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हकीम अजमल ने गांधीजी के साथ मिलकर लड़ी आजादी की लड़ाई
Updated Mon, 12 Feb 2018 11:58 PM IST
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हकीम अजमल ने गांधीजी के साथ लड़ी थी आजादी की लड़ाई
देवबंद (सहारनपुर)। देवबंद यूनानी मेडिकल कॉलेज में हकीम अजमल खान की 150वीं वर्षगांठ यूनानी दिवस के रूप में मनाई गई। जिसमें अतिथियों ने यूनानी चिकित्सा पद्धति से संपूर्ण इलाज के तरीकों पर प्रकाश डाला।
अस्पताल सभागार में आयोजित समारोह में प्रबंधक प्रोफेसर डा. कमरूज्जमा कुरैशी ने कहा कि हकीम अजमल खान ने अपनी जिंदगी गंगा जमुनी तहजीब और आयुर्वेद यूनानी के लिए समर्पित कर दी। उन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए हिंदुस्तान की आजादी में अमूल्य योगदान दिया। आयुर्वेद एवं यूनानी नुस्खों को उस वक्त अंग्रेजी सरकार इंग्लैंड में अपने अस्पतालों में इस्तेमाल करती थी। प्राचार्य डा. असलम ने कहा कि हकीम अजमल खान ने अपनी जिंदगी में महात्मा गांधी से आयुर्वेद एवं यूनानी तिब्बिया कॉलेज का शिलान्यास कराया तथा उसकी शुरूआत करोल बाग दिल्ली से की। उन्होंने गांधीजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई लड़ी तथा देश के लिए कुर्बानी दी। मौलाना हकीम शफीउर्रहमान कासमी ने कहा कि हकीम साहब ने उच्च रक्तचाप के लिए ऐसी यूनानी औषधि असरोल दुनिया को दी, जिसका कोई विकल्प आज तक नहीं बना। हकीम अजमल अपने वक्त के बेहतरीन नाड़ी विशेषज्ञ थे। इस दौरान करीब 300 मरीजों का यूनानी पद्धति से निशुल्क उपचार भी किया गया। समारोह में प्रो. ताहिर हसन, डा. मतलूब कासमी, हिलाल हमीद व डा. नासिर ने भी विचार रखे। संचालन डा. अफजाल अहमद मलिक ने किया। इस मौके पर हकीम अब्दुल्ला, हकीम सलीम, हकीम मतलूब आदि रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। देवबंद यूनानी मेडिकल कॉलेज में हकीम अजमल खान की 150वीं वर्षगांठ यूनानी दिवस के रूप में मनाई गई। जिसमें अतिथियों ने यूनानी चिकित्सा पद्धति से संपूर्ण इलाज के तरीकों पर प्रकाश डाला।
अस्पताल सभागार में आयोजित समारोह में प्रबंधक प्रोफेसर डा. कमरूज्जमा कुरैशी ने कहा कि हकीम अजमल खान ने अपनी जिंदगी गंगा जमुनी तहजीब और आयुर्वेद यूनानी के लिए समर्पित कर दी। उन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए हिंदुस्तान की आजादी में अमूल्य योगदान दिया। आयुर्वेद एवं यूनानी नुस्खों को उस वक्त अंग्रेजी सरकार इंग्लैंड में अपने अस्पतालों में इस्तेमाल करती थी। प्राचार्य डा. असलम ने कहा कि हकीम अजमल खान ने अपनी जिंदगी में महात्मा गांधी से आयुर्वेद एवं यूनानी तिब्बिया कॉलेज का शिलान्यास कराया तथा उसकी शुरूआत करोल बाग दिल्ली से की। उन्होंने गांधीजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई लड़ी तथा देश के लिए कुर्बानी दी। मौलाना हकीम शफीउर्रहमान कासमी ने कहा कि हकीम साहब ने उच्च रक्तचाप के लिए ऐसी यूनानी औषधि असरोल दुनिया को दी, जिसका कोई विकल्प आज तक नहीं बना। हकीम अजमल अपने वक्त के बेहतरीन नाड़ी विशेषज्ञ थे। इस दौरान करीब 300 मरीजों का यूनानी पद्धति से निशुल्क उपचार भी किया गया। समारोह में प्रो. ताहिर हसन, डा. मतलूब कासमी, हिलाल हमीद व डा. नासिर ने भी विचार रखे। संचालन डा. अफजाल अहमद मलिक ने किया। इस मौके पर हकीम अब्दुल्ला, हकीम सलीम, हकीम मतलूब आदि रहे।
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