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अतिक्रमण के लिए सरकारी विभाग भी जिममेदार

Thu, 21 Dec 2017 12:22 AM IST
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:22 AM IST
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अतिक्रमण के लिए सरकारी विभाग भी जिममेदार
अतिक्रमण के लिए सरकारी विभाग भी जिममेदार
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सहारनपुर। जिला प्रशासन शीघ्र ही शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने वाला है। महापौर का कहना है कि 50 साल पुराने रिकार्ड के आधार पर अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाएगा। कमिश्नर, डीएम और नगरायुक्त से बात करने के बाद उन्होंने नगर के व्यापारी संगठनों के साथ बैठक कर उन्हें अतिक्रमण हटाने की तैयारी से अवगत कराया। इसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि सड़कों पर अतिक्रमण करने वाले केवल व्यापारी हैं। बेशक व्यापारी भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, मगर देखा जाए तो अनेक सरकारी विभागों ने सड़कों पर कब्जे किए हुए हैं, जिसकी वजह से सड़कें संकरी हो गई हैं। यहां तक की हाईवे भी। रेलवे रोड पर एक बैंक ने सड़क पर करीब 30 फुट आगे तक दीवार बनाई हुई है। अब देखना यह है कि प्रशासन और नगर निगम अतिक्रमण हटाने में कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखाता है।
सड़कों के बीच में रख दिए ट्रांसफार्मर
विद्युत निगम की बात करें तो पिछले साल शहर भर में पुराने ट्रांसफार्मर बदले गए हैं। स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल सहारनपुर में नए ट्रांसफार्मरों को नगर निगम को संज्ञान में लेकर रखा जाना था, जिससे भविष्य में सड़कों के चौड़ीकरण करने में कोई परेशानी न हो। मगर हुआ यह कि विद्युत निगम ने शहर भर में सड़कों पर ही ट्रांसफार्मर रख दिए हैं, जिनका जाल भी बनाया गया है। ट्रांसफार्मर की आड़ में अनेक लोगों ने दुकानें आगे बढ़ा ली हैं, जबकि अनेक खोखे और रेहड़ियों को भी सड़क पर लगाने का मौका मिला है। इसके अलावा शहर में अनेक मार्गों पर बिजली के पोल पुराने समय के लगे हैं, जो वर्तमान में सड़कों के बीच में आ रहे हैं। इन पोल को उखाड़कर सड़कों के किनारे करने की जरूरत है।
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अतिक्रमण के लिए नगर निगम खुद जिम्मेदार
नगर निगम सड़कों से अतिक्रमण हटाने की तैयारी कर रहा है, मगर गौर से देखा जाए तो नगर निगम खुद अतिक्रमण करा रहा है। चकराता रोड पर कंपनी बाग के पास नगर निगम का नलकूप सड़क पर बना है। शहर में अनेक जगहों पर ऐसी स्थिति है। इसके अलावा नगर निगम ने सड़कों को पार्किंग बनाने का ठेका दिया हुआ है। रेलवे स्टेशन के बाहर जीपीओ रोड पर दुपहिया वाहनों को सड़क पर खड़ा किया जा रहा है, जिसकी वजह से वहां जाम की स्थिति रहती है। इसके अलावा नगर निगम सड़कों से ही बसों और टेंपो का संचालन भी करा रहा है। रेलवे रोड से प्राइवेट बसों का संचालन सड़क से हो रहा है। इसके लिए प्राइवेट यूनियन ने अपना कार्यालय तक सड़क पर बनाया हुआ है। दिनभर बसें सड़क पर खड़ी होती हैं, जिनकी वजह से जाम रहता है। इसके अलावा घंटाघर समेत अनेक जगहों से टेंपो का संचालन भी नगर निगम की शह पर ही हो रहा है। इसके अलावा नगर निगम ने सैकड़ों होर्डिंग्स सड़कों पर गाड़ दिए हैं, जो राह में रोड़ा साबित हो रहे हैं।
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सड़कों पर बने हैं पुलिस चौकियां और थाने
शहर में ज्यादातर थाने और चौकियां सड़कों पर बनी हैं। थाना कुतुबशेर पूरी तरह अंबाला हाईवे पर बना है, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग है। इसकी वजह से हाईवे की एक सड़क काफी संकरी रहती है, जिसकी वजह से यातायात प्रभावित होता है। इसके अलावा हसनपुर चौकी, राकेश केमिकल चौकी, सिविल लाइंस चौकी, चौकी सराय, चंद्रनगर चौकी, घंटाघर चौकी, किशनपुरा चौकी आदि सड़कों पर बनी हैं, जिनको हटाने की हिम्मत प्रशासन आज तक नहीं कर सका है। इनको हटाने से पहले इनके लिए जमीन की जरूरत है, जहां इनको शिफ्ट किया जा सके।
सड़क बनाने वाले विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं
चकराता रोड और कोर्ट रोड की बात करें तो इन सड़कों की कुल चौड़ाई 80 से 120 फुट तक है, जिनके बीच में डिवाइडर बने हैं। डिवाइडर बनने के बाद एक साइड की सड़क की चौड़ाई 50 से 60 फुट रहती है। मगर सड़क बनाने वाले विभागों ने प्रत्येक साइड में 12 से 16 फुट तक चौड़ाई पर ही सड़कें बनाई हुई हैं, जबकि शेष जगहों को दुकानदार अपनी समझते हैं, जिनका इस्तेमाल पार्किंग और दुकानें सजाने के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं कोर्ट रोड पर भी सड़कों के किनारे पर सफेद पट्टी बनी हैं, जिनके अंडर में खड़े वाहनों को ही पुलिस हटवाती है, जबकि उसके बाहर सड़कों पर लगी दुकानों और खड़े वाहनों को कभी छेड़ा तक नहीं जाता है। यदि सड़कों की चौड़ाई फुल रखी जाए यानी दुकान के दरवाजे तक बनाई जाएं और वहीं तक उनका इस्तेमाल चलने के लिए हो तो यातायात व्यवस्था काफी सुधर सकती है।

