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संस्था बज्मे अदब ने कराया ऑल इंडिया मुशायरा
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:18 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। संस्था बज्मे अदब देवबंद के तत्वावधान में ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित किया गया, जिसमें शायरों ने अपने पसंदीदा कलाम से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
इस्लामिया डिग्री कॉलेज परिसर में मुशायरे का उद्घाटन वरिष्ठ बसपा नेता हाजी फजलुर्रहमान ने किया। शमां रोशन समाजसेवी कलीम कुरैशी और अध्यक्षता इस्लामिया ग्रुप ऑफ कॉलेज के प्रबंधक डा. अजीम उल हक ने की। मुशायरे का आगाज जावेद आसी राज्जुपुरी की नाते पाक से हुआ। कुवैत से पधारे अफरोज आलम ने पढ़ा बहुत ही देर से कलियों को नींद आई है, नसीमे सुबहों से कह दो कदम दबाके चले। खुर्शीद हैदर ने कहा पोते ने दादा की फोटो ये कहकर बाहर रख दी, मेरा अलबम नया-नया है ये तस्वीर पुरानी है। नाजिम अशरफ किरतपुरी ने पढ़ा बड़ों की इसलिए भी कद्र करनी चाहिए अशरफ, चला जाता है जब कोई तो भरपाई नहीं होती। नदीम मैवाती ने कहा वो अंधेरों को क्या मिटाएंगे, जो दिये हवा से डरते हैं। डा. शमीम देवबंदी ने पढ़ा नन्हा बच्चा सोच रहा है चुप-चुप सा, आखिर क्यों दीवार उठी है आंगन में। नूर देवबंदी ने कहा इस दिल में बेबसी का समंदर न पूछिये, अपने ही हो गए हैं सितमगर न पूछिये। सादिक देवबंदी ने पढ़ा वो आंसमा तो दूर जमी का नहीं रहा, अपनी अना में वो तो कहीं का नहीं रहा। डा. अदनान अनवर ने कहा लाख खिदमत करे बुजुर्गों की, हक तो फिर भी अदा नहीं होता। चौकस देवबंदी ने पढ़ा चौकस खुदा का शुक्र है चश्मे के बेस पर, कल टूटने से बच गया इक रिश्ता मोतबर। इनके अलावा अफजल झिंझानवी, चांद देवबंदी, नफीस अहमद, झटपट मंगलौरी आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। संचालन गुलजार बेग जिगर ने किया। इस मौके पर डा. दिलशाद अहमद, हसीन अंसारी, शुऐब कुरैशी, सलीम अंसारी, डा. फरमान, राजकुमारी उज्जवंशवी राजे, कारी गाजी वाजिदी, डा. नौशाद अली, शाहिद अंसारी, पुष्पेंद्र कुमार, रमीज अंसारी, दीपक कुमार, अजय कुमार, डा. शारिक, हसन हमदान, रहबर अंसारी आदि रहे।
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इस्लामिया डिग्री कॉलेज परिसर में मुशायरे का उद्घाटन वरिष्ठ बसपा नेता हाजी फजलुर्रहमान ने किया। शमां रोशन समाजसेवी कलीम कुरैशी और अध्यक्षता इस्लामिया ग्रुप ऑफ कॉलेज के प्रबंधक डा. अजीम उल हक ने की। मुशायरे का आगाज जावेद आसी राज्जुपुरी की नाते पाक से हुआ। कुवैत से पधारे अफरोज आलम ने पढ़ा बहुत ही देर से कलियों को नींद आई है, नसीमे सुबहों से कह दो कदम दबाके चले। खुर्शीद हैदर ने कहा पोते ने दादा की फोटो ये कहकर बाहर रख दी, मेरा अलबम नया-नया है ये तस्वीर पुरानी है। नाजिम अशरफ किरतपुरी ने पढ़ा बड़ों की इसलिए भी कद्र करनी चाहिए अशरफ, चला जाता है जब कोई तो भरपाई नहीं होती। नदीम मैवाती ने कहा वो अंधेरों को क्या मिटाएंगे, जो दिये हवा से डरते हैं। डा. शमीम देवबंदी ने पढ़ा नन्हा बच्चा सोच रहा है चुप-चुप सा, आखिर क्यों दीवार उठी है आंगन में। नूर देवबंदी ने कहा इस दिल में बेबसी का समंदर न पूछिये, अपने ही हो गए हैं सितमगर न पूछिये। सादिक देवबंदी ने पढ़ा वो आंसमा तो दूर जमी का नहीं रहा, अपनी अना में वो तो कहीं का नहीं रहा। डा. अदनान अनवर ने कहा लाख खिदमत करे बुजुर्गों की, हक तो फिर भी अदा नहीं होता। चौकस देवबंदी ने पढ़ा चौकस खुदा का शुक्र है चश्मे के बेस पर, कल टूटने से बच गया इक रिश्ता मोतबर। इनके अलावा अफजल झिंझानवी, चांद देवबंदी, नफीस अहमद, झटपट मंगलौरी आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए। संचालन गुलजार बेग जिगर ने किया। इस मौके पर डा. दिलशाद अहमद, हसीन अंसारी, शुऐब कुरैशी, सलीम अंसारी, डा. फरमान, राजकुमारी उज्जवंशवी राजे, कारी गाजी वाजिदी, डा. नौशाद अली, शाहिद अंसारी, पुष्पेंद्र कुमार, रमीज अंसारी, दीपक कुमार, अजय कुमार, डा. शारिक, हसन हमदान, रहबर अंसारी आदि रहे।
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