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डिपों में खड़ी रह गईं बसें, नहीं मिले यात्री
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:32 AM IST
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सहारनपुर। कांवड़ मेले के दौरान यात्रियों एव कांवड़ियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए की गई व्यवस्था धरी रह गई। आय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की थी, लेकिन आय बढ़ने की बजाय आधी ही रह गई। बसें डिपो में ही खड़ी रहीं, बसों को यात्री ही नहीं मिल सके। जिससे परिवहन निगम को दस दिन में पांच करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो गया।
कांवड़ मेले को लेकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम मंडल के तीनों जिलों के सभी छह डिपो में विशेष व्यवस्था की गई थी। यहां तक कि खराब खड़ी हुई बसों को भी मरम्मत करके सड़कों पर उतारा गया। कांवड़ के चलते रूट डायवर्जन के कारण दूरी बढ़ गई तो किराया भी बढ़ा दिया गया। जिससे अधिकारियों को निगम की आय बढ़ने की उम्मीद थी। कांवड़ियों को भी गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बसों को आरक्षित रखा गया। 28 जुलाई के हुए रूट डायवर्जन के बाद से ही परिवर्तित रूट से बसों का संचालन शुरू किया गया था, लेकिन बसों डिपो में ही खड़ी रह गईं और बसों को यात्री ही नहीं मिल सके। सहारनपुर डिपो की ही लगभग 25 लाख रुपये प्रतिदिन की आय हो रही थी। लेकिन यह आय फिलहाल घटकर 12 से 15 हजार रुपये मात्र रह गई है। यही हाल छुटमलपुर, मुजफ्फरनगर, खतौली, शामली की है। जिससे दस दिन में लगभग पांच करोड़ रुपये का फटका रोडवेज को लगने की आशंका जताई जा रही है। कारण लंबी दूरी, अधिक समय और अधिक किराया होना भी माना जा रहा है, जिससे यात्री रोडवेज बसों से छिटक कर ट्रेनों की ओर चले गए। सहारनपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश सिंह का कहना है कि 25-30 लाख रुपये प्रतिदिन की आय घटकर मात्र 12 से 15 हजार रुपये रह गई है। जबकि कांवड़ यात्रा के दौरान आय बढ़ने की संभावना थी। इस बार कांवड़ यात्री बसों से काफी कम ही गए। डिपो में ही बसें खड़ी रहीं।
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कांवड़ मेले को लेकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम मंडल के तीनों जिलों के सभी छह डिपो में विशेष व्यवस्था की गई थी। यहां तक कि खराब खड़ी हुई बसों को भी मरम्मत करके सड़कों पर उतारा गया। कांवड़ के चलते रूट डायवर्जन के कारण दूरी बढ़ गई तो किराया भी बढ़ा दिया गया। जिससे अधिकारियों को निगम की आय बढ़ने की उम्मीद थी। कांवड़ियों को भी गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बसों को आरक्षित रखा गया। 28 जुलाई के हुए रूट डायवर्जन के बाद से ही परिवर्तित रूट से बसों का संचालन शुरू किया गया था, लेकिन बसों डिपो में ही खड़ी रह गईं और बसों को यात्री ही नहीं मिल सके। सहारनपुर डिपो की ही लगभग 25 लाख रुपये प्रतिदिन की आय हो रही थी। लेकिन यह आय फिलहाल घटकर 12 से 15 हजार रुपये मात्र रह गई है। यही हाल छुटमलपुर, मुजफ्फरनगर, खतौली, शामली की है। जिससे दस दिन में लगभग पांच करोड़ रुपये का फटका रोडवेज को लगने की आशंका जताई जा रही है। कारण लंबी दूरी, अधिक समय और अधिक किराया होना भी माना जा रहा है, जिससे यात्री रोडवेज बसों से छिटक कर ट्रेनों की ओर चले गए। सहारनपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश सिंह का कहना है कि 25-30 लाख रुपये प्रतिदिन की आय घटकर मात्र 12 से 15 हजार रुपये रह गई है। जबकि कांवड़ यात्रा के दौरान आय बढ़ने की संभावना थी। इस बार कांवड़ यात्री बसों से काफी कम ही गए। डिपो में ही बसें खड़ी रहीं।
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