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आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती है दिव्या
Updated Mon, 30 Apr 2018 12:16 AM IST
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सहारनपुर। दसवीं में जनपद टॉप करने के साथ ही प्रदेश में छठा स्थान हासिल करने वाली दिव्या आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। परिणाम आने के बाद सफलता से उत्साहित दिव्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। बेटी की सफलता से परिवार में खुशियों का माहौल है।
स्टार पेपर मिल्स सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से दसवीं की छात्रा दिव्या ने 93.67 फीसदी अंक प्राप्त किए। दिव्या के पिता सुबोध कुमार एक प्राइवेट कंपनी में एकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मां जया देवी गृहणी हैं। दिव्या ने परीक्षा की तैयारी के लिए साल भर थोड़ा थोड़ा पढ़ा और कोर्स को निपटाती गई। परीक्षा के दिनों में वह 10 से 15 घंटे नहीं पढ़ी, बल्कि चार से पांच घंटे पढ़ाई करने के बाद बाकी समय में टीवी देखा और घर के काम में मां का हाथ भी बटाया। दिव्या का कहना है कि अधिक घंटे पढ़ाई करने से टॉपर नहीं बना जाता। खास बात यह है कि आप जितना भी घंटे पढ़ें मन लगाकर पढ़ें। दिव्या ने हिंदी-97, अंग्रेजी-92, गणित-98, विज्ञान-90, सामाजिक विज्ञान-90, चित्रकला-95 अंक हासिल किए। मां जया देवी और पिता सुबोध कुमार का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी के अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, मगर उसने जनपद में पहला और प्रदेश में छठा स्थान हासिल कर उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया। जया का कहना है कि यदि बेटियों को बराबर अधिकार और मौके मिले तो वह बेटों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है।
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स्टार पेपर मिल्स सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से दसवीं की छात्रा दिव्या ने 93.67 फीसदी अंक प्राप्त किए। दिव्या के पिता सुबोध कुमार एक प्राइवेट कंपनी में एकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मां जया देवी गृहणी हैं। दिव्या ने परीक्षा की तैयारी के लिए साल भर थोड़ा थोड़ा पढ़ा और कोर्स को निपटाती गई। परीक्षा के दिनों में वह 10 से 15 घंटे नहीं पढ़ी, बल्कि चार से पांच घंटे पढ़ाई करने के बाद बाकी समय में टीवी देखा और घर के काम में मां का हाथ भी बटाया। दिव्या का कहना है कि अधिक घंटे पढ़ाई करने से टॉपर नहीं बना जाता। खास बात यह है कि आप जितना भी घंटे पढ़ें मन लगाकर पढ़ें। दिव्या ने हिंदी-97, अंग्रेजी-92, गणित-98, विज्ञान-90, सामाजिक विज्ञान-90, चित्रकला-95 अंक हासिल किए। मां जया देवी और पिता सुबोध कुमार का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी के अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, मगर उसने जनपद में पहला और प्रदेश में छठा स्थान हासिल कर उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया। जया का कहना है कि यदि बेटियों को बराबर अधिकार और मौके मिले तो वह बेटों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है।
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