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दूसरे नगर निगमों से सीखा जाएगा विकास का ककहरा

Thu, 28 Dec 2017 12:34 AM IST
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:34 AM IST
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दूसरे नगर निगमों से सीखा जाएगा विकास का ककहरा
सहारनपुर। नगर निगम बनने के आठ साल बाद भी अधिकारी शहर का विकास नहीं कर सके हैं। इतना ही नहीं, वर्तमान में चल रही व्यवस्था को लेकर भी अधिकारी असमंजस में हैं। यही वजह है कि नगर निगम विकास की सीख अन्य नगर निगमों से लेने की तैयारी में है। यमुनानगर किस तरह से विकास कार्यों को गति दे रहा है। यह जानने के लिए नगर निगम ने अपना एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को यमुनानगर भेजा, जिसमें पार्षद और नगर निगम के कुछ अधिकारी शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल का आगरा पड़ाव देहरादून और उसके बाद चंडीगढ़ होगा।
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शहरी क्षेत्र में गृह कर को लेकर नागरिकों में काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि नगर निगम ने दो वर्ष पहले गृह कर 15 से 20 गुणा तक बढ़ाया हुआ है। कर अधिक होने की वजह से ही ज्यादातर लोग कर नहीं चुका पा रहे हैं। वर्तमान में करीब 20 करोड़ रुपया गृह कर का बकाया है। कई बकाएदारों पर एक से दस लाख रुपये तक गृह कर बकाया है। सीवरेज सिस्टम की बात करें तो करीब 70 फीसदी क्षेत्र में सीवर लाइन ही नहीं बिछाई गई है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता कम है, साथ ही साफ किए जा रहे पानी का भी उपयोग तक नहीं हो पा रहा है। पेयजल की बात करें तो करीब 25 फीसदी घरों को ही नगर निगम पेयजल मुहैया करा पा रहा है। सफाई की हालत ऐसी है कि डंपिंग ग्राउंड न होने की वजह से शहर से कचरा उठाकर बाहर सड़कों किनारे फेंका जा रहा है। शहर भर में जगह-जगह गंदगी के ढेर बीमारियां फैला रहे हैं। अन्य व्यवस्थाएं भी लचर हैं। बुधवार को यमुनानगर पहुंचे नगर निगम के प्रतिनिधिमंडल में शामिल पार्षद मंसूर बदर और सुरेंद्र धवन ने बताया कि उन्हें महापौर संजीव वालिया ने यमुनानगर की व्यवस्था देखने के लिए भेजा है। मुख्य तौर पर उन्होंने सीवरेज सिस्टम, सफाई व्यवस्था, एसटीपी, कूड़ा निस्तारण और गृह कर प्रणाली देखी। प्रतिनिधिमंडल में नगर निगम के अधिकारी भी शामिल रहे।
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सहारनपुर शहर की अव्यवस्थाएं
- 60 से 70 फीसदी क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं।
- कचरे के निस्तारण की व्यवस्था न होना, जगह-जगह गंदगी के ढेर लगना।
- 60 फीसदी से अधिक घरों को पेयजल आपूर्ति नहीं।
- जनता पर गृह कर का अधिक भार।
- सड़कों का जर्जर होना।
- मुख्य मार्गों और बाजारों में भारी अतिक्रमण।
- यातायात व्यवस्था ध्वस्त होना।
- एसटीपी की क्षमता कम होना।
- ऑनलाइन व्यवस्था को सुचारू रूप से न चलना।
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यमुनानगर में यह चीजें हमसे बेहतर
- चौड़ी और दुरुस्त सड़कें।
- यातायात व्यवस्था हमसे बेहतर।
- नगर निगम के तमाम कार्य ऑनलाइन।
- सभी कार्यों में पूरी पारदर्शिता।
- प्राइवेट कंपनियों का कम से कम हस्तक्षेप।
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इन चीजों में हमसे पीछे
बेशक यमुनानगर में ज्यादातर चीजें सहारनपुर से बेहतर हैं। मगर कुछ चीजों में सहारनपुर यमुनानगर से आगे नजर आया है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल पार्षद मंसूर बदर ने बताया कि शहरवासियों को पेयजल मुहैया कराने में यमुनानगर हमसे पीछे है। डोर टू डोर कूड़ा इकट्ठा करने का काम एक साल से बंद है। सीवर की व्यवस्था भी हमसे बेहतर नहीं है।
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जनता ने हमें महापौर और पार्षदों के रूप में अपना प्रतिनिधि चुना है। ऐसे में हमारा मकसद जनता को बेहतर से बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना है। इसके लिए हम अन्य नगर निगमों का सर्वे करा रहे हैं। पार्षदों और निगम के अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल नगर निगमों की दौरा कर रहा है। जहां से भी जो चीजें बेहतर मिलेंगी उन्हें यहां लागू कराया जाएगा।
संजीव वालिया, महापौर।
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