{"_id":"5c719d98bdec2273970e591e","slug":"151550949784-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आतंकियों के ऑनलाइन दोस्तों का पता लगा रही एटीएस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आतंकियों के ऑनलाइन दोस्तों का पता लगा रही एटीएस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आतंकियों के आनलाइन दोस्तों का पता लगा रही एटीएस
सहारनपुर। देवबंद से दबोचे गए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य शाहनवाज और आकिब के ऑनलाइन दोस्तों को तलाशने में एटीएस जुटी हुई है। हालांकि ऐसे दोस्तों का पता लगाना आसान नहीं है, जिनसे दोनों आतंकियों ने स्पेशल चेटिंग ऐप के जरिये चैटिंग की थी। क्योंकि ऑनलाइन एप की चैटिंग का ब्योरा संकलित करने वाला कोई माध्यम अभी पुलिस के पास नहीं है।
वैसे सोशल साइट्स पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर नजर रखने के लिए चार साल पूर्व मेरठ में लैब की स्थापना की गई थी। तब तक व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसी सोशल साइट प्रचलन में थीं, लेकिन बीते तीन वर्ष में ऐसे विभिन्न एप्लीकेशन भी इजाद हुए, जिनसे ऑनलाइन चेटिंग की जाती है और उनका रिकार्ड भी सुरक्षित नहीं रह पाता है।
वहीं, देवबंद से गिरफ्तार किए गए दोनों आतंकियों के बारे में भी यही पता चला कि वह दोनों एंड्रायड फोन से स्पेशल एप्लीकेशन के जरिये लोगों से जुड़ते थे। इसमें वह पश्चिमी यूपी के भी काफी लोगों से संपर्क में रहे होंगे, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल गिरफ्तार दोनों आरोपियों को एटीएस की टीम अपने साथ सहारनपुर से लखनऊ ले गई है। वहां दोनों आरोपियों से इन सभी बिन्दुओं पर पूछताछ होगी कि इन लोगों ने ऑनलाइन किस किससे संबंध स्थापित किए थे। वहीं, आरोपियों द्वारा कई महीने से पश्चिमी यूपी में सक्रिय रहने की बात से बड़े खतरे की तरफ इशारा भी हो रहा है। क्योंकि इस दौरान आतंकियों ने देवबंद में रहने के अलावा पश्चिमी यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर सहित अन्य जनपदों में अपना नेटवर्क खड़ा करने का प्रयास किया होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। देवबंद से दबोचे गए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य शाहनवाज और आकिब के ऑनलाइन दोस्तों को तलाशने में एटीएस जुटी हुई है। हालांकि ऐसे दोस्तों का पता लगाना आसान नहीं है, जिनसे दोनों आतंकियों ने स्पेशल चेटिंग ऐप के जरिये चैटिंग की थी। क्योंकि ऑनलाइन एप की चैटिंग का ब्योरा संकलित करने वाला कोई माध्यम अभी पुलिस के पास नहीं है।
वैसे सोशल साइट्स पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर नजर रखने के लिए चार साल पूर्व मेरठ में लैब की स्थापना की गई थी। तब तक व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसी सोशल साइट प्रचलन में थीं, लेकिन बीते तीन वर्ष में ऐसे विभिन्न एप्लीकेशन भी इजाद हुए, जिनसे ऑनलाइन चेटिंग की जाती है और उनका रिकार्ड भी सुरक्षित नहीं रह पाता है।
विज्ञापन
वहीं, देवबंद से गिरफ्तार किए गए दोनों आतंकियों के बारे में भी यही पता चला कि वह दोनों एंड्रायड फोन से स्पेशल एप्लीकेशन के जरिये लोगों से जुड़ते थे। इसमें वह पश्चिमी यूपी के भी काफी लोगों से संपर्क में रहे होंगे, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल गिरफ्तार दोनों आरोपियों को एटीएस की टीम अपने साथ सहारनपुर से लखनऊ ले गई है। वहां दोनों आरोपियों से इन सभी बिन्दुओं पर पूछताछ होगी कि इन लोगों ने ऑनलाइन किस किससे संबंध स्थापित किए थे। वहीं, आरोपियों द्वारा कई महीने से पश्चिमी यूपी में सक्रिय रहने की बात से बड़े खतरे की तरफ इशारा भी हो रहा है। क्योंकि इस दौरान आतंकियों ने देवबंद में रहने के अलावा पश्चिमी यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर सहित अन्य जनपदों में अपना नेटवर्क खड़ा करने का प्रयास किया होगा।
विज्ञापन