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धुएं से दूर रखिए अनमोल जिंदगी
Updated Wed, 21 Nov 2018 01:07 AM IST
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धुएं से दूर रखिए अनमोल जिंदगी
सहारनपुर। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) बीमारी के फैलने का बड़ा कारण सिगरेट और बीड़ी का धुआं है। जिला भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। चिकित्सकों के यहां ओपीडी में प्रतिदिन काफी संख्या में सीओपीडी के मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कई अध्ययनों के मुताबिक एक सिगरेट पीने से जिंदगी के छह मिनट कम होते हैं। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह धूम्रपान सहित किसी भी तरह के धुएं से बचें।
विश्व सीओपीडी दिवस पर चिकित्सकों ने इस बीमारी से बचाव के लिए चेताया है। नगर के वरिष्ठ चिकित्सक डा. संजीव मिगलानी का कहना है कि मरीज को सुबह के समय खांसी आने लगती है। साथ ही गले में खिच-खिच रहने लगती है। दूसरे स्तर पर दौड़ते समय या थोड़ा सा भी भारी काम करते सांस फूल जाती है। तीसरे स्तर में नहाते और कपड़े पहनते हुए भी सांस फूल जाती है। चौथे और अंतिम स्तर पर हाथों और पैरों में सूजन आ जाती है। अक्सर फेफड़े भी फेल हो जाते हैं।
सीओपीडी होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे वायु प्रदूषण, चिमनियों से निकलने वाला धुआं, उपलों के जलने से निकलने वाला धुआं और वेल्डिंग का धुआं। मगर धूम्रपान खासकर सिगरेट इनमें सबसे खतरनाक है। सिगरेट में भरे तंबाकू के साथ ही सिगरेट का कागज भी जलता है, जिसमें से 599 तत्व निकलते हैं। इन तत्वों में मुख्यत: निकोटिन, कार्बन मोनोक्साइड, आर्सेनिक और कैडमियम जैसे रसायन शामिल हैं। उनका कहना है कि सीओपीडी के मरीजों को नाक पर मास्क पहनकर निकलना चाहिए। साथ ही सामान्य लोगों से भी प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
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सीएमओ डा. बीएस सौढ़ी कहते हैं कि जिन लोगों को यह बीमारी है, वे सबसे पहले धूम्रपान से ही परहेज करें। चिकित्सक की सलाह के अनुसार इनहेलर और सांस में राहत के लिए जरूरी दवाओं का इस्तेमाल करते रहें। वे कहते हैं कि सीओपीडी के मरीजों को धूम्रपान, प्रदूषण और धूल से बचना चाहिए। परहेज नहीं करने पर यह बीमारी गंभीर स्टेज में चली जाती है, जिसमें मरीज की मृत्यु भी हो जाती है। सीओपीडी के लक्षण सामने आने पर तुरंत जिला या अन्य सरकारी अस्पताल में संपर्क करें।
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सहारनपुर। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) बीमारी के फैलने का बड़ा कारण सिगरेट और बीड़ी का धुआं है। जिला भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। चिकित्सकों के यहां ओपीडी में प्रतिदिन काफी संख्या में सीओपीडी के मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कई अध्ययनों के मुताबिक एक सिगरेट पीने से जिंदगी के छह मिनट कम होते हैं। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह धूम्रपान सहित किसी भी तरह के धुएं से बचें।
विश्व सीओपीडी दिवस पर चिकित्सकों ने इस बीमारी से बचाव के लिए चेताया है। नगर के वरिष्ठ चिकित्सक डा. संजीव मिगलानी का कहना है कि मरीज को सुबह के समय खांसी आने लगती है। साथ ही गले में खिच-खिच रहने लगती है। दूसरे स्तर पर दौड़ते समय या थोड़ा सा भी भारी काम करते सांस फूल जाती है। तीसरे स्तर में नहाते और कपड़े पहनते हुए भी सांस फूल जाती है। चौथे और अंतिम स्तर पर हाथों और पैरों में सूजन आ जाती है। अक्सर फेफड़े भी फेल हो जाते हैं।
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सीओपीडी होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे वायु प्रदूषण, चिमनियों से निकलने वाला धुआं, उपलों के जलने से निकलने वाला धुआं और वेल्डिंग का धुआं। मगर धूम्रपान खासकर सिगरेट इनमें सबसे खतरनाक है। सिगरेट में भरे तंबाकू के साथ ही सिगरेट का कागज भी जलता है, जिसमें से 599 तत्व निकलते हैं। इन तत्वों में मुख्यत: निकोटिन, कार्बन मोनोक्साइड, आर्सेनिक और कैडमियम जैसे रसायन शामिल हैं। उनका कहना है कि सीओपीडी के मरीजों को नाक पर मास्क पहनकर निकलना चाहिए। साथ ही सामान्य लोगों से भी प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
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सीएमओ डा. बीएस सौढ़ी कहते हैं कि जिन लोगों को यह बीमारी है, वे सबसे पहले धूम्रपान से ही परहेज करें। चिकित्सक की सलाह के अनुसार इनहेलर और सांस में राहत के लिए जरूरी दवाओं का इस्तेमाल करते रहें। वे कहते हैं कि सीओपीडी के मरीजों को धूम्रपान, प्रदूषण और धूल से बचना चाहिए। परहेज नहीं करने पर यह बीमारी गंभीर स्टेज में चली जाती है, जिसमें मरीज की मृत्यु भी हो जाती है। सीओपीडी के लक्षण सामने आने पर तुरंत जिला या अन्य सरकारी अस्पताल में संपर्क करें।