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गन्ने को लाइलाज बिमारियों से बचाता है बीज शोधन
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सहारनपुर। गन्ने को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक बुआई से पहले बीज शोधन पर जोर दे रहे हैं। इसके लिए गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
गन्ने की फसल में रेडरॉट, बिल्ट, ग्राशी शूट आदि बीमारियां उत्पादकता पर विपरीत असर डाल रही हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को बीज शोधन के लिए जागरूक कर रहे हैं। बीज शोधन से गन्ने की कई बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि गन्ने की कई बीमारियों पर केवल बीज शोधन करके ही अंकुश लगाया जा सकता है। इसके लिए किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीज शोधन के लिए कार्बेंडिजियम दो ग्राम और थायामिथाक्सम एक ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बना लेना चाहिए। इसमें बीज के टुकड़ों को कम से कम दो घंटे तक डुबोकर रखना चाहिए। इसके बाद गन्ना बुआई के समय लाईनों में मेटाराइजियम, सूडोमोनाज, ट्राइकोड्रमा जैसे जैव नियंत्रकों को गोबर के खाद में मिलाकर डालना चाहिए। इसके अलावा बुआई से पूर्व गर्म शोधन मशीन में 54 डिग्री सेल्सियस तापमान पर एक घंटे उपचारित कराना मुफीद रहता है। उन्होंने बताया कि बीज शोधन से गन्ने में लगने वाले कई बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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गन्ने की फसल में रेडरॉट, बिल्ट, ग्राशी शूट आदि बीमारियां उत्पादकता पर विपरीत असर डाल रही हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को बीज शोधन के लिए जागरूक कर रहे हैं। बीज शोधन से गन्ने की कई बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि गन्ने की कई बीमारियों पर केवल बीज शोधन करके ही अंकुश लगाया जा सकता है। इसके लिए किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीज शोधन के लिए कार्बेंडिजियम दो ग्राम और थायामिथाक्सम एक ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बना लेना चाहिए। इसमें बीज के टुकड़ों को कम से कम दो घंटे तक डुबोकर रखना चाहिए। इसके बाद गन्ना बुआई के समय लाईनों में मेटाराइजियम, सूडोमोनाज, ट्राइकोड्रमा जैसे जैव नियंत्रकों को गोबर के खाद में मिलाकर डालना चाहिए। इसके अलावा बुआई से पूर्व गर्म शोधन मशीन में 54 डिग्री सेल्सियस तापमान पर एक घंटे उपचारित कराना मुफीद रहता है। उन्होंने बताया कि बीज शोधन से गन्ने में लगने वाले कई बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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