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जवान के परिवार का उत्पीड़न
Updated Sun, 11 Feb 2018 11:57 PM IST
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गंगोह (सहारनपुर)। बांग्लादेश सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान अजय कुमार के परिवार के उत्पीड़न के मामले में अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। उधर, पुलिस के भय से परिवार के पढ़ने वाले तीन बच्चों की परीक्षा भी छूट गई है। इसके चलते उनका भविष्य बर्बाद हो गया है। प्रशासन के रवैये से बेहद आहत जवान ने गांव से परिवार के पलायन की चेतावनी दी है।
देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ त्याग कर सीमा पर गोलियों की बौछार झेलने वाले जवानों को लेकर सरकारें और प्रशासन जरा भी संवेदनशील नहीं है। गांव ताताहेड़ी जवान अजय कुमार और उसका परिवार इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है। आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा ग्राम प्रधान और कुछ अन्य लोगों की मिलीभगत से भूमि कब्जा मुक्त अभियान के दौरान जवान के परिवार पर सरकारी भूमि कब्जाने का आरोप लगाकर पहले तो उनकी खड़ी फसल नष्ट कर दी। इसके बाद जवान के पूरे परिवार के खिलाफ कोतवाली में बेहद गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। पढ़ने वाले बच्चों, युवतियों और महिलाओं को भी नामजद कर दिया गया। पिता और भाई को जेल भेज दिया गया जबकि अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी गई। इसके चलते बच्चें और महिलाएं गांव से इधर-उधर हो गए। करीब 22 दिन जेल में रहने के बाद पिता और भाई जमानत पर जेल से बाहर आ पाए।
तीन बच्चों की परीक्षा छुटी, भविष्य बर्बाद
गंगोह। जवान अजय कुमार ने बेहद दुखी मन से बताया कि प्रशासन ने उसके पूरे परिवार को छिन्न भिन्न कर दिया है। पुलिस के भय से उसके भतीजे सोनम की हाईस्कूल की और भतीजियों गौतम की बीटेक द्वितीय वर्ष एवं कोमल की बीफार्मा फाइनल की परीक्षाएं छूट गई है। तीनों बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया है।
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गांव से पलायन करने की चेतावनी
गंगोह। केंद्र एवं प्रदेश सरकार के रवैये और पुलिस प्रशासन की बेरुखी से आहत बीएसएफ जवान अजय का कहना है कि अब उसका विश्वास उठता जा रहा है। पुलिस का रवैया केवल टालमटौल का दिखाई दे रहा है। पुलिस दोषियों पर कार्रवाई करना तो दूर अभी तक जांच भी पूरी नहीं कर पाई है। जबकि उसके परिवार पर बिना जांच-पड़ताल त्वरित कार्रवाई करते हुए पिता और भाई को जेल भेज दिया गया था। जवान ने गांव से परिवार के पलायन
भारत मोहित
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देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ त्याग कर सीमा पर गोलियों की बौछार झेलने वाले जवानों को लेकर सरकारें और प्रशासन जरा भी संवेदनशील नहीं है। गांव ताताहेड़ी जवान अजय कुमार और उसका परिवार इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है। आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा ग्राम प्रधान और कुछ अन्य लोगों की मिलीभगत से भूमि कब्जा मुक्त अभियान के दौरान जवान के परिवार पर सरकारी भूमि कब्जाने का आरोप लगाकर पहले तो उनकी खड़ी फसल नष्ट कर दी। इसके बाद जवान के पूरे परिवार के खिलाफ कोतवाली में बेहद गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। पढ़ने वाले बच्चों, युवतियों और महिलाओं को भी नामजद कर दिया गया। पिता और भाई को जेल भेज दिया गया जबकि अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी गई। इसके चलते बच्चें और महिलाएं गांव से इधर-उधर हो गए। करीब 22 दिन जेल में रहने के बाद पिता और भाई जमानत पर जेल से बाहर आ पाए।
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तीन बच्चों की परीक्षा छुटी, भविष्य बर्बाद
गंगोह। जवान अजय कुमार ने बेहद दुखी मन से बताया कि प्रशासन ने उसके पूरे परिवार को छिन्न भिन्न कर दिया है। पुलिस के भय से उसके भतीजे सोनम की हाईस्कूल की और भतीजियों गौतम की बीटेक द्वितीय वर्ष एवं कोमल की बीफार्मा फाइनल की परीक्षाएं छूट गई है। तीनों बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया है।
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गांव से पलायन करने की चेतावनी
गंगोह। केंद्र एवं प्रदेश सरकार के रवैये और पुलिस प्रशासन की बेरुखी से आहत बीएसएफ जवान अजय का कहना है कि अब उसका विश्वास उठता जा रहा है। पुलिस का रवैया केवल टालमटौल का दिखाई दे रहा है। पुलिस दोषियों पर कार्रवाई करना तो दूर अभी तक जांच भी पूरी नहीं कर पाई है। जबकि उसके परिवार पर बिना जांच-पड़ताल त्वरित कार्रवाई करते हुए पिता और भाई को जेल भेज दिया गया था। जवान ने गांव से परिवार के पलायन
भारत मोहित