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पचास साल से सेवा सदन अंबाला चला रहा मामू का भंडारा
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पचास साल से सेवा सदन अंबाला चला रहा मामू का भंडारा
गंगोह (सहारनपुर)। नर सेवा नारायण सेवा को चरितार्थ करते हुए उर्स में श्री सेवा सदन अंबाला द्वारा पिछले 50 साल से भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इनके अलावा मामू आलाबख्श के दरगाह परिसर सहित अनेक स्थानों पर भंडारों का आयोजन होता है।
सेवा सदन के भंडारे की व्यवस्था देखने वाले हेमचंद जैन और सुशील जैन ने बताया कि सेवा सदन की स्थापना मरहूम लाला डिप्टी मल जैन एवं रामजी लाल जैन द्वारा की गई थी। कहा कि जायरीनों की सेवा कर उन्हें असीम शांति मिलती है। भगत मोहन लाल, राममूर्ति, विक्रमपाल सिंह, अनिल जैन, अजायब सिंह, बलदेव नंबरदार आदि मामू आला बख्श के नाम पर भंडारा चलाते हैं। दरगाह परिसर में मामू के नाम पर अशोक कुमार, बब्बू भगत, अमित कुमार, नरेश कुमार, पवन बंसल, राजकुमार, गौरव कर्णवाल, रमेश सरपंच, सतीश, आलोक कुमार, जीत शर्मा आदि उर्स की शुरुआत से लेकर अंत तक भंडारे का आयोजन करते हैं। इनके अलावा अमित कुमार, विकास कुमार भी मामू के नाम पर भंडारा चलाते है। इन लोगों का कहना है कि मामू मौलाबख्श की मेहरबानी से भक्तजनों की मुरादें पूरी होती है। इनके अलावा शाह अता मंजिल और दरगाह हजरत कुतबे आलम सहित 20 से ज्यादा स्थानों पर दिन रात भंडारा चलता रहता है।
बेपनाह मोहब्बत की मिसाल है मामू और लाडो रानी की दरगाह
गंगोह। मामू मौलाबख्श और लाडोरानी की दरगाह बेपनाह मोहब्बत की मिसाल है। बताते है कि दोनो में बेपनाह मोहब्बत थी। यही कारण है कि दोनों की मजारें बराबर में बनी है। किदवंती है कि यहां मन्नत मांगने से अविवाहितों के विवाह और बेऔलादों को औलाद मिल जाती है। जायरीनों को मन माफिक पति एवं पत्नी मिलती है। मुराद पूरी होने पर लाडोरानी की मजार पर लाल चुनरी, चूड़ियां, श्रृंगार का सामान एवं झाडू़ चढ़ाई जाती है। जबकि हजरत मामू मौलाबख्श और इनके महबूब हजरत शेख सादिक की दरगाह पर चूजे चढ़ाए जाते हैं।
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गंगोह (सहारनपुर)। नर सेवा नारायण सेवा को चरितार्थ करते हुए उर्स में श्री सेवा सदन अंबाला द्वारा पिछले 50 साल से भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इनके अलावा मामू आलाबख्श के दरगाह परिसर सहित अनेक स्थानों पर भंडारों का आयोजन होता है।
सेवा सदन के भंडारे की व्यवस्था देखने वाले हेमचंद जैन और सुशील जैन ने बताया कि सेवा सदन की स्थापना मरहूम लाला डिप्टी मल जैन एवं रामजी लाल जैन द्वारा की गई थी। कहा कि जायरीनों की सेवा कर उन्हें असीम शांति मिलती है। भगत मोहन लाल, राममूर्ति, विक्रमपाल सिंह, अनिल जैन, अजायब सिंह, बलदेव नंबरदार आदि मामू आला बख्श के नाम पर भंडारा चलाते हैं। दरगाह परिसर में मामू के नाम पर अशोक कुमार, बब्बू भगत, अमित कुमार, नरेश कुमार, पवन बंसल, राजकुमार, गौरव कर्णवाल, रमेश सरपंच, सतीश, आलोक कुमार, जीत शर्मा आदि उर्स की शुरुआत से लेकर अंत तक भंडारे का आयोजन करते हैं। इनके अलावा अमित कुमार, विकास कुमार भी मामू के नाम पर भंडारा चलाते है। इन लोगों का कहना है कि मामू मौलाबख्श की मेहरबानी से भक्तजनों की मुरादें पूरी होती है। इनके अलावा शाह अता मंजिल और दरगाह हजरत कुतबे आलम सहित 20 से ज्यादा स्थानों पर दिन रात भंडारा चलता रहता है।
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बेपनाह मोहब्बत की मिसाल है मामू और लाडो रानी की दरगाह
गंगोह। मामू मौलाबख्श और लाडोरानी की दरगाह बेपनाह मोहब्बत की मिसाल है। बताते है कि दोनो में बेपनाह मोहब्बत थी। यही कारण है कि दोनों की मजारें बराबर में बनी है। किदवंती है कि यहां मन्नत मांगने से अविवाहितों के विवाह और बेऔलादों को औलाद मिल जाती है। जायरीनों को मन माफिक पति एवं पत्नी मिलती है। मुराद पूरी होने पर लाडोरानी की मजार पर लाल चुनरी, चूड़ियां, श्रृंगार का सामान एवं झाडू़ चढ़ाई जाती है। जबकि हजरत मामू मौलाबख्श और इनके महबूब हजरत शेख सादिक की दरगाह पर चूजे चढ़ाए जाते हैं।
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