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पांवधोई नदी की सफाई को चलेगा महाअभियान
Updated Sun, 17 Jun 2018 12:40 AM IST
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पांवधोई नदी की सफाई के लिए चलेगा महाअभियान
सहारनपुर। शहर के बीच से होकर गुजर रही पांवधोई नदी की सफाई के लिए अब महाअभियान चलेगा। कमिश्नर ने नदी की सफाई के लिए कार्य योजना तैयार की है। उद्गम स्थल से पांच किलोमीटर लंबी इस नदी की सफाई का यह अभियान होगा तो एक दिवसीय, मगर इस अभियान में एक साथ तीन हजार से अधिक सफाईकर्मी लगाए जाएंगे। इनके अलावा कमिश्नर से लेकर नीचे तक के तमाम संबंधित अधिकारी भी अभियान के दौरान मौजूद रहेंगे।
पांवधोई नदी को स्थानीय गंगा का दर्जा प्राप्त है, जिसके धार्मिक मायने हैं। पूर्व में बाबा लाल दास बाड़े पर बड़ा घाट था, जहां पूजा अर्चना और स्नान हुआ करते थे। मगर धीरे-धीरे नदी के प्रति लोगों की आस्था दम तोड़ती चली गई। वर्तमान में नदी की हालत खस्ता है। नदी को दूषित करने के लिए आम नागरिक से लेकर प्रशासन तक जिम्मेदार है, जो नदी में सीधे गिर रहे सीवर और नालों के पानी की सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर सका। उद्गम स्थल से नदी के अंतिम छोर तक 70 से अधिक नाले, नालियां और सीवर डाले गए हैं। पूर्व डीएम आलोक कुमार ने नदी की सफाई का बीड़ा उठाया था, जिनकी देखरेख में नदी की सफाई के लिए काफी काम हुआ। इसको गंदा होने से बचाने के लिए दोनों ओर ऊंचा जाल लगाया गया। नदी को देखने के लिए जल पुरुष राजेंद्र सिंह तक यहां आए थे। नदी पर काम करने के लिए आलोक कुमार विदेशों तक में सम्मानित हुए। उनके जाने के बाद आए डीएम पीके पांडेय ने भी दिलचस्पी दिखाई, मगर धरातल पर काम नहीं हो पाया। नदी की सफाई की मुख्य जिम्मेदारी नगर निगम की है। मगर नगर निगम प्रत्येक वर्ष खानापूर्ति करता चला आ रहा है। नदी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पांवधोई बचाओ समिति भी बनी हुई है मगर वह भी काम की कम और नाम की अधिक साबित होती रही है। अब कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने नदी की सफाई के लिए विशेष योजना तैयार की है। नदी की सफाई के लिए एक दिवसीय सफाई अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान नदी के उद्गम स्थल शकलापुरी से अंतिम छोर ढमोला नदी में गिरने तक चलेगा। नदी की सफाई में नगर निगम से जुड़े शहरी क्षेत्र के साथ ही देहातों में तैनात प्रत्येक सफाईकर्मी को लगाया जाएगा। यानी जिलेभर के तीन हजार से अधिक सफाईकर्मी एक साथ नदी की सफाई के लिए इसमें उतरेंगे।
एसटीपी से होकर नदी में गिरेगा सीवर का पानी
नगर निगम शहर में सीवर के पानी को साफ करने के लिए एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने की तैयारी में है। शहर में कुल तीन एसटीपी लगाए जाएंगे, जिनमें पहले एसटीपी पर काम अंतिम चरण में है। यह एसटीपी धोबीघाट के पास बनाया जा रहा है। नगर निगम अफसरों का कहना है कि एसटीपी तैयार होने के बाद सीवर का पानी साफ होकर नदी में छोड़ा जाएगा।
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पांवधोई के बगैर साफ नहीं होगी हिंडन
पांवधोई नदी ढमोला नदी में जाकर समाती है, जबकि ढमोला नदी हिंडन नदी में गिरती है। शासन और प्रशासन हिंडन नदी को साफ करने के लिए परियोजना चला रहे हैं। इसमें मेरठ और सहारनपुर मंडल के अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। मेरठ कमिश्नर प्रभात कुमार इसमें मुख्य भूमिका में हैं। मगर चूंकि पांवधोई और ढमोला नदी हिंडन में समाती है। ऐसे में हिंडन की सफाई के लिए पांवधोई और ढमोला नदी को भी साफ किया जाना जरूरी है।
स्मार्ट सिटी योजना का अहम हिस्सा है पांवधोई
पांवधोई नदी स्मार्ट सिटी योजना का अहम हिस्सा है। योजना के तहत पांवधोई नदी को स्वच्छ बनाने के साथ ही इसका कायाकल्प किया जाना भी प्रस्तावित है। नदी के ऊपर शहर में पार्किंग आदि बनाए जाने की भी योजना है। इसके अलावा इसके कायाकल्प के लिए इसके दोनों किनारों पर कलरफुल लाइटें लगाने का भी प्लान है, जिससे कलरफुल लाइटों की रोशनी जब नदी में पड़े तो रात के अंधेरे में इसकी सुंदरता नजर आए।
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पांवधोई नदी को साफ करना हमारी प्राथमिकता में है। हम नदी की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाने वाले हैं। यह अभियान एक दिन का होगा। अभियान नदी के उदगम स्थल से शुरू होकर ढमोला नदी में गिरने के स्थान तक चलेगा। इसमें जिले भर के सफाईकर्मियों को इसमें उतारा जाएगा। प्रशासनिक मशीनरी भी मौके पर मौजूद रहेगी। आम नागरिकों से अपील है कि वह नदी को गंदा न करें और न ही किसी को करने दें।
