{"_id":"59b19d384f1c1be27f8b4c71","slug":"201504812344-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवबंद में फिर होने से बचा बड़ा हादसा, जर्जर भवन की दीवार गिरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवबंद में फिर होने से बचा बड़ा हादसा, जर्जर भवन की दीवार गिरी
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिर बड़ा हादसा टला, जर्जर भवन की दीवार गिरी
देवबंद (सहारनपुर)। मोहल्ला शाहबुखारी में जर्जर भवन की दीवार गिरने से बड़ा हादसा होने से बच गया। घटना के समय मकान खाली था। इसमें कुछ इस्लामिक पुस्तकें रखी थीं। लेकिन कई घरों का रास्ता बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, नगर पालिका की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद जर्जर भवनों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया गया है।
बता दें कि इससे पहले मोहल्ला महल में दो सितंबर की रात बदर आलम के जर्जर भवन की दीवार गिरने से उसके मलबे में दबकर मोहल्ला टपरी निवासी असद कुरैशी, लईक कुरैशी और मणिपुर के मदरसा छात्र ओसामा की मौत हो गई थी। जबकि खानकाह निवासी अनस सिद्दीकी समेत तीन लोग घायल हो गए थे। इसके बाद बृहस्पतिवार तड़के चार बजे मोहल्ला शाहबुखारी में फैयाज का जर्जर मकान भरभरा कर ढह गया। गनीमत रही कि सुबह के समय आवाजाही नहीं थी। वरना फिर से बड़ा हादसा हो सकता था। मकान खाली था। उसमें केवल कुछ इस्लामिक पुस्तकें ही रखी हुई थीं। लेकिन मकान ढहने से गिरे मलबे में कई घरों का रास्ता बंद हो गया। लोगों को आने जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ी। उधर, बदर आलम के मकान को भी गिरना शुरु कर दिया गया है।
गौरतलब है कि पालिका ने पहले हादसे के बाद जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए एक टीम का गठन किया था। साथ ही यह आदेश दिया था कि शीघ्र ही जर्जर भवनों की सूची बनाकर प्रशासन को सौंपी जाए। प्रशासन के आदेश को अमलीजामा पहनाते हुए नगर पालिका ने 25 भवनों को चिह्नित कर 11 भवन स्वामियों को ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए थे। नोटिस मिलने के बाद कई भवन स्वामियों ने जर्जर भवनों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। मोहल्ला शाहबुखारी में जर्जर भवन की दीवार गिरने से बड़ा हादसा होने से बच गया। घटना के समय मकान खाली था। इसमें कुछ इस्लामिक पुस्तकें रखी थीं। लेकिन कई घरों का रास्ता बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, नगर पालिका की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद जर्जर भवनों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया गया है।
बता दें कि इससे पहले मोहल्ला महल में दो सितंबर की रात बदर आलम के जर्जर भवन की दीवार गिरने से उसके मलबे में दबकर मोहल्ला टपरी निवासी असद कुरैशी, लईक कुरैशी और मणिपुर के मदरसा छात्र ओसामा की मौत हो गई थी। जबकि खानकाह निवासी अनस सिद्दीकी समेत तीन लोग घायल हो गए थे। इसके बाद बृहस्पतिवार तड़के चार बजे मोहल्ला शाहबुखारी में फैयाज का जर्जर मकान भरभरा कर ढह गया। गनीमत रही कि सुबह के समय आवाजाही नहीं थी। वरना फिर से बड़ा हादसा हो सकता था। मकान खाली था। उसमें केवल कुछ इस्लामिक पुस्तकें ही रखी हुई थीं। लेकिन मकान ढहने से गिरे मलबे में कई घरों का रास्ता बंद हो गया। लोगों को आने जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ी। उधर, बदर आलम के मकान को भी गिरना शुरु कर दिया गया है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि पालिका ने पहले हादसे के बाद जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए एक टीम का गठन किया था। साथ ही यह आदेश दिया था कि शीघ्र ही जर्जर भवनों की सूची बनाकर प्रशासन को सौंपी जाए। प्रशासन के आदेश को अमलीजामा पहनाते हुए नगर पालिका ने 25 भवनों को चिह्नित कर 11 भवन स्वामियों को ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए थे। नोटिस मिलने के बाद कई भवन स्वामियों ने जर्जर भवनों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन