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डीएम की बैठक में नहीं पहुंचे सीबीएसई स्कूल संचालक
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:56 PM IST
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सहारनपुर। निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन कराने के लिए मंगलवार को विकास भवन में स्कूल संचालकों की बैठक बुलाई गई। बैठक का उद्देश्य स्कूलों को कानून का पालन करने के लिए सहमत करना था। मगर डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक से सीबीएसई स्कूल संचालक नदारद रहे।
जिले में सीबीएसई के 50 से अधिक स्कूल हैं, जबकि आईसीएसई के स्कूलों की संख्या दो है। मंगलवार को विकास भवन में बुलाई गई स्कूल संचालकों की बैठक में मान्यता प्राप्त हिन्दी माध्यम के विद्यालयों के संचालकों ने हिस्सा लिया, मगर इक्का-दुक्का को छोड़कर सीबीएसई के तमाम संचालक नहीं पहुंचे। इसकी वजह से बैठक फीकी रही। डीएम पीके पांडेय ने इसपर नाराजगी व्यक्त की और दोबारा बैठक बुलाने के निर्देश बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह को दिए। हालांकि उन्होंने मौजूद स्कूल संचालकों से बच्चों के हित में कानून का पालन करने की अपील की। बैठक में सीडीओ संजीव रंजन, डीआईओएस आरके तिवारी, बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह समेत अनेक शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे। उधर, उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अशोक मलिक ने आरटीई के तहत 25 फीसदी बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ाने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि पूर्व में पढ़ाए गए बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति का पैसा अभी तक नहीं मिला है।
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जिले में सीबीएसई के 50 से अधिक स्कूल हैं, जबकि आईसीएसई के स्कूलों की संख्या दो है। मंगलवार को विकास भवन में बुलाई गई स्कूल संचालकों की बैठक में मान्यता प्राप्त हिन्दी माध्यम के विद्यालयों के संचालकों ने हिस्सा लिया, मगर इक्का-दुक्का को छोड़कर सीबीएसई के तमाम संचालक नहीं पहुंचे। इसकी वजह से बैठक फीकी रही। डीएम पीके पांडेय ने इसपर नाराजगी व्यक्त की और दोबारा बैठक बुलाने के निर्देश बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह को दिए। हालांकि उन्होंने मौजूद स्कूल संचालकों से बच्चों के हित में कानून का पालन करने की अपील की। बैठक में सीडीओ संजीव रंजन, डीआईओएस आरके तिवारी, बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह समेत अनेक शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे। उधर, उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अशोक मलिक ने आरटीई के तहत 25 फीसदी बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ाने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि पूर्व में पढ़ाए गए बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति का पैसा अभी तक नहीं मिला है।
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