चंद्रप्रकाश त्रिपाठी, कमिश्नर।
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सहारनपुर। शहर के बीच से होकर गुजर रही पांवधोई नदी की सफाई के लिए अब महाअभियान चलेगा। कमिश्नर ने नदी की सफाई के लिए कार्य योजना तैयार की है। उद्गम स्थल से पांच किलोमीटर लंबी इस नदी की सफाई का यह अभियान होगा तो एक दिवसीय, मगर इस अभियान में एक साथ तीन हजार से अधिक सफाईकर्मी लगाए जाएंगे। इनके अलावा कमिश्नर से लेकर नीचे तक के तमाम संबंधित अधिकारी भी अभियान के दौरान मौजूद रहेंगे।
पांवधोई नदी को स्थानीय गंगा का दर्जा प्राप्त है, जिसके धार्मिक मायने हैं। पूर्व में बाबा लाल दास बाड़े पर बड़ा घाट था, जहां पूजा अर्चना और स्नान हुआ करते थे। मगर धीरे-धीरे नदी के प्रति लोगों की आस्था दम तोड़ती चली गई। वर्तमान में नदी की हालत खस्ता है। नदी को दूषित करने के लिए आम नागरिक से लेकर प्रशासन तक जिम्मेदार है, जो नदी में सीधे गिर रहे सीवर और नालों के पानी की सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर सका। उद्गम स्थल से नदी के अंतिम छोर तक 70 से अधिक नाले, नालियां और सीवर डाले गए हैं। पूर्व डीएम आलोक कुमार ने नदी की सफाई का बीड़ा उठाया था, जिनकी देखरेख में नदी की सफाई के लिए काफी काम हुआ। इसको गंदा होने से बचाने के लिए दोनों ओर ऊंचा जाल लगाया गया। नदी को देखने के लिए जल पुरुष राजेंद्र सिंह तक यहां आए थे। नदी पर काम करने के लिए आलोक कुमार विदेशों तक में सम्मानित हुए। उनके जाने के बाद आए डीएम पीके पांडेय ने भी दिलचस्पी दिखाई, मगर धरातल पर काम नहीं हो पाया। नदी की सफाई की मुख्य जिम्मेदारी नगर निगम की है। मगर नगर निगम प्रत्येक वर्ष खानापूर्ति करता चला आ रहा है। नदी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पांवधोई बचाओ समिति भी बनी हुई है मगर वह भी काम की कम और नाम की अधिक साबित होती रही है। अब कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने नदी की सफाई के लिए विशेष योजना तैयार की है। नदी की सफाई के लिए एक दिवसीय सफाई अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान नदी के उद्गम स्थल शकलापुरी से अंतिम छोर ढमोला नदी में गिरने तक चलेगा। नदी की सफाई में नगर निगम से जुड़े शहरी क्षेत्र के साथ ही देहातों में तैनात प्रत्येक सफाईकर्मी को लगाया जाएगा। यानी जिलेभर के तीन हजार से अधिक सफाईकर्मी एक साथ नदी की सफाई के लिए इसमें उतरेंगे।
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एसटीपी से होकर नदी में गिरेगा सीवर का पानी
नगर निगम शहर में सीवर के पानी को साफ करने के लिए एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने की तैयारी में है। शहर में कुल तीन एसटीपी लगाए जाएंगे, जिनमें पहले एसटीपी पर काम अंतिम चरण में है। यह एसटीपी धोबीघाट के पास बनाया जा रहा है। नगर निगम अफसरों का कहना है कि एसटीपी तैयार होने के बाद सीवर का पानी साफ होकर नदी में छोड़ा जाएगा।
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पांवधोई के बगैर साफ नहीं होगी हिंडन
पांवधोई नदी ढमोला नदी में जाकर समाती है, जबकि ढमोला नदी हिंडन नदी में गिरती है। शासन और प्रशासन हिंडन नदी को साफ करने के लिए परियोजना चला रहे हैं। इसमें मेरठ और सहारनपुर मंडल के अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। मेरठ कमिश्नर प्रभात कुमार इसमें मुख्य भूमिका में हैं। मगर चूंकि पांवधोई और ढमोला नदी हिंडन में समाती है। ऐसे में हिंडन की सफाई के लिए पांवधोई और ढमोला नदी को भी साफ किया जाना जरूरी है।
स्मार्ट सिटी योजना का अहम हिस्सा है पांवधोई
पांवधोई नदी स्मार्ट सिटी योजना का अहम हिस्सा है। योजना के तहत पांवधोई नदी को स्वच्छ बनाने के साथ ही इसका कायाकल्प किया जाना भी प्रस्तावित है। नदी के ऊपर शहर में पार्किंग आदि बनाए जाने की भी योजना है। इसके अलावा इसके कायाकल्प के लिए इसके दोनों किनारों पर कलरफुल लाइटें लगाने का भी प्लान है, जिससे कलरफुल लाइटों की रोशनी जब नदी में पड़े तो रात के अंधेरे में इसकी सुंदरता नजर आए।
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पांवधोई नदी को साफ करना हमारी प्राथमिकता में है। हम नदी की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाने वाले हैं। यह अभियान एक दिन का होगा। अभियान नदी के उदगम स्थल से शुरू होकर ढमोला नदी में गिरने के स्थान तक चलेगा। इसमें जिले भर के सफाईकर्मियों को इसमें उतारा जाएगा। प्रशासनिक मशीनरी भी मौके पर मौजूद रहेगी। आम नागरिकों से अपील है कि वह नदी को गंदा न करें और न ही किसी को करने दें।
चंद्रप्रकाश त्रिपाठी, कमिश्नर।