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26 छड़ियों का होगा शृंगार, भ्रमण की अनुमति का इंतजार
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मेला गुघाल परिसर में खड़ी छड़ियों का फाइल फोटो।
- फोटो : SAHARANPUR
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26 छड़ियों का होगा शृंगार, भ्रमण की अनुमति का इंतजार
कोरोना काल में संकट : नेजे की अगुवाई में हर वर्ष म्हाड़ी पर प्रस्थान करती हैं छड़ियां
सहारनपुर। कोरोना काल का असर त्योहारों पर पड़ रहा है। जन्माष्टमी के बाद बुधवार को नवमी पर लोगों ने घरों पर ही बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज के थापे लगाए। 14 अगस्त को नेजे के पूजन के साथ ही 26 छड़ियों का शृंगार होगा, लेकिन इस बार शहर में छड़ियों के भ्रमण को लेकर संशय है। क्योंकि, प्रशासन ने अभी छड़ियों के भ्रमण और म्हाड़ी पर मेले की अनुमति नहीं दी है।
इस बार शुक्ल पक्ष की दशमी 28 अगस्त की पड़ रही है। हर वर्ष इस दिन गंगोह रोड स्थित श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज की म्हाड़ी पर तीन दिवसीय मेला भरता है, जिसमें सहारनपुर के अलावा पश्चिमी यूपी, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान से लाखों श्रद्धालु प्रसाद और निशान चढ़ाने आते हैं। शुक्ल पक्ष की दशमी से दो सप्ताह पूर्व बाबा श्री जाहरवीर के प्रतीक चिन्ह रंग-बिरंगी छड़ियां दिन में घर-घर भ्रमण करती हैं और लोग उनका पूजन करते हैं। रात में बसेरों का आयोजन होता है, जिसमें विशेष रूप से कढ़ी-चावल का प्रसाद बनता है। भक्तगण बाबा श्री जाहरवीर की वीरता के किस्से सुनाते हैं। मेले वाले दिन सभी छड़ियां नेजे की अगुवाई में अंबाला रोड स्थित मेला गुघाल परिसर स्थित श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पर पूजन के बाद म्हाड़ी पर प्रस्थान कर जाती है, जहां तीन दिन रुकने के बाद छड़ियां लौट आती हैं। फिर तीन दिन तक लौटती छड़ियों के बसेरे होते हैं।
भ्रमण और मेले की अनुमति दे प्रशासन : पंकज
श्री गुग्गा सुधार सभा समिति के अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि बाबा श्री जाहरवीर की शान में ऐतिहासिक काल से मेला भरता आया है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार छड़ियों को घर-घर पूजन कराने की अनुमति दी जाए। इसको लेकर डीएम को ज्ञापन दे चुके हैं।
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शृंगार के साथ निशानियों को बांधी जाएंगी डोरियां
बुधवार को नवमी पर लोगों ने घर-घर बाबा श्री जाहरवीर के थापे लगाए और कलावा अर्पित किया। शहर में भ्रमण के दौरान जब छड़ियां लोगों के घरों पर आएंगी तो उनका पूजन होगा और यही कलावा छड़ी पर बांधा जाएगा और भोग लगाकर श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेंगे। सरदार छड़ी के भक्त विनोद प्रकाश और चौधरन छड़ी के भक्त गुलशन सागर का कहना है कि 14 अगस्त को सभी 26 छड़ियों का शृंगार होगा। इसी दिन छड़ी की निशानियों को संकल्प के साथ डोरिया बांधी जाएंगी।
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कोरोना काल में संकट : नेजे की अगुवाई में हर वर्ष म्हाड़ी पर प्रस्थान करती हैं छड़ियां
सहारनपुर। कोरोना काल का असर त्योहारों पर पड़ रहा है। जन्माष्टमी के बाद बुधवार को नवमी पर लोगों ने घरों पर ही बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज के थापे लगाए। 14 अगस्त को नेजे के पूजन के साथ ही 26 छड़ियों का शृंगार होगा, लेकिन इस बार शहर में छड़ियों के भ्रमण को लेकर संशय है। क्योंकि, प्रशासन ने अभी छड़ियों के भ्रमण और म्हाड़ी पर मेले की अनुमति नहीं दी है।
इस बार शुक्ल पक्ष की दशमी 28 अगस्त की पड़ रही है। हर वर्ष इस दिन गंगोह रोड स्थित श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज की म्हाड़ी पर तीन दिवसीय मेला भरता है, जिसमें सहारनपुर के अलावा पश्चिमी यूपी, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान से लाखों श्रद्धालु प्रसाद और निशान चढ़ाने आते हैं। शुक्ल पक्ष की दशमी से दो सप्ताह पूर्व बाबा श्री जाहरवीर के प्रतीक चिन्ह रंग-बिरंगी छड़ियां दिन में घर-घर भ्रमण करती हैं और लोग उनका पूजन करते हैं। रात में बसेरों का आयोजन होता है, जिसमें विशेष रूप से कढ़ी-चावल का प्रसाद बनता है। भक्तगण बाबा श्री जाहरवीर की वीरता के किस्से सुनाते हैं। मेले वाले दिन सभी छड़ियां नेजे की अगुवाई में अंबाला रोड स्थित मेला गुघाल परिसर स्थित श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पर पूजन के बाद म्हाड़ी पर प्रस्थान कर जाती है, जहां तीन दिन रुकने के बाद छड़ियां लौट आती हैं। फिर तीन दिन तक लौटती छड़ियों के बसेरे होते हैं।
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भ्रमण और मेले की अनुमति दे प्रशासन : पंकज
श्री गुग्गा सुधार सभा समिति के अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि बाबा श्री जाहरवीर की शान में ऐतिहासिक काल से मेला भरता आया है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार छड़ियों को घर-घर पूजन कराने की अनुमति दी जाए। इसको लेकर डीएम को ज्ञापन दे चुके हैं।
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शृंगार के साथ निशानियों को बांधी जाएंगी डोरियां
बुधवार को नवमी पर लोगों ने घर-घर बाबा श्री जाहरवीर के थापे लगाए और कलावा अर्पित किया। शहर में भ्रमण के दौरान जब छड़ियां लोगों के घरों पर आएंगी तो उनका पूजन होगा और यही कलावा छड़ी पर बांधा जाएगा और भोग लगाकर श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेंगे। सरदार छड़ी के भक्त विनोद प्रकाश और चौधरन छड़ी के भक्त गुलशन सागर का कहना है कि 14 अगस्त को सभी 26 छड़ियों का शृंगार होगा। इसी दिन छड़ी की निशानियों को संकल्प के साथ डोरिया बांधी जाएंगी।