गंगोह (सहारनपुर)। बज्मे कुद्दूसी के तत्वावधान में गत रात्रि एक तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। शायरों ने गजल और गीत पेश किए और अपने कलाम पर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। मोहल्ला इलाही बख्श में डा. यूसुफ रशीद के आवास पर आयोजित इस मुशायरे का आगाज तिलावते कलामे पाक से हुआ। सूफी चांद ने नाते पाक पढ़ी। इसके बाद मुशायरे को गजल के दौर में ले जाते हुए अशफाक कुद्दूसी ने अपने इस शेर पर खूब वाह वाही लूटी ‘तू खुश हो ले मेरे कत्ले बेगुनाही पर, मगर ये सोच कि तू भी इसी क़तार में है’। उसामा का ये शेर खूब पसंद किया गया ‘बिछड़ के तुम से चलो मै तो मुस्कुरा लूंगा, मगर उदासी तो उतरी दरो दीवार पर है’। मास्टर यासीन ने पढ़ा ‘बहुत खुलूस से मिलते हैं सभी आपस में, हमारा शहर मुहब्बत की यादगार में है’। सहारनपुर से आए बुजुर्ग उस्ताद शायर अब्दुल कय्यूम ने कुछ यूं अपना कलाम पेश किया ‘खिजां रसीदा कोई है कोई बहार में हैं, हर एक शख्स मुकद्दर के अख्तियार में है’। सहारनपुर से आए हास्य और व्यंग्य के शायर बशारत शेरवानी ने अपने अलग अंदाज में यूं कहा ‘हो मोटा या पतला या हो अमीर व गरीब, हर एक शख्स मुकद्दर के अख्तियार में है’। डा. यूसुफ रशीद और नौशाद नाज ने गीत पेश किए। इनके अतिरिक्त डा. आरिफ रशीद, आसिम फारूकी, सलाहुद्दीन थानवी, यूनुस रहबर कुरैशी, नसीम अनवर अयूबी, शमशाद गंगोही ने भी अपने कलाम पेश किए। संचालन मसरूर अजमल ने किया। शादाब जहां कुद्दूसी, अजहर मियां कुद्दूसी, अरीब कुद्दूसी, उमर खान, वसीम अहमद, अकबर कुद्दूसी, कुतब अली, नसीम खान आदि उपस्थित रहे।