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बाहरी प्रत्याशियों को समर्थन देने के मूंड में नहीं वोटर
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:14 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। इस बार निकाय चुनाव में अपने वार्ड छोड़कर दूसरे वार्डों से चुनाव लड़ रहे बाहरी प्रत्याशियों को वोटर जोर का झटका देने के मूंड में लग रहे हैं। लोगों का मानना है कि चुनाव जीतने के बाद बाहरी प्रत्याशी वार्ड की अनदेखी करते हैं। इसलिए इस बार अपने ही वार्ड के किसी प्रत्याशी को चुनाव में समर्थन किया जाएगा।
सड़कें और नालियां टूटी हुईं, पथ प्रकाश व्यवस्था भी लचर, जगह जगह सड़कों पर पड़े कूड़े के ढेर। वार्डों की यह हालत देखने के बाद इस बार निकाय चुनाव में वोटरों ने मन बनाया है कि बाहरी प्रत्याशी को समर्थन देने के बजाए वह अपने ही वार्ड का मेम्बर चुनेंगे। ताकि वह वार्ड की समस्याओं को दूर कर सके और समय पडने पर आसानी से मिल सके। आमतौर पर निकाय चुनाव में सभासद पद के दावेदार अपना वार्ड छोड़कर दूसरे वार्ड से नामांकन करते हैं और जीत हासिल होने के बाद वह मुडकर वापस वार्ड की तरफ देखते ही नहीं। कहीं पानी की समस्या तो कहीं नालियां और सड़कें टूटी हुई रहती हैं जिससे लोगों को भारी परेशानी का सलमझ्ना करना पड़ता है। इसलिए इस बार चुनाव में अधिकांश वार्ड वासियों ने मन बनाया हुआ है कि वह किसी भी बाहरी प्रत्याशी को समर्थन नहीं देंगे। इससे दूसरे वार्डों में चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों के सामने वोटरों को समझना बड़ी चुनौती होगी।
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सड़कें और नालियां टूटी हुईं, पथ प्रकाश व्यवस्था भी लचर, जगह जगह सड़कों पर पड़े कूड़े के ढेर। वार्डों की यह हालत देखने के बाद इस बार निकाय चुनाव में वोटरों ने मन बनाया है कि बाहरी प्रत्याशी को समर्थन देने के बजाए वह अपने ही वार्ड का मेम्बर चुनेंगे। ताकि वह वार्ड की समस्याओं को दूर कर सके और समय पडने पर आसानी से मिल सके। आमतौर पर निकाय चुनाव में सभासद पद के दावेदार अपना वार्ड छोड़कर दूसरे वार्ड से नामांकन करते हैं और जीत हासिल होने के बाद वह मुडकर वापस वार्ड की तरफ देखते ही नहीं। कहीं पानी की समस्या तो कहीं नालियां और सड़कें टूटी हुई रहती हैं जिससे लोगों को भारी परेशानी का सलमझ्ना करना पड़ता है। इसलिए इस बार चुनाव में अधिकांश वार्ड वासियों ने मन बनाया हुआ है कि वह किसी भी बाहरी प्रत्याशी को समर्थन नहीं देंगे। इससे दूसरे वार्डों में चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों के सामने वोटरों को समझना बड़ी चुनौती होगी।
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