{"_id":"5c6465a8bdec22090f3fc3c2","slug":"141550083496-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गन्ने की 0238 प्रजाति पर रेड रूट का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गन्ने की 0238 प्रजाति पर रेड रूट का खतरा
विज्ञापन
बड़गांव (सहारनपुर)। गन्ना किसान व शुगर मिलों को मालामाल कर प्रदेश को चीनी उत्पादन में नंबर एक बनाने वाली गन्ने की सबसे सफल प्रजाति 0238 लाल सड़न (रेड रूट) रोग का शिकार होने लगी है।
पिछले कुछ वर्षों से चीनी मिलों और किसानों के लिए गन्ना प्रजाति को 0238 इतनी अच्छी साबित हुई है कि किसानों ने भी इसका उत्पादन 90 फीसदी तक करना शुरू कर दिया है। पिछले दो वर्ष से इस प्रजाति में भयंकर रूप से लाल सड़न रोग दिखाई दे रहा है।
सिसौनी निवासी जनेश, बड़गांव निवासी कालूराम, बल्लू माजरा निवासी कर्ण सिंह, चंदपुर निवासी सूरजभान, शिमलाना निवासी मोहन सिंह आदि ने बताया कि इस साल उनके गन्ने में बीमारी आने से उन्हें आधी फसल का नुकसान हुआ है। इस रेड रूट बीमारी में गन्ने की जड़ गलकर लाल होने लगती है। जड़ के साथ गन्ने का तना भी लाल होने लगता है। रेड रूट बीमारी से ग्रस्त गन्ने को बीच में से काटने पर बदबू आती है और गन्ने का तना व अगोला भी सूखने लगता है। यह बीमारी एक गन्ने से दूसरे गन्ने में भी फैलती रहती है। इससे गन्ने की पैदावार और चीनी की रिकवरी दोनों प्रभावित होती है। त्रिवेणी शुगर मिल के जीएम एवं गन्ना विशेषज्ञ डा. बीएस तोमर ने बताया कि वसंत कालीन गन्ना बुवाई का सीजन शुरू होने जा रहा है। किसानों को चाहिए कि वो इस प्रजाति को 0238 को बचाने के लिए खेत की तैयारी करते समय गहरी जुताई करें और तैयार खेत में शाम के समय ट्राईकोड्रमा 2 किलो ग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग करें। इससे फसल को लाल सड़न रोग की फफूंदी से बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
त्रिवेणी शुगर मिल के गन्ना विशेषज्ञ डा विकास मलिक ने बताया कि बीज का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि उस खेत का बीज न लें जिस खेत में पानी भरा हो। बीज को सदैव दो दो आंख वाले टुकड़े काटकर ही बुवाई करें। बुवाई के समय पहले इन टुकड़ों को थियोमिनेट मिथाइल 250 ग्राम प्रति एकड़ अथवा कार्बेडाजिम प्लस मैंकोजेब के घोल से उपचारित कर लें तथा गन्ना बुवाई से पूर्व खेत में गोबर की सड़ी खाद या फिर मिल की सड़ी हुई मैली का ही प्रयोग करें। इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। गन्ना बुवाई में लाइन से लाइन की दूरी कम से कम 4 फीट रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ट्रैंच विधि से बुवाई करने से गन्ने की पैदावार 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
विज्ञापन
पिछले कुछ वर्षों से चीनी मिलों और किसानों के लिए गन्ना प्रजाति को 0238 इतनी अच्छी साबित हुई है कि किसानों ने भी इसका उत्पादन 90 फीसदी तक करना शुरू कर दिया है। पिछले दो वर्ष से इस प्रजाति में भयंकर रूप से लाल सड़न रोग दिखाई दे रहा है।
विज्ञापन
सिसौनी निवासी जनेश, बड़गांव निवासी कालूराम, बल्लू माजरा निवासी कर्ण सिंह, चंदपुर निवासी सूरजभान, शिमलाना निवासी मोहन सिंह आदि ने बताया कि इस साल उनके गन्ने में बीमारी आने से उन्हें आधी फसल का नुकसान हुआ है। इस रेड रूट बीमारी में गन्ने की जड़ गलकर लाल होने लगती है। जड़ के साथ गन्ने का तना भी लाल होने लगता है। रेड रूट बीमारी से ग्रस्त गन्ने को बीच में से काटने पर बदबू आती है और गन्ने का तना व अगोला भी सूखने लगता है। यह बीमारी एक गन्ने से दूसरे गन्ने में भी फैलती रहती है। इससे गन्ने की पैदावार और चीनी की रिकवरी दोनों प्रभावित होती है। त्रिवेणी शुगर मिल के जीएम एवं गन्ना विशेषज्ञ डा. बीएस तोमर ने बताया कि वसंत कालीन गन्ना बुवाई का सीजन शुरू होने जा रहा है। किसानों को चाहिए कि वो इस प्रजाति को 0238 को बचाने के लिए खेत की तैयारी करते समय गहरी जुताई करें और तैयार खेत में शाम के समय ट्राईकोड्रमा 2 किलो ग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग करें। इससे फसल को लाल सड़न रोग की फफूंदी से बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
त्रिवेणी शुगर मिल के गन्ना विशेषज्ञ डा विकास मलिक ने बताया कि बीज का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि उस खेत का बीज न लें जिस खेत में पानी भरा हो। बीज को सदैव दो दो आंख वाले टुकड़े काटकर ही बुवाई करें। बुवाई के समय पहले इन टुकड़ों को थियोमिनेट मिथाइल 250 ग्राम प्रति एकड़ अथवा कार्बेडाजिम प्लस मैंकोजेब के घोल से उपचारित कर लें तथा गन्ना बुवाई से पूर्व खेत में गोबर की सड़ी खाद या फिर मिल की सड़ी हुई मैली का ही प्रयोग करें। इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। गन्ना बुवाई में लाइन से लाइन की दूरी कम से कम 4 फीट रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ट्रैंच विधि से बुवाई करने से गन्ने की पैदावार 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।