टेलीफोन विभाग का भी अतिक्रमण
सड़कों पर टेलीफोन की तमाम लाइनें अंडर ग्राउंड हैं। टेलीफोन के अनेक खंभे और बॉक्स अनेक जगहों पर सड़कों पर हैं, जिनको या तो पूरी तरह किनारे किए जाने की जरूरत है या फिर बीच में चौड़ा डिवाइडर बनाकर उसके बीच में लेने की। मगर टेलीफोन विभाग जब चाहे सड़कों को खोदकर लाइनों में बदलाव करना शुरू कर देता है। इसकी वजह से भी यातायात प्रभावित रहता है। इनमें अनेक प्राइवेट कंपनियां भी हैं।

धार्मिक स्थलों को हटाना बनेगा चुनौती
शहर में अनेक धार्मिक स्थल सड़कों पर बने हैं, जिनको हटाने की हिम्मत न तो शासन कर पाता है और न ही प्रशासन। मगर यदि धार्मिक स्थलों को छोड़ा जाता है तो समस्या बनी ही रहेगी। ऐसे में धार्मिक स्थलों को सड़कों से हटाना प्रशासन के लिए चुनौती रहेगा। यह काम सभी धर्मों के गुरुओं को साथ लेकर ही किया जा सकता है।


अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर हम पूरी तरह गंभीर है। विद्युत के खंभों और ट्रांसफार्मर जहां भी सड़कों पर रखे हैं। उन्हें हटाया जाएगा। ट्रांसफार्मर और खंभों को सड़कों से हटाने के लिए विद्युत निगम को पैसा मिल चुका है। इसके अलावा जो भी थाने और पुलिस चौकियां सड़कों पर हैं उनको हटाकर अन्य जगहों पर शिफ्ट किया जाएगा।
दीपक अग्रवाल, कमिश्नर।
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