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टेंडर प्रक्रियाओं में नियमों की अनदेखी कर रहे अधिकारी
Updated Mon, 30 Oct 2017 12:46 AM IST
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टेंडर प्रक्रियाओं में नियमों की अनदेखी कर रहे अधिकारी
सहारनपुर। सूबे में हुकूमत बदली, मगर जो नहीं बदला तो वह है नगर निगम के अधिकारियों का काम करने का तरीका। जी हां! नगर निगम के अफसर आज भी अनेक कार्यों में नियमों की अनदेखी कर मनमानी कर रहे हैं। ताजा मामला हाल ही में निकाले गए सफाई निरीक्षकों और एंट्री गेट बस शेल्टर निर्माण के टेंडर का है। इसमें अनेक गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उधर, अधिकारी खामियों को छिपाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
नगर निगम ने बरसात से पहले बिना टेंडर कोटेशन हुए नाले और नालियों की सफाई के 60 लाख रुपये का भुगतान इंस्पेक्टर से गारंटी लिए बिना ही कर दिया। यह मामला ऑडिट में पकड़ में आया है। प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कार्यों को पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रही है। पारदर्शिता के लिए यह भी है कि कोई कार्य बिना टेंडर निकाले न किया जाए। मगर नगर निगम के अधिकारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बरसात से पहले होने वाली नाले और नालियों की सफाई का काम बिना टेंडर कोटेशन के ही करा लिया गया था। पूर्व नगरायुक्त ओपी वर्मा ने इसके भुगतान पर रोक लगा दी थी। साथ ही तमाम स्वास्थ्य निरीक्षकों से नालों की सफाई का प्रमाण पत्र मांगा था। बाद में जांच हो सकती थी। ऐसे में कोई भी सफाई निरीक्षक प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सका।
कार्रवाई के डर से ही ओपी वर्मा के समय में भुगतान के लिए पत्रावली प्रस्तुत नहीं की गई थी। मगर उनके ट्रांसफर के तीन महीने बाद यानी कुछ ही दिन पहले। वर्तमान नगरायुक्त से सच छिपाकर 225 पत्रावलियां प्रस्तुत कर 60 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया। बाद में भुगतान की पत्रावलियों का जब ऑडिट किया गया तो उसमें पूरा सच सामने आया। उधर, स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर में सिटी बसें चलाने की तैयारी है। इसके लिए 22 स्थानों पर गेट एंट्री और 23 स्थानों पर बस शेल्टर बनाए जाने हैं। सूत्रों ने बताया कि नगर निगम की ओर से 15 अक्तूबर को विज्ञापन जारी किया गया। टेंडर 21 अक्तूबर को ओपन करने थे। मगर दिवाली की छुट्टियों की वजह से ज्यादातर ठेकेदार टेंडर नहीं खरीद सके। ऐसे में पूरी प्रक्रिया विवादों में घिर गई है।
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सिटी बस के संचालन के लिए जो भी गेट एंट्री और बस शेल्टर बनाए जाने हैं उनकी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी पारदर्शिता के साथ अपनाई जाएगी। इसके अलावा यदि नाले-नालियों की सफाई की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। सूबे में हुकूमत बदली, मगर जो नहीं बदला तो वह है नगर निगम के अधिकारियों का काम करने का तरीका। जी हां! नगर निगम के अफसर आज भी अनेक कार्यों में नियमों की अनदेखी कर मनमानी कर रहे हैं। ताजा मामला हाल ही में निकाले गए सफाई निरीक्षकों और एंट्री गेट बस शेल्टर निर्माण के टेंडर का है। इसमें अनेक गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उधर, अधिकारी खामियों को छिपाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
नगर निगम ने बरसात से पहले बिना टेंडर कोटेशन हुए नाले और नालियों की सफाई के 60 लाख रुपये का भुगतान इंस्पेक्टर से गारंटी लिए बिना ही कर दिया। यह मामला ऑडिट में पकड़ में आया है। प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कार्यों को पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रही है। पारदर्शिता के लिए यह भी है कि कोई कार्य बिना टेंडर निकाले न किया जाए। मगर नगर निगम के अधिकारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बरसात से पहले होने वाली नाले और नालियों की सफाई का काम बिना टेंडर कोटेशन के ही करा लिया गया था। पूर्व नगरायुक्त ओपी वर्मा ने इसके भुगतान पर रोक लगा दी थी। साथ ही तमाम स्वास्थ्य निरीक्षकों से नालों की सफाई का प्रमाण पत्र मांगा था। बाद में जांच हो सकती थी। ऐसे में कोई भी सफाई निरीक्षक प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सका।
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कार्रवाई के डर से ही ओपी वर्मा के समय में भुगतान के लिए पत्रावली प्रस्तुत नहीं की गई थी। मगर उनके ट्रांसफर के तीन महीने बाद यानी कुछ ही दिन पहले। वर्तमान नगरायुक्त से सच छिपाकर 225 पत्रावलियां प्रस्तुत कर 60 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया। बाद में भुगतान की पत्रावलियों का जब ऑडिट किया गया तो उसमें पूरा सच सामने आया। उधर, स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर में सिटी बसें चलाने की तैयारी है। इसके लिए 22 स्थानों पर गेट एंट्री और 23 स्थानों पर बस शेल्टर बनाए जाने हैं। सूत्रों ने बताया कि नगर निगम की ओर से 15 अक्तूबर को विज्ञापन जारी किया गया। टेंडर 21 अक्तूबर को ओपन करने थे। मगर दिवाली की छुट्टियों की वजह से ज्यादातर ठेकेदार टेंडर नहीं खरीद सके। ऐसे में पूरी प्रक्रिया विवादों में घिर गई है।
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सिटी बस के संचालन के लिए जो भी गेट एंट्री और बस शेल्टर बनाए जाने हैं उनकी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी पारदर्शिता के साथ अपनाई जाएगी। इसके अलावा यदि नाले-नालियों की सफाई की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।