसे कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि हम दीन और शरीयत पर पाबंद रहने के साथ ही अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सचेत रहें। इसका एकमात्र विकल्प शिक्षा प्राप्ति है। इस कारण लड़कों के साथ साथ लड़कियों को भी उचित शिक्षा ग्रहण कराएं। फरहा अलवी, अदीबा खान और सफवाना ने भी इस्लाम धर्म की रोशनी में महिलाओं के अधिकार व कर्तव्यों पर विस्तार से रोशनी डाली। कार्यक्रम की शुरुआत दारुल उलूम के उस्ताद कारी इरफान की तिलावत-ए-कलाम पाक व लायबा खान की नात-ए-पाक से हुई। इस मौके पर बिल्लो, जेबा खान, हसीना बेगम, शेाइस्ता, आमना, सायरा खान, नाजो, परवीन, रुबी और मास्टर मतलूब आदि मौजूद रहे।
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मोहल्ला पठानपुरा स्थित मदरसा फैजानुल कुरआन में आयोजित महिलाओं के जलसे में मुफ्ती खादिमुल इस्लाम कासमी ने कहा कि वर्तमान में सरकार तीन तलाक और हलाला जैसी समस्याओं को मुद्दा बनाकर इस्लाम धर्म को बदनाम करने का असफल प्रयास कर रही है। जिसे कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि हम दीन और शरीयत पर पाबंद रहने के साथ ही अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सचेत रहें। इसका एकमात्र विकल्प शिक्षा प्राप्ति है। इस कारण लड़कों के साथ साथ लड़कियों को भी उचित शिक्षा ग्रहण कराएं। फरहा अलवी, अदीबा खान और सफवाना ने भी इस्लाम धर्म की रोशनी में महिलाओं के अधिकार व कर्तव्यों पर विस्तार से रोशनी डाली। कार्यक्रम की शुरुआत दारुल उलूम के उस्ताद कारी इरफान की तिलावत-ए-कलाम पाक व लायबा खान की नात-ए-पाक से हुई। इस मौके पर बिल्लो, जेबा खान, हसीना बेगम, शेाइस्ता, आमना, सायरा खान, नाजो, परवीन, रुबी और मास्टर मतलूब आदि मौजूद रहे।
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