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किसके सिर फूटेगा हार का ठिकरा
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:48 AM IST
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किसके सिर फूटेगा हार का ठीकरा
सहारनपुर। गंगोह और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में मिली शिकस्त का ठीकरा किसके सिर फूटेगा। इस सवाल को लेकर भाजपा में खलबली है। पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने और जनप्रतिनिधियों द्वारा उपेक्षा किए जाने को लेकर शोर था। ऐसे में मंत्री धर्म सिंह सैनी का कद घटने के साथ संगठन में बदलाव की भी चर्चा होती रही।
गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट हारने के बाद भाजपा पहले दिन से ही यह दावा करती रही कि कैराना उप चुनाव में पार्टी प्रत्याशी की जीत होगी। पहले कुछ गलतियां हो गई थी, वो दोहराने नहीं दिया जाएगा। पार्टी में कई स्तर पर प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा उठा। मुख्यमंत्री के सामने भी यह रोना रोया गया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि उनकी सरकार के राज अधिकारी उनके वाजिब कम भी करने को तैयार नहीं है। इससे जमीनी स्तर पर पार्टी के खिलाफ माहौल बन रहा है। कार्यकर्ताओं में जोश भरने के बजाए चुनाव में मंत्रियों, विधायकों और केन्द्रीय और राज्य स्तरीय पदाधिकारियों को उतारकर जीत का ताना-बाना बुन लिया गया। अंबेहटा रैली में मुख्यमंत्री ने जब सीट लेकर आने की बात कही थी तो तमाम नेताओं ने उन्हें जीत के प्रति आश्वस्त कर भेज दिया। बृहस्पतिवार को परिणाम आया तो भाजपा के चेहरे बुझ गए, क्योंकि गठबंधन प्रत्याशी को सबसे ज्यादा बढ़त इन्हीं दोनों विधानसभा से मिली थी। हार के बाद अब भाजपा में ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाए, इस पर मंथन शुरू हो गया है। सीधे तौर पर तो नकुड़ से विधायक और राज्यमंत्री डा. धर्म सिंह और गंगोह क्षेत्र के विधायक प्रदीप चौधरी की साख को बट्टा लगा है। भाजपाइयों में दिन भी चर्चा रही कि आने वाले कुछ दिनों में कई अधिकारियों के स्थानांतरण के साथ भाजपा संगठन में बदलाव हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि हार का ठीकरा किसके सिर फूटता है।
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सहारनपुर। गंगोह और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में मिली शिकस्त का ठीकरा किसके सिर फूटेगा। इस सवाल को लेकर भाजपा में खलबली है। पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने और जनप्रतिनिधियों द्वारा उपेक्षा किए जाने को लेकर शोर था। ऐसे में मंत्री धर्म सिंह सैनी का कद घटने के साथ संगठन में बदलाव की भी चर्चा होती रही।
गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट हारने के बाद भाजपा पहले दिन से ही यह दावा करती रही कि कैराना उप चुनाव में पार्टी प्रत्याशी की जीत होगी। पहले कुछ गलतियां हो गई थी, वो दोहराने नहीं दिया जाएगा। पार्टी में कई स्तर पर प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा उठा। मुख्यमंत्री के सामने भी यह रोना रोया गया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि उनकी सरकार के राज अधिकारी उनके वाजिब कम भी करने को तैयार नहीं है। इससे जमीनी स्तर पर पार्टी के खिलाफ माहौल बन रहा है। कार्यकर्ताओं में जोश भरने के बजाए चुनाव में मंत्रियों, विधायकों और केन्द्रीय और राज्य स्तरीय पदाधिकारियों को उतारकर जीत का ताना-बाना बुन लिया गया। अंबेहटा रैली में मुख्यमंत्री ने जब सीट लेकर आने की बात कही थी तो तमाम नेताओं ने उन्हें जीत के प्रति आश्वस्त कर भेज दिया। बृहस्पतिवार को परिणाम आया तो भाजपा के चेहरे बुझ गए, क्योंकि गठबंधन प्रत्याशी को सबसे ज्यादा बढ़त इन्हीं दोनों विधानसभा से मिली थी। हार के बाद अब भाजपा में ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाए, इस पर मंथन शुरू हो गया है। सीधे तौर पर तो नकुड़ से विधायक और राज्यमंत्री डा. धर्म सिंह और गंगोह क्षेत्र के विधायक प्रदीप चौधरी की साख को बट्टा लगा है। भाजपाइयों में दिन भी चर्चा रही कि आने वाले कुछ दिनों में कई अधिकारियों के स्थानांतरण के साथ भाजपा संगठन में बदलाव हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि हार का ठीकरा किसके सिर फूटता है।
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