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हाईकोर्ट के आदेश पर जमा कराया 123.95 करोड़ का प्रवेश कर
Updated Wed, 16 May 2018 12:20 AM IST
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सहारनपुर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद सोमवार को प्रतिष्ठित कंपनी आईटीसी लिमिटेड ने प्रवेश कर और उस पर लगे ब्याज के 123.45 करोड़ रुपये बैंक में जमा करा दिए। वाणिज्यकर विभाग द्वारा लगाया गया यह प्रवेश कर 21 मार्च 2007 से नवंबर 2011 का है। जमा कराई गई धनराशि में 90.50 करोड़ रुपये बकाया प्रवेश कर और 33.45 करोड़ रुपये ब्याज के हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार सारा मामला सिगरेट आदि पर प्रवेश कर लगाने को लेकर था। वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने सिगरेट आदि पर प्रवेश कर लगाया था। जिस पर आईटीसी सहित अन्य कई कंपनियों का कहना था कि राज्य को प्रवेश कर लगाने का हक नहीं है। इसके खिलाफ इन कंपनियों को वर्ष 2007 में हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया था। मामले की सुनवाई के बाद नवंबर 2011 में हाईकोर्ट ने वाणिज्यकर विभाग के पक्ष में निर्णय देते हुए प्रवेश कर को सही माना। इस पर कंपनियां सुप्रीम कोर्ट गईं। उच्चतम न्यायालय ने 10 जनवरी 2012 में कहा कि प्रवेश कर की धनराशि के 50 प्रतिशत को कैश और बाकि 50 फीसदी की बैंक गारंटी जमा की जाए। विभागीय सूत्रों के मुताबिक मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर दोबारा हाईकोर्ट जाने को कहा। इस पर ये कंपनियां ने हाईकोर्ट में अपनी रिट दाखिल की। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने चार मई 2018 के निर्णय में विभिन्न वस्तुओं पर लगाए गए प्रवेश कर को वैध ठहराते हुए ब्याज सहित प्रवेश कर जमा करने के निर्देश दिए। इसके बाद आईटीसी की ओर से सोमवार को 123.95 करोड़ रुपये की धनराशि जमा करा दी गई । एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-1 एके पाठक और ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक रेंज बी एके जैन के निर्देशन में खंड 11 के डिप्टी कमिश्नर वीपी सिंह और डिप्टी कमिश्नर प्रशासन अनिल सिंह आदि ने पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
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हाईकोर्ट के निर्णय के बाद आईटीसी लिमिटेड ने सोमवार को 123.95 करोड़ रुपये प्रवेश कर और उसके ब्याज के जमा कराए हैं। इसमें 90.50 करोड़ रुपये प्रवेश कर और 33.45 करोड़ रुपये ब्याज के शामिल हैं। प्रवेश कर की मद में नॉन ऑयल सेक्टर में यह प्रदेश में जमा कराई गई यह सबसे बड़ी धनराशि है।
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----अनिल कुमार पाठक, एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-1
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विभागीय सूत्रों के अनुसार सारा मामला सिगरेट आदि पर प्रवेश कर लगाने को लेकर था। वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने सिगरेट आदि पर प्रवेश कर लगाया था। जिस पर आईटीसी सहित अन्य कई कंपनियों का कहना था कि राज्य को प्रवेश कर लगाने का हक नहीं है। इसके खिलाफ इन कंपनियों को वर्ष 2007 में हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया था। मामले की सुनवाई के बाद नवंबर 2011 में हाईकोर्ट ने वाणिज्यकर विभाग के पक्ष में निर्णय देते हुए प्रवेश कर को सही माना। इस पर कंपनियां सुप्रीम कोर्ट गईं। उच्चतम न्यायालय ने 10 जनवरी 2012 में कहा कि प्रवेश कर की धनराशि के 50 प्रतिशत को कैश और बाकि 50 फीसदी की बैंक गारंटी जमा की जाए। विभागीय सूत्रों के मुताबिक मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर दोबारा हाईकोर्ट जाने को कहा। इस पर ये कंपनियां ने हाईकोर्ट में अपनी रिट दाखिल की। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने चार मई 2018 के निर्णय में विभिन्न वस्तुओं पर लगाए गए प्रवेश कर को वैध ठहराते हुए ब्याज सहित प्रवेश कर जमा करने के निर्देश दिए। इसके बाद आईटीसी की ओर से सोमवार को 123.95 करोड़ रुपये की धनराशि जमा करा दी गई । एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-1 एके पाठक और ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक रेंज बी एके जैन के निर्देशन में खंड 11 के डिप्टी कमिश्नर वीपी सिंह और डिप्टी कमिश्नर प्रशासन अनिल सिंह आदि ने पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
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हाईकोर्ट के निर्णय के बाद आईटीसी लिमिटेड ने सोमवार को 123.95 करोड़ रुपये प्रवेश कर और उसके ब्याज के जमा कराए हैं। इसमें 90.50 करोड़ रुपये प्रवेश कर और 33.45 करोड़ रुपये ब्याज के शामिल हैं। प्रवेश कर की मद में नॉन ऑयल सेक्टर में यह प्रदेश में जमा कराई गई यह सबसे बड़ी धनराशि है।
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----अनिल कुमार पाठक, एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